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Mahoba News: मिनी कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत देख झूम उठे दर्शक
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखारी (महोबा)। बुंदेलखंड के मिनी कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध झीलों का शहर चरखारी गुरुवार की रात उत्तर व मध्य भारत की लोककला संस्कृति का गवाह बना। मौका का गोवर्धन्नाथजू मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत निकाली जा रही बुंदेलखंड सांस्कृतिक यात्रा में शामिल विभिन्न प्रांतों के कलाकारों ने अपने-अपने राज्यों की लोककला प्रस्तुतियां देकर गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को और गौरवांवित किया।
उत्तर-मध्य क्षेत्र के सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के तत्वावधान में एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत निकाली जा रही बुंदेलखंड सांस्कृतिक यात्रा चरखारी मेला मंच पहुंची। जिसमें उत्तराखंड, बुंदेलखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि के लोक कलाकार शामिल रहे। उत्तर मध्य क्षेत्र के सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा के निर्देश पर 21 से 26 नवंबर तक यात्रा बुंदेलखंड दौरे पर है। इसका शुभारंभ पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त ने किया। जितेंद्र, अमन, राहुल व पवन ने बुंदेली वीरगाथा आल्हा गायन की प्रस्तुति दी।
उत्तराखंड का प्रमुख लोकनृत्य छपेली और चाचरी की प्रस्तुतियों से कलाकारों ने समा बांध दिया। ब्रज की होली कार्यक्रम दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। फूलों की होली ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। मेला मंच पर उत्तर व मध्य भारत के 50 कलाकारों की प्रस्तुति हुईं। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मंजू कुशवाहा, चरखारी विधायक प्रतिनिधि उदित राजपूत, पूर्व पालिकाध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान, रविंद्र सिंह चौहान, विजय सक्सेना, सभासद सुरेंद्र सिंह परमार, पीयूष खरे, मुस्तफा खान, गुन्नी घोष आदि मौजूद रहे।
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राजस्थान का तेरहताली नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र
महोबा। मेला मंच पर राजस्थान की कामड़ जाति की महिलाओं की ओर से किए जाने वाले तेरहताली नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान महिला कलाकारों ने 13 मंजीरों को बांधकर तेरहताली नृत्य प्रस्तुत किया गया। जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया गया।
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प्रस्तुतियों में दिखी मप्र की लोककलाओं की छाप
महोबा। बुंदेलखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का मौका हो और मप्र के कलाकार मौजूद न हो ऐसा तो कभी नहीं हो सकता। मप्र के लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध लोककला गौड़, धीवर, कहरवा, जोगी नृत्य प्रस्तुति भी खासी सराही गई। लाल सिंह मरकाम, दरबारी सिंह, मनियाबाई, सियावत ने अपनी प्रस्तुति से बताया कि यह लोक कलाएं मप्र की सांस्कृतिक विरासत है।
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चरखारी (महोबा)। बुंदेलखंड के मिनी कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध झीलों का शहर चरखारी गुरुवार की रात उत्तर व मध्य भारत की लोककला संस्कृति का गवाह बना। मौका का गोवर्धन्नाथजू मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत निकाली जा रही बुंदेलखंड सांस्कृतिक यात्रा में शामिल विभिन्न प्रांतों के कलाकारों ने अपने-अपने राज्यों की लोककला प्रस्तुतियां देकर गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को और गौरवांवित किया।
उत्तर-मध्य क्षेत्र के सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के तत्वावधान में एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत निकाली जा रही बुंदेलखंड सांस्कृतिक यात्रा चरखारी मेला मंच पहुंची। जिसमें उत्तराखंड, बुंदेलखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि के लोक कलाकार शामिल रहे। उत्तर मध्य क्षेत्र के सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा के निर्देश पर 21 से 26 नवंबर तक यात्रा बुंदेलखंड दौरे पर है। इसका शुभारंभ पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त ने किया। जितेंद्र, अमन, राहुल व पवन ने बुंदेली वीरगाथा आल्हा गायन की प्रस्तुति दी।
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उत्तराखंड का प्रमुख लोकनृत्य छपेली और चाचरी की प्रस्तुतियों से कलाकारों ने समा बांध दिया। ब्रज की होली कार्यक्रम दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। फूलों की होली ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। मेला मंच पर उत्तर व मध्य भारत के 50 कलाकारों की प्रस्तुति हुईं। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मंजू कुशवाहा, चरखारी विधायक प्रतिनिधि उदित राजपूत, पूर्व पालिकाध्यक्ष अरविंद सिंह चौहान, रविंद्र सिंह चौहान, विजय सक्सेना, सभासद सुरेंद्र सिंह परमार, पीयूष खरे, मुस्तफा खान, गुन्नी घोष आदि मौजूद रहे।
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राजस्थान का तेरहताली नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र
महोबा। मेला मंच पर राजस्थान की कामड़ जाति की महिलाओं की ओर से किए जाने वाले तेरहताली नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान महिला कलाकारों ने 13 मंजीरों को बांधकर तेरहताली नृत्य प्रस्तुत किया गया। जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया गया।
प्रस्तुतियों में दिखी मप्र की लोककलाओं की छाप
महोबा। बुंदेलखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का मौका हो और मप्र के कलाकार मौजूद न हो ऐसा तो कभी नहीं हो सकता। मप्र के लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध लोककला गौड़, धीवर, कहरवा, जोगी नृत्य प्रस्तुति भी खासी सराही गई। लाल सिंह मरकाम, दरबारी सिंह, मनियाबाई, सियावत ने अपनी प्रस्तुति से बताया कि यह लोक कलाएं मप्र की सांस्कृतिक विरासत है।