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Mahoba News: पान में हल्की सिंचाई व बरेजों में कंडे का धुआं कर पाले से बचाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। लाजवाब स्वाद और करारेपन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध महोबा के देशावरी पान पर इस समय संकट छा गया है। 10 दिन से कड़ाके की ठंड व कोहरे के बीच धूप न निकलने से पान में पाला लगने की आशंका है। पान वैज्ञानिक ने पान को पाले से बचाने के लिए बरेजों में हल्की सिंचाई और कंडे का धुआं करने की सलाह दी है।
एक दशक पहले तक महोबा में पान की खेती 500 एकड़ क्षेत्रफल में होती थी। दैवीय आपदाओं के प्रकोप व सुविधाएं न मिलने से पान की खेती का दायरा लगातार घटता चला गया। वर्तमान में करीब 25 एकड़ में ही पान की खेती हो रही है। औषधीय गुणों से भरपूर महोबा का देशावरी पान दिल्ली, आगरा, मथुरा, मुरादाबाद, मध्यप्रदेश के अलावा खाड़ी देशों में जाता था, लेकिन प्रकृति की मार के चलते उत्पादन कम होने और निर्यात कम होने से यह देश के विभिन्न प्रांतों तक ही सिमट गया है। इस समय पान पर पाले की मार है। इससे किसान परेशान है। पान के पत्ते पीले पड़ने से किसानों को नुकसान होने की आशंका है।
एनबीआरआई के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया बताते हैं कि अभी पान बरेजों में कम नुकसान है। यदि मौसम नहीं खुलता तो पान खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने कोहरे से पान को बचाने के लिए घड़े में कंडे भरकर बरेजों में हल्का धुआं करने और पान की फसल में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। बताया कि पान बरेजों के ऊपर हल्की घास लगा दें। जिससे पान की फसल पर ज्यादा असर न हो सके। शीतलहर रोकने को बरेजे के अंदर चारों तरफ पुरानी साड़ियां लगाएं। जिससे सीधे तेज हवा न लग सके और पान की फसल बच सके।
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महोबा। लाजवाब स्वाद और करारेपन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध महोबा के देशावरी पान पर इस समय संकट छा गया है। 10 दिन से कड़ाके की ठंड व कोहरे के बीच धूप न निकलने से पान में पाला लगने की आशंका है। पान वैज्ञानिक ने पान को पाले से बचाने के लिए बरेजों में हल्की सिंचाई और कंडे का धुआं करने की सलाह दी है।
एक दशक पहले तक महोबा में पान की खेती 500 एकड़ क्षेत्रफल में होती थी। दैवीय आपदाओं के प्रकोप व सुविधाएं न मिलने से पान की खेती का दायरा लगातार घटता चला गया। वर्तमान में करीब 25 एकड़ में ही पान की खेती हो रही है। औषधीय गुणों से भरपूर महोबा का देशावरी पान दिल्ली, आगरा, मथुरा, मुरादाबाद, मध्यप्रदेश के अलावा खाड़ी देशों में जाता था, लेकिन प्रकृति की मार के चलते उत्पादन कम होने और निर्यात कम होने से यह देश के विभिन्न प्रांतों तक ही सिमट गया है। इस समय पान पर पाले की मार है। इससे किसान परेशान है। पान के पत्ते पीले पड़ने से किसानों को नुकसान होने की आशंका है।
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एनबीआरआई के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामसेवक चौरसिया बताते हैं कि अभी पान बरेजों में कम नुकसान है। यदि मौसम नहीं खुलता तो पान खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने कोहरे से पान को बचाने के लिए घड़े में कंडे भरकर बरेजों में हल्का धुआं करने और पान की फसल में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। बताया कि पान बरेजों के ऊपर हल्की घास लगा दें। जिससे पान की फसल पर ज्यादा असर न हो सके। शीतलहर रोकने को बरेजे के अंदर चारों तरफ पुरानी साड़ियां लगाएं। जिससे सीधे तेज हवा न लग सके और पान की फसल बच सके।
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