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सीडीओ के गांव में किसानों की हालत दयनीय

Sat, 11 Apr 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा Updated Sat, 11 Apr 2015 12:30 AM IST
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Poor condition of the farmers in the village of CDO
मुख्य विकास अधिकारी शिवनरायण द्वारा गोद लिए गए लोहिया ग्राम बसौठ की फसल बर्बादी के बाद आज तक खबर नहीं ली है। हालात यह है कि जब मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गोद लिए गए गांव का हाल यह तो अन्य गांवों की स्थित का अंदाजा लगाया जा सकता है। क्या हाल होगा यह अंदाजा लगाया जा सकता है।  
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सीडीओ द्वारा लोहिया गांव बसौठ को गोद लिए जाने के बाद ग्रामीणों को गांव के विकास की उम्मीद बढ़ी थी। लेकिन अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों को दाने-दाने  को मोहताज कर दिया। इस कठिन समय में भी मुख्य विकास अधिकारी शिवनरायण को गोद लिए गांव बसौठ को देखने की फुर्सत नहीं मिल रही है। सीडीओ द्वारा दिसंबर माह में गांव को गोद लेने के बाद दस जनवरी को जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह की मौजूदगी में बैठक की गई थी। जहां गांव में 47 बच्चे कुपोषित पाए गए थे। जहां 20 फरवरी को गांव में हुई बैठक में सीडीओ ने महज आंगनबाड़ी केंद्र के क्रियाकलापाें  को देखा था। इसके बाद दैवीय आपदा के प्रकोप से प्रभावित कृषकाें और मजदूरों की बदहाली देखने नहीं पहुंचे। जबकि प्रतिमाह गांव का भ्रमण कर उत्थान की योजना बनाई जानी चाहिए। दैवीय आपदा की मार से आहत किसान प्रशासन और प्रतिनिधियों की उपेक्षा दुखी है। जहां कई परिवारों को दो वक्त का भोजन भी नहीं मिल पा रहा है। लघु कृषक, श्रमिक, बटाई और बलकट खेती करने वाले  किसानों की दशा दयनीय है। इस वर्ष की लागत और मेहनत बर्बाद होने से किसानों के चेहरे में मायूसी झलकर रही है। गांव में आने वाले किसी भी अधिकारी को देख ग्रामीण चेक पाने की लालसा में कर्मचारी को घेर लेते है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम के पहुंचते ही अधिकारियों की टीम समझकर किसानों ने घेर लिया।
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चाराें तरफ दिख रहीं सिर्फ बर्बाद फसलें
बसौठ गांव में 1,225.685 हेक्टेयर भूमि में खेती होती है। 70 फीसदी असिंचित भूभाग में बोई गई गेहूं, चना, मटर और मसूर की खेती सौ फीसदी तबाह हो गई है। कृषक हरछठी काछी ने बताया कि बारह बीघा खेत में मटर बोई थी। लेकिन डेढ़ क्विंटल ही उपज मिली। जिससे मेहनत तक वसूल नहीं हुई। कृषक तुलाराम साहू ने बताया कि डेढ़ बीघा में गेहूं की बुवाई की। प्रतिवर्ष जहां पांच क्विंटल से अधिक फसल निकलती थी, इस वर्ष महज एक क्विंटल ही पैदा हुआ है। परिवार का गुजारा चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ेगी।
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ठंडे पड़ गए घरों के चूल्हे
बसौठ के प्राथमिक विद्यालय के बगल में रहने वाले भगवानदास साहू के पिता के नाम ढाई बीघा जमीन है। दो भाई, एक बहन और मां के साथ खेती और मजदूरी कर गुजारा करता है। इस वक्त ढाई बीघे में महज 80 किलोग्राम गेहूं पैदा हुआ। जिससे चूल्हे ठंडे पड़ जाने से भूखाें मरने की नौबत आ गई है। कृषक मुन्ना ने बताया कि पांच बीघा में चने की फसल बोई थी। एक क्विंटल ही चने की पैदावार हुई। दो छोटे-छोटे बच्चों और परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी है। कृषक गोरेलाल और वासुदेव ने बताया कि खेती से ही बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलता रहा है। इस वर्ष फसल की बर्बादी के कारण कक्षा 11 में पढ़ने वाली बेटी पूजा की पढ़ाई छूट सकती है।

बीमा क्लेम का पता नहीं
कृषक ब्रजनंदन, रमेश, बारातीलाल और जमुनादास ने बताया कि क्रेडिट कार्ड बनाते समय बैंक 8.7 प्रतिशत प्रीमियम किस्त बैंक फसल बीमा के लिए कटौती करता है। लेकिन पांच वर्ष से किसी भी कृषक को बीमा की धनराशि नहीं मिली। किसानों ने बताया कि इस वर्ष तबाह हुई फसल का अनुदान भी बंटना शुरू नहीं हुआ। अब लोहिया गांव का दर्जा मिलने के बाद भी 15 दिन से कोई अधिकारी कर्मचारी गांव नहीं आ रहा। लेखपाल छोटेलाल कुशवाहा ने बताया कि किसानों की सूची तैयार की जा रही है। काम अधिक होने के कारण समय लग रहा है। निर्धारित मुआवजे की चेक  जल्दी ही किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

पलायन के लिए मजबूर हो रहे किसान
बसौठ के किसानाें के हालात अन्य गांवाें की बदहाली की अपेक्षा बदले नहीं हैं। मुख्य विकास अधिकारी के गोद लेने के बाद ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन मौके पर बर्बादी देखने न पहुंचने से किसानों में खासा मलाल है। यहां बर्बादी से सर्वाधिक बटाईदार और बलकट किसानों को नुकसान हुआ है। गांव के कई परिवार मजदूरी करने के लिए शहर को पलायन कर रहे है।

आबादी- 2,187
किसान- 407
कृषि क्षेत्रफल - 1225.685
फसल का नुकसान- सौ फीसदी
बर्बाद हुईं फसलें- दलहन, तिलहन और गेहूं।

कोट
विधानसभा चरखारी के उपचुनाव में कार्मिक अधिकारी का दायित्व होने के कारण चुनाव की व्यस्तता और तैयारियाें में जुटने की वजह से गोद लिए गए बसौठ गांव नहीं जा सका हूं। चुनाव के बाद गांव में बर्बाद हुई फसलाें का जायजा लेने के बाद किसानों का भी हाल चाल लिया जाएगा।
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