{"_id":"69ff77887f48b1a6030f479b","slug":"the-plant-has-become-a-showpiece-and-patients-are-getting-oxygen-from-cylinders-mahoba-news-c-225-1-mah1012-125068-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: शोपीस बना प्लांट, सिलिंडरों से मरीजों को मिल रही ऑक्सीजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: शोपीस बना प्लांट, सिलिंडरों से मरीजों को मिल रही ऑक्सीजन
Sat, 09 May 2026 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sat, 09 May 2026 11:36 PM IST
विज्ञापन
फोटो 09 एमएएचपी 03 परिचय-जिला अस्पताल में शोपीस बना ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
महोबा। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। लाखों की लागत से अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट शोपीस बना है। एक दिन पहले शुक्रवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में महिला मरीज को खाली ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने पर हंगामा हुआ था। इसके बाद भी प्लांट को चालू नहीं किया गया। सिलिंडरों के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है।
शहर के मोहल्ला ढलैतनपुरा निवासी उमा देवी की हालत शुक्रवार की सुबह बिगड़ गई थी। बेचैनी होने की शिकायत पर परिजन जिला अस्पताल ले गए थे। जहां सांस लेने में दिक्कत होने पर महिला मरीज को ऑक्सीजन लगाई गई थी लेकिन सिलिंडर खाली होने के चलते बेचैनी और बढ़ गई थी। इतना ही नहीं ईसीजी मशीन भी खराब थी। शनिवार को जिला अस्पताल में ऑक्सीजन व्यवस्था को लेकर पड़ताल की गई। पता चला कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बना हुआ है जहां से सभी वार्डों में रखे बेड तक ऑक्सीजन के लिए पाइपलाइन लगी हुई है। हालांकि अधिकांश समय प्लांट बंद रहता है। मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए सिलिंडर व्यवस्था रखी गई है और इसका प्रयोग अधिक किया जाता है।
शनिवार को स्टॉक में 30 बड़े और 40 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर मौजूद मिले। इमरजेंसी वार्ड में कबरई क्षेत्र के परसाहा गांव की रहने वाली राजाबाई भर्ती मिली जिन्हें सिलिंडर के जरिए ऑक्सीजन दी जा रही थी। वह रात करीब 11.50 बजे भर्ती हुई थी। हालांकि बाद में उन्हें रेफर कर दिया गया। सीएमएस डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि खाली सिलिंडर को लगा देने का मामला मानवीय भूल है।
विज्ञापन
अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता पर्याप्त है। ऑक्सीजन प्लांट संचालित है। जरूरत न होने पर उसे नहीं चलाया जाता है। इस मौसम में अनावश्यक रूप से प्लांट को चलाने पर मशीनों के गर्म होकर फुंकने का डर बना रहता है। ठंडी के मौसम में सांस के रोगी बड़ी संख्या में आते हैं। प्लांट का प्रयोग तब अधिक होता है। इस मौसम में सिलिंडरों से काम चल जाता है।
विज्ञापन
शहर के मोहल्ला ढलैतनपुरा निवासी उमा देवी की हालत शुक्रवार की सुबह बिगड़ गई थी। बेचैनी होने की शिकायत पर परिजन जिला अस्पताल ले गए थे। जहां सांस लेने में दिक्कत होने पर महिला मरीज को ऑक्सीजन लगाई गई थी लेकिन सिलिंडर खाली होने के चलते बेचैनी और बढ़ गई थी। इतना ही नहीं ईसीजी मशीन भी खराब थी। शनिवार को जिला अस्पताल में ऑक्सीजन व्यवस्था को लेकर पड़ताल की गई। पता चला कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बना हुआ है जहां से सभी वार्डों में रखे बेड तक ऑक्सीजन के लिए पाइपलाइन लगी हुई है। हालांकि अधिकांश समय प्लांट बंद रहता है। मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए सिलिंडर व्यवस्था रखी गई है और इसका प्रयोग अधिक किया जाता है।
विज्ञापन
शनिवार को स्टॉक में 30 बड़े और 40 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर मौजूद मिले। इमरजेंसी वार्ड में कबरई क्षेत्र के परसाहा गांव की रहने वाली राजाबाई भर्ती मिली जिन्हें सिलिंडर के जरिए ऑक्सीजन दी जा रही थी। वह रात करीब 11.50 बजे भर्ती हुई थी। हालांकि बाद में उन्हें रेफर कर दिया गया। सीएमएस डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि खाली सिलिंडर को लगा देने का मामला मानवीय भूल है।
विज्ञापन
अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता पर्याप्त है। ऑक्सीजन प्लांट संचालित है। जरूरत न होने पर उसे नहीं चलाया जाता है। इस मौसम में अनावश्यक रूप से प्लांट को चलाने पर मशीनों के गर्म होकर फुंकने का डर बना रहता है। ठंडी के मौसम में सांस के रोगी बड़ी संख्या में आते हैं। प्लांट का प्रयोग तब अधिक होता है। इस मौसम में सिलिंडरों से काम चल जाता है।

फोटो 09 एमएएचपी 03 परिचय-जिला अस्पताल में शोपीस बना ऑक्सीजन प्लांट। संवाद