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ननौरा के जल मसीहा बने कालीचरन
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:10 PM IST
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छतों पर रखीं पानी की टंकियां
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीनगर इलाके की ननौरा ग्रामसभा के पथरीले इलाके में बूंद बूंद पानी केे लिए तरस रही छह हजार की अबादी के लिए गांव के कालीचरन जल मसीहा बन गए हैं। गांव के लोगों को भरपूर पानी मुहैया कराने के लिए इन्होंने दो एकड़ जमीन बेच दी।
इससे मिले पैसे से गांव में बोरिंग करवाई और 35 हजार लीटर पानी इकट्ठा करने के लिए पांच टंकि यां रखवाईं। अब गांव के लोगों को हर वक्त मुफ्त पानी मुहैया हो रहा है। गांव के लोग पेयजल संकट कटने से सुकून में हैं।
जिले में सूखा के हालात हैं। दो साल से बरसात नहीं हुई। जलस्तर नीचे खिसक गया है। कुआं व बांध सूख रहे हैं। हैंडपंप भी जवाब देने लगे। फरवरी माह के खत्म होते होते कबरई विकास खंड की ननौरा ग्र्रामसभा में 43 में से 34 हैंडपंप पूरी तरह ठप हो गए। बाकी 9 हैंडपंप भी पानी छोड़ने लगे। इससे छह हजार की आबादी के सामने पानी की गंभीर मुसीबत हो गई। गांव के लोगों ने नेताओं, जनप्रतिनिधियों व हाकिमों से पानी की समस्या के निराकरण कराए जाने की गुहार लगाई।
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इनकी सुनी किसी ने नहीं। ऐसे वक्त में गांव केे किसान कालीचरन पटेल मसीहा बनकर सामने आए। इन्होंने इसी साल मार्च में गांव के लोगों को पानी मुहैया कराने की ठान ली। इनकेे पास पैसा नहीं था। इसके लिए दो एकड़ जमीन बेच दी। इससे मिले पैसे से 40 हजार रुपये में बोरिंग करवाई। 25 हजार रुपये से सबमर्सिबल लगवाया। सात सात हजार लीटर की पांच पानी की टंकियां खरीदीं।
सुबह, दोपहर व शाम को सबमर्सिबल से मकान की छत पर रखी यह टंकियां भरी जाती हैं। इन टंकियों में लगे पाइपों से पानी नीचे लाया जाता है। नीचे छह टोटियां लगाई गई हैं। इनसे लोग पानी भरते हैं। पानी के लिए किसी से कोई भी पैसा नहीं लिया जाता है।
नेता के अन्याय से प्रेरणा
ननौरा गांव के लोगों के लिए मसीहा बने कालीचरन की प्रेरणा एक नेता का अन्याय बना। चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी ने गांव के लोगों क ा वोट पाने के लिए हैंडपंप में सबमर्सिबल डलवाया था। चुनाव हारने के बाद नेता ने सबमर्सिबल उखड़वा लिया। इससे गांव के लोगों के सामने फिर से पेयजल संकट खड़ा हो गया। तभी से कालीचरन ने पेयजल की समस्या के समाधान का मन बना लिया था।
कालीचरन पटेल
कालीचरन पटेल के चार भाई हैं। यह कक्षा आठ तक पढ़े हैं। आठ बीघा जमीन पर खेती कर परिवार चलाते हैं। इनका कहना है कि गांव के लोगों को पेयजल समस्या से निजात दिलाकर आत्मसंतुष्टि मिली है। इस बुरे दौर में सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।
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इससे मिले पैसे से गांव में बोरिंग करवाई और 35 हजार लीटर पानी इकट्ठा करने के लिए पांच टंकि यां रखवाईं। अब गांव के लोगों को हर वक्त मुफ्त पानी मुहैया हो रहा है। गांव के लोग पेयजल संकट कटने से सुकून में हैं।
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जिले में सूखा के हालात हैं। दो साल से बरसात नहीं हुई। जलस्तर नीचे खिसक गया है। कुआं व बांध सूख रहे हैं। हैंडपंप भी जवाब देने लगे। फरवरी माह के खत्म होते होते कबरई विकास खंड की ननौरा ग्र्रामसभा में 43 में से 34 हैंडपंप पूरी तरह ठप हो गए। बाकी 9 हैंडपंप भी पानी छोड़ने लगे। इससे छह हजार की आबादी के सामने पानी की गंभीर मुसीबत हो गई। गांव के लोगों ने नेताओं, जनप्रतिनिधियों व हाकिमों से पानी की समस्या के निराकरण कराए जाने की गुहार लगाई।
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इनकी सुनी किसी ने नहीं। ऐसे वक्त में गांव केे किसान कालीचरन पटेल मसीहा बनकर सामने आए। इन्होंने इसी साल मार्च में गांव के लोगों को पानी मुहैया कराने की ठान ली। इनकेे पास पैसा नहीं था। इसके लिए दो एकड़ जमीन बेच दी। इससे मिले पैसे से 40 हजार रुपये में बोरिंग करवाई। 25 हजार रुपये से सबमर्सिबल लगवाया। सात सात हजार लीटर की पांच पानी की टंकियां खरीदीं।
सुबह, दोपहर व शाम को सबमर्सिबल से मकान की छत पर रखी यह टंकियां भरी जाती हैं। इन टंकियों में लगे पाइपों से पानी नीचे लाया जाता है। नीचे छह टोटियां लगाई गई हैं। इनसे लोग पानी भरते हैं। पानी के लिए किसी से कोई भी पैसा नहीं लिया जाता है।
नेता के अन्याय से प्रेरणा
ननौरा गांव के लोगों के लिए मसीहा बने कालीचरन की प्रेरणा एक नेता का अन्याय बना। चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी ने गांव के लोगों क ा वोट पाने के लिए हैंडपंप में सबमर्सिबल डलवाया था। चुनाव हारने के बाद नेता ने सबमर्सिबल उखड़वा लिया। इससे गांव के लोगों के सामने फिर से पेयजल संकट खड़ा हो गया। तभी से कालीचरन ने पेयजल की समस्या के समाधान का मन बना लिया था।
कालीचरन पटेल
कालीचरन पटेल के चार भाई हैं। यह कक्षा आठ तक पढ़े हैं। आठ बीघा जमीन पर खेती कर परिवार चलाते हैं। इनका कहना है कि गांव के लोगों को पेयजल समस्या से निजात दिलाकर आत्मसंतुष्टि मिली है। इस बुरे दौर में सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।