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एसआईआर: शहर छोड़ गांव में ही जुड़े रहना चाहते हैं मतदाता

Tue, 02 Dec 2025 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Tue, 02 Dec 2025 12:17 AM IST
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SIR: Voters want to leave the city and stay connected in the village
महोबा। मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण कार्य की तारीख बढ़ने से एक ओर जहां बीएलओ समेत इस कार्य में लगे कर्मचारियों ने राहत महसूस की है, वहीं गांव छोड़कर शहर में रहने वाले मतदाता अपना नाम गांव की मतदाता सूची में ही बना रहने का मन बनाए हैं। यही वजह है कि वह शहरी क्षेत्र में भी नाम जुड़ा होने पर यहां से गणना प्रपत्र नहीं भर रहे हैं। साथ ही नवविवाहिताओं के गणना फार्म बीएलओ के लिए परेशानी बने हैं। उनका डाटा खोजने में दिक्कत हो रही है।
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जिले के कई गांव के लोग रोजगार की तलाश और बच्चों की पढ़ाई आदि के लिए शहर में रहने लगे हैं। लंबे समय से शहर में रह रहे मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हैं जबकि उनके नाम गांव की मतदाता सूची में भी अंकित हैं। एसआईआर में अब कोई भी मतदाता एक स्थान से ही वोटर रह सकता है। ऐसे में मतदाता शहर में नाम बरकरार रखें या गांव में, इसको लेकर माथापच्ची कर रहे हैं। मतदाता राजेंद्र, दीपक, देवीदीन आदि ने बताया कि उन्हें आशंका है कि यदि गांव की मतदाता सूची से नाम कट गया तो भविष्य में गांव की जमीन, मकान आदि को लेकर परेशानी होगी। इसलिए वे गांव की मतदाता सूची में जुड़े रहना चाहते हैं।
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शहर मां कौनौं पूछते नेहांय, गांव मां आव-भगत रहत ही
महोबा। आगामी दिनों में पंचायत चुनाव भी होने वाले हैं। इसको लेकर भी लोग गांव की मतदाता सूची में अपना नाम जुड़ा रखना चाहते हैं। खरेला के एक बूथ में महोबा से अपना गणना फार्म जमा करने पहुंचे लालदिमान की बात सुनकर बीएलओ और अन्य कर्मचारी हंसने लगे। लालदिमान ने कहा कि वह बेटे के साथ महोबा में रहते हैं। वहीं पर मतदाता सूची में नाम जुड़ा है लेकिन वे महोबा से अपना नाम कटवा रहे हैं। वे केवल गांव में ही अपना गणना फार्म भर रहे हैं। उनका कहना है कि शहर मां कौनौं पूछते नेहांय, गांव मां आव-भगत रहत ही। यानि कि शहर में चुनाव के समय कोई पूछने तक नहीं आता जबकि गांव में प्रधानी के चुनाव में काफी स्वागत-सत्कार होता है।
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1991 में गांव छोड़ा अब नहीं मिल रहा रिकाॅर्ड
महोबा। चरखारी क्षेत्र के गुढ़ा गांव निवासी रामकुमार बताते हैं कि उनके पिता रामस्वरूप उपाध्याय रोजगार की तलाश में वर्ष 1991 में गांव छोड़कर अन्य शहर चले गए थे। वर्ष 1995 में हुए चुनाव के दौरान पिता रामस्वरूप ने मतदान किया था। इसके बाद गांव से नाता टूट गया। कई शहराें में रहने के बाद वर्ष 2010 से मध्यप्रदेश के छतरपुर में घर बनाकर रहने लगे और वहां पर ही मतदाता सूची में नाम जुड़ गया। अब वर्ष 2003 का डाटा मांगा जा रहा है तो उस सूची में पिता का कोई रिकाॅर्ड गांव में नहीं मिल रहा है। वर्ष 1995 की मतदाता सूची के लिए उन्होंने जिला निर्वाचन कार्यालय में संपर्क किया और हेल्पलाइन नंबर पर कॉल भी की लेकिन हेल्पलाइन के कर्मचारियों ने लखनऊ या तत्कालीन जिले हमीरपुर के निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करने की बात कही। इससे वह परेशान हैं।
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नवविवाहिताओं को खोजने में हो रही परेशानी
महोबा। जिले में 65 फीसदी से अधिक कार्य अब तक बीएलओ पूरा कर चुके हैं। अब बचे हुए गणना फार्म परेशानी वाले हैं। सबसे अधिक परेशानी नवविवाहिताओं के डाटा को लेकर हैं। कई बीएलओ के पास ऐसी युवतियों के नाम हैं, जो शादी से पहले मायके की मतदाता सूची में जुड़ी थीं और शादी के बाद ससुराल तो पहुंच गईं लेकिन अभी तक उनका नाम ससुराल की सूची में नहीं जुड़ा है। बेटी की शादी हो जाने के कारण मायके के लोग ऐसे फार्म भरने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बीएलओ राजेंद्र बताते हैं कि कई युवतियों के फार्म उनके पास रखे हैं, जब संबंधित मकान नंबर पर संपर्क करते हैं तो उन घराें में रहने वाले लोग पहचानने से इनकार कर दे रहे हैं। इससे कार्य प्रभावित हो रहा है।

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परिवार का कोई भी व्यक्ति जमा कर सकता है फार्म
कुलपहाड़। एसडीएम डॉ. प्रदीप कुमार ने सोमवार को सतियनपुरा स्थित एसआईआर शिविर का निरीक्षण किया। यहां पर उन्होंने मतदाताओं से कहा कि यदि कोई मतदाता वर्तमान में यहां पर मौजूद नहीं है तो उनके परिजन भी फार्म भरकर जमा कर सकते हैं। यदि कोई मतदाता मृत हो गया है या उसकी शादी अन्य जगह हो गई है या किसी अन्य कारण से मतदाता का कोई पता नहीं चल रहा है तो उनके परिजन उसका फार्म माता-पिता के नाम और कारण का स्पष्ट रूप से उल्लेख करके अपने बीएलओ के पास जमा कर दें। बाद में उसका निस्तारण किया जाएगा। शिविर में नगर पंचायत अध्यक्ष वैभव अरजरिया, अधिशासी अधिकारी प्रवेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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