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जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए शुरु हुआ जोड़-तोड़ का खेल

Tue, 04 May 2021 11:13 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 11:13 PM IST
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महोबा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य की 14 सीटों में से छह पर निर्दलीय जीते हैं। सपा को पांच और भाजपा को तीन सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहा। इसी के साथ अब जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। इसी तरह ब्लॉक प्रमुख बनने के लिए बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में लाने का गुणा भाग लगने लगा है।
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चुनावी नतीजे आने के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की दौड़ तेज हो गई है। वर्ष 2015 में सपा समर्थित ममता यादव ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया था, लेकिन वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्तारूढ़ होने पर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। इससे उनकी सीट बरकरार रही। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन पार्टी के महज तीन प्रत्याशी ही जीत दर्ज करने में सफल रहे। ऐसे में अब अध्यक्ष बनने को लेकर जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है।
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पिछले जिला पंचायत चुनाव में सपा को आठ सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को एक और बसपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं तीन निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा को तीन और सपा को पांच सीटें मिलीं, जबकि बसपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी। जिला पंचायत सदस्य में निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने और सीटों पर अधिकांश महिलाओं के काबिज होने से निर्दलीय प्रत्याशी के ही अध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे हैं।
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लगातार पांचवीं बार बनेगी महिला अध्यक्ष
महोबा। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर लगातार चौथी बार महिला उम्मीदवार का कब्जा रहेगा। वर्ष 1995 में महोबा जिला बनने के बाद सबसे पहले सूपा सीट से विजयी हुए लाखन सिंह राजपूत अध्यक्ष बने। इसके बाद सीट अनुसूचित जाति के खाते में चली जाने से वर्ष 2000 में रामकुंवर नरवरिया अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2005 में पसवारा सीट से जीतकर पहुंची ज्ञानदेवी, वर्ष 2011 में खन्ना सीट से जीतकर पहुंची अंशु शिवहरे व वर्ष 2016 में मुढ़ारी सीट से जीतकर पहुंची ममता यादव अध्यक्ष बनी। अब पांचवीं बार अनुसूचित जाति महिला अध्यक्ष बनेगी।
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