{"_id":"96eb9988a39b74e613a9bb325dd64dd3","slug":"the-strike-passenger-buses-presaan-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसों की हड़ताल से यात्री परेश्ाान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसों की हड़ताल से यात्री परेश्ाान
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Thu, 01 Oct 2015 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महोबा। केंद्र सरकार द्वारा सड़क परिवहन व सुरक्षा कानून 2015 के विरोध में जिला यूनियन चालक व परिचालक संघ संघ के हड़ताल में जाने से पूरे दिन आवागमन ठप रहा। प्राइवेट वाहन न चलने से पूरे दिन लोग इधर से उधर भटकते रहे।
जिला मुख्यालय से मध्यप्रदेश के छतरपुर, खजुराहो, सतना, पन्ना, रीवा, सागर, टीकमगढ़, नौगांव, चंदला, राजनगर, बड़ा मलहरा आदि कस्बे और जिलों में संचालन होता है। मध्यप्रदेश की विभिन्न जिलों की यातायात व्यवस्था प्राइवेट बसों पर निर्भर है। गुरुवार को चालक परिचालकों की हड़ताल के चलते सारा दिन मध्यप्रदेश की तरफ दौड़ने वाली बसों के चक्के जाम रहे, इतना ही नहीं महोबा से झांसी जाने वाली बसों का भी संचालन नहीं हो सका। इससे यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कानून के विरोध में जिला यूनियन चालक परिचालक संघ ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सड़क परिवहन व सुरक्षा कानून 2015 लागू होने से परिचालक पद समाप्त व चालकों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। परमिट व्यवस्था की जगह टेंडर व्यवस्था प्रावधान कर ट्रांसपोर्ट उद्योग पर खरबपतियों का कब्जा हो जाएगा। वहीं कानून के लागू होने से चालकों को दुर्घटनाओं के जिम्मेदार मानकर कठोर दंड जिए जाने की व्यवस्था की गई है।
एमपी के लिए ट्रेन सुविधा नहीं, यात्री रहे हलाकान
जिला मुख्यालय से मध्य प्रदेश के लिए ट्रेनों की सुविधा न होने के कारण मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाने वाले यात्री गुरुवार को सुबह से ही वाहनों की तलाश में इधर से उधर भटकते रहे। तमाम यात्रियों ने मजबूरन साधन न मिलने से इधर से उधर भटकते रहे। जिला मुख्यालय से मध्य प्रदेश के खजुराहो जाने के लिए ही ट्रेन का साधन है, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जनपदों में जाने के लिए यहां के यात्रियों को रोडवेज व प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन
टेंपो चालकों ने काटी चांदी
बसों की हड़ताल के चलते टेंपो चालकों की बल्ले बल्ले रही। बसें न चलने से टेंपो चालक भूसे की तरह भर कर चलते रहे, इतना ही नहीं टेंपो चालकों ने दो गुना किराया वसूला। बसें न चलने के कारण टेंपो चालकों ने तीस किलोमीटर तक का सफर यात्रियों का कराया, इसके आगे का सफर करने के लिए यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। बसों की हड़ताल से टेंपो चालकों ने जमकर चांदी काटी।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय से मध्यप्रदेश के छतरपुर, खजुराहो, सतना, पन्ना, रीवा, सागर, टीकमगढ़, नौगांव, चंदला, राजनगर, बड़ा मलहरा आदि कस्बे और जिलों में संचालन होता है। मध्यप्रदेश की विभिन्न जिलों की यातायात व्यवस्था प्राइवेट बसों पर निर्भर है। गुरुवार को चालक परिचालकों की हड़ताल के चलते सारा दिन मध्यप्रदेश की तरफ दौड़ने वाली बसों के चक्के जाम रहे, इतना ही नहीं महोबा से झांसी जाने वाली बसों का भी संचालन नहीं हो सका। इससे यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कानून के विरोध में जिला यूनियन चालक परिचालक संघ ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सड़क परिवहन व सुरक्षा कानून 2015 लागू होने से परिचालक पद समाप्त व चालकों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। परमिट व्यवस्था की जगह टेंडर व्यवस्था प्रावधान कर ट्रांसपोर्ट उद्योग पर खरबपतियों का कब्जा हो जाएगा। वहीं कानून के लागू होने से चालकों को दुर्घटनाओं के जिम्मेदार मानकर कठोर दंड जिए जाने की व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन
एमपी के लिए ट्रेन सुविधा नहीं, यात्री रहे हलाकान
जिला मुख्यालय से मध्य प्रदेश के लिए ट्रेनों की सुविधा न होने के कारण मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाने वाले यात्री गुरुवार को सुबह से ही वाहनों की तलाश में इधर से उधर भटकते रहे। तमाम यात्रियों ने मजबूरन साधन न मिलने से इधर से उधर भटकते रहे। जिला मुख्यालय से मध्य प्रदेश के खजुराहो जाने के लिए ही ट्रेन का साधन है, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जनपदों में जाने के लिए यहां के यात्रियों को रोडवेज व प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन
टेंपो चालकों ने काटी चांदी
बसों की हड़ताल के चलते टेंपो चालकों की बल्ले बल्ले रही। बसें न चलने से टेंपो चालक भूसे की तरह भर कर चलते रहे, इतना ही नहीं टेंपो चालकों ने दो गुना किराया वसूला। बसें न चलने के कारण टेंपो चालकों ने तीस किलोमीटर तक का सफर यात्रियों का कराया, इसके आगे का सफर करने के लिए यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। बसों की हड़ताल से टेंपो चालकों ने जमकर चांदी काटी।