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शहीद भगत सिंह का बुंदेलखंड से था गहरा नाता
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अमर शहीद को श्रद्धांजलि देते लोग।
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। शरीद भगत सिंह का बुंदेलखंड से गहरा नाता था। यह बात गोरखगिरि में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कही।
उन्होंने बताया कि भगत सिंह झांसी के पास सातार गांव में भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी आते थे। उन्होंने बबीना के जंगल में सदाशिव मलकापुरकर के साथ बम बनाना सीखा। भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान भारत सभा का विलय भी चंद्रशेखर आजाद के संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से कर दिया और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक नया संगठन बनाया। मात्र 26 वर्ष की आयु में भगत सिंह ने 1931 में फांसी के फंदे को चूमकर देश के लिए खुद को बलिदान कर दिया था।
श्रद्धांजलि सभा में डा. देवेंद्र पुरवार, श्रवण हरदया, सिद्ध गोपाल सेन, ऋषि सिंह, संतोष पटैरिया, मुन्ना जैन, शैलेष, गया प्रसाद, सुरेश बुंदेलखंडी, प्रवीण चौरसिया, अवधेश गुप्ता, देवकी नंदन आर्या, अनूप द्विवेदी व राम किशन सेन आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शहीदों के बलिदान से आज हम स्वतंत्र हैं
चरखारी (महोबा)। नेहरू युवा केंद्र द्वारा शहीद दिवस पर कन्या प्राथमिक विद्यालय रूपनगर चरखारी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जुगल किशोर द्विवेदी ने कहा कि क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव शहीद हुए तीनों अमर क्रांतिकारियों की शहीदी दिवस के दिन आयु बेहद कम थी लेकिन उन्होंने देश के लिए बहुत बड़ा काम किया। आज हम उन्हीं की वजह से स्वतंत्र भारत में स्वाभिमान के साथ खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अब हमारा फर्ज है कि हम समाज में फैली कुरीतियां, भ्रष्टाचार और अन्य समस्याओं के लिए लड़ें और अपने राष्ट्र गौरव को बढ़ाएं, इसी के साथ शहीदों की याद में दो मिनट का मौन धारण किया गया एवं कार्यक्रम का समापन किया गया।
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इस मौके पर जिला युवा अधिकारी सागर वाधवानी, शुभम कुमार, डॉ. रुचि जायसवाल , डॉ. सुमन सिंह, मोनम गुरुदेव आदि रहे। (संवाद)
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उन्होंने बताया कि भगत सिंह झांसी के पास सातार गांव में भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी आते थे। उन्होंने बबीना के जंगल में सदाशिव मलकापुरकर के साथ बम बनाना सीखा। भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान भारत सभा का विलय भी चंद्रशेखर आजाद के संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से कर दिया और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक नया संगठन बनाया। मात्र 26 वर्ष की आयु में भगत सिंह ने 1931 में फांसी के फंदे को चूमकर देश के लिए खुद को बलिदान कर दिया था।
श्रद्धांजलि सभा में डा. देवेंद्र पुरवार, श्रवण हरदया, सिद्ध गोपाल सेन, ऋषि सिंह, संतोष पटैरिया, मुन्ना जैन, शैलेष, गया प्रसाद, सुरेश बुंदेलखंडी, प्रवीण चौरसिया, अवधेश गुप्ता, देवकी नंदन आर्या, अनूप द्विवेदी व राम किशन सेन आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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शहीदों के बलिदान से आज हम स्वतंत्र हैं
चरखारी (महोबा)। नेहरू युवा केंद्र द्वारा शहीद दिवस पर कन्या प्राथमिक विद्यालय रूपनगर चरखारी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जुगल किशोर द्विवेदी ने कहा कि क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव शहीद हुए तीनों अमर क्रांतिकारियों की शहीदी दिवस के दिन आयु बेहद कम थी लेकिन उन्होंने देश के लिए बहुत बड़ा काम किया। आज हम उन्हीं की वजह से स्वतंत्र भारत में स्वाभिमान के साथ खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अब हमारा फर्ज है कि हम समाज में फैली कुरीतियां, भ्रष्टाचार और अन्य समस्याओं के लिए लड़ें और अपने राष्ट्र गौरव को बढ़ाएं, इसी के साथ शहीदों की याद में दो मिनट का मौन धारण किया गया एवं कार्यक्रम का समापन किया गया।
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इस मौके पर जिला युवा अधिकारी सागर वाधवानी, शुभम कुमार, डॉ. रुचि जायसवाल , डॉ. सुमन सिंह, मोनम गुरुदेव आदि रहे। (संवाद)