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अन्नदाता हुए रोटी के मोहताज

अमर उजाला ब्यूरो महोबा Updated Wed, 01 Apr 2015 11:46 PM IST
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ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से बर्बाद हुई फसलाें ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालत यह है कि दूसरों को अन्न देने वाले किसान  खुद ही दो जून की रोटी के लिए मोहताज हो गए है। हालत यह है कि कोई चावल खाकर काम चला रहा है तो कुछ उधार लेकर बच्चों को पेट पाल रहे है। वहीं कभी फसलों को मजदूरों से कटवाने वाले किसान खुद ही फसल काट रहे है। वहीं फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जहां बच्चे स्कूल जाने की अपेक्षा रोजीरोटी की जुगत में लग गए है। वहीं फसल बर्बाद होने से किसान महानगरों की तरफ पलायन कर रहे है।
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 शनिवार को अमर उजाला टीम ने फसल बर्बादी का दंश झेल रहे गांवों का दौरा करने पर कैसी हकीकत सामने आई, पढ़िए किसानों की दुर्दशा दर्शाती श्रीनगर संवाददाता केके सोनी की रिपोर्ट-

ग्राम बिलरही में टीम के पहुंचते ही ग्रामीणों ने टीम को अधिकारी समझ मुआवजे की आस लगाकर पास आ गए। ग्रामीणों ने बताया कि सब कुछ बर्बाद हो गया। जहां ग्रामीणों ने घर में अन्न का दाना न होने की बात कही। वहीं एक ग्रामीण ने एक पहर भोजन करने की बात कही। जहां लोग गेंहू न होने स चावल खाकर काम चला रहे है। वहीं आगे बैठे किसान रामकृपाल टीम को देखकर पास आया और सब कुछ बर्बाद होने की बात कही। रामकृपाल ने अपनी 10 बीघे जमीन में पांच में मटर और पांच में जव की फसल बोई थी। जो कि भीषण बारिश और ओलावृष्टि में खराब हो गई है। रामकृपाल ने बताया कि बच्चों के लिए ग्राम प्रधान कल्लू यादव से 20 किलो आटा उधार लिया है। जो कि मजदूरी करके  वापस करूंगा। गांव की चार हजार की आबादी में लगभग 200 लोग किसानी करते है। फसल बर्बाद होने से अब तक जिले में 9 लोगों की मौत हो चुकी है।

पेट भरने के लिए कर रहे पलायन
बारिश के बाद तबाह हुए किसान अब पेट भरने के लिए कोई गांव में तो कोई महानगरों में जाकर मजदूरी कर रहे हैं। हरदीन विश्वकर्मा, जंगी कुशवाहा, नृपत लुहार, रामकुमार, आशाराम अहिरवार, देवीदीन कुशवाहा, श्रीपत, रामजीवन सहित एक सैकड़ा परिवार पलायन कर गए हैं। गांव के ही रामकृपाल के बेटे संदीप ने राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर में कक्षा नौ की परीक्षा दी है। उत्तीर्ण होने के बाद एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो रहा है। लेकिन फीस का इंतजाम न होने से बेटे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

आर्थिक सहायता दे प्रशासन
जिले में फसल से बर्बाद किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। लेकिन शासन प्रशासन आत्महत्या और सदमे से मौत न मानकर बीमारी बता रहा है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बल्कि प्रशासन को मृतक के किसानाें के घर जाकर उन्हें आर्थिक सहायता देनी चाहिए। जिससे गरीब मृतक किसानों के परिवारों को दो जून की रोटी नसीब हो सके।
- ब्रजगोपाल पटेल, किसान।

एक बार फिर लेना पड़ेगा कर्ज
ओलावृष्टि से फसलों के बर्बाद होने के बाद अब किसानों को एक बार फिर जुताई बुवाई के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। पहले ही कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के सामने कर्ज लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। पहले साल की बर्बाद फसल का अभी तक मुआवजा नहीं मिला और मार्च माह में फिर फसल बर्बाद हो गई है।
- कल्लू यादव, ग्राम प्रधान बिलरही।

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