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Mahoba News: हे भगवान किसी की न टूटे हड्डी, साल भर से नहीं हो रहा इलाज
Mon, 10 Jul 2023 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Mon, 10 Jul 2023 11:43 PM IST
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महोबा। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का भगवान ही मालिक है। एक साल तक तैनात रहे हड्डी रोग विशेषज्ञ ने एक भी दिन ड्यूटी नहीं की। कभी ईएल, कभी सीएल तो कभी मेडिकल अवकाश का आवेदन लगाकर साल भर का समय काट दिया। दो दिन पहले तबादला आदेश आते ही डॉक्टर को जिला अस्पताल से रिलीव कर दिया गया। मरीजों का कहना है कि भगवान किसी की हड्डी न टूटे। यदि हड्डी टूटती है तो जिला अस्पताल में इसका इलाज संभव नहीं है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। वर्ष 2022 में अगस्त माह में जिला अस्पताल में तैनात डॉ. अनुराग पुरवार का तबादला झांसी के लिए हो गया था। उनके स्थान पर डॉ. राजीव भदौरिया को झांसी से महोबा के लिए स्थानांंतरित किया गया था। तब डॉ. राजीव भदौरिया ने जिला अस्पताल महोबा में ज्वाइनिंग कर ली थी। लेकिन उन्होंने एक भी दिन ड्यूटी नहीं की। पूरे साल हड्डी रोग विभाग के कक्ष में ताला लटका रहा। डॉ. राजीव भदौरिया ने एक भी दिन मरीजों को नहीं देखा। यहां तक कि सड़क दुर्घटनाओं में हड्डी टूटने के आने वाले मरीजों को भी जिला अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ के दर्शन नहीं हो सके। हालात यह हैं कि हड्डी टूटने पर मरीजों को इलाज के लिए मप्र के छतरपुर जिले व झांसी में स्थित अस्पताल में जाना पड़ता है। जिससे उनका समय व रुपये दोनों बर्बाद होते हैं।
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केस-एक
महोबा। शहर के निकट स्थित सिजहरी गांव निवासी स्वतंत्र कुमार राजपूत की तीन दिन पहले पसली टूट गई थी। वह इलाज के लिए जिला अस्पताल आया तो उसे जानकारी मिली कि यहां तैनात डॉक्टर कभी अपने कक्ष में बैठते ही नहीं। उसने एक्स-रे कराया तो पसली की हड्डी टूटी निकली। उसे जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिल सका। जिससे उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताया कि अब वह झांसी में जाकर इलाज कराएगा।
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केस-दो
महोबा। नैपुरा पनवाड़ी निवासी श्रीकिशोर ने बताया कि हादसे में उसकी हड्डी टूट गई थी। तब वह इलाज के लिए जिला अस्पताल आया। ओपीडी के पूरे समय वह हड्डी रोग विशेष डॉ. राजीव भदौरिया के कक्ष के बाहर बैठा रहा लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बाद में मालूम चला कि वह यहां तैनात तो हैं लेकिन ड्यूटी पर नहीं आते। हड्डी रोग विशेषज्ञ झांसी में एक निजी अस्पताल में बैठते हैं।
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश भट्ट का कहना है कि पूर्व में कौन डॉक्टर यहां तैनात रहा और किसने ड्यूटी नहीं की इसके बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। डॉ. राजीव भदौरिया को दो दिन पहले रिलीव किया गया है। सीएमएस के अवकाश पर होने के चलते वह चार्ज पर हैं।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। वर्ष 2022 में अगस्त माह में जिला अस्पताल में तैनात डॉ. अनुराग पुरवार का तबादला झांसी के लिए हो गया था। उनके स्थान पर डॉ. राजीव भदौरिया को झांसी से महोबा के लिए स्थानांंतरित किया गया था। तब डॉ. राजीव भदौरिया ने जिला अस्पताल महोबा में ज्वाइनिंग कर ली थी। लेकिन उन्होंने एक भी दिन ड्यूटी नहीं की। पूरे साल हड्डी रोग विभाग के कक्ष में ताला लटका रहा। डॉ. राजीव भदौरिया ने एक भी दिन मरीजों को नहीं देखा। यहां तक कि सड़क दुर्घटनाओं में हड्डी टूटने के आने वाले मरीजों को भी जिला अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ के दर्शन नहीं हो सके। हालात यह हैं कि हड्डी टूटने पर मरीजों को इलाज के लिए मप्र के छतरपुर जिले व झांसी में स्थित अस्पताल में जाना पड़ता है। जिससे उनका समय व रुपये दोनों बर्बाद होते हैं।
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केस-एक
महोबा। शहर के निकट स्थित सिजहरी गांव निवासी स्वतंत्र कुमार राजपूत की तीन दिन पहले पसली टूट गई थी। वह इलाज के लिए जिला अस्पताल आया तो उसे जानकारी मिली कि यहां तैनात डॉक्टर कभी अपने कक्ष में बैठते ही नहीं। उसने एक्स-रे कराया तो पसली की हड्डी टूटी निकली। उसे जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिल सका। जिससे उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताया कि अब वह झांसी में जाकर इलाज कराएगा।
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केस-दो
महोबा। नैपुरा पनवाड़ी निवासी श्रीकिशोर ने बताया कि हादसे में उसकी हड्डी टूट गई थी। तब वह इलाज के लिए जिला अस्पताल आया। ओपीडी के पूरे समय वह हड्डी रोग विशेष डॉ. राजीव भदौरिया के कक्ष के बाहर बैठा रहा लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बाद में मालूम चला कि वह यहां तैनात तो हैं लेकिन ड्यूटी पर नहीं आते। हड्डी रोग विशेषज्ञ झांसी में एक निजी अस्पताल में बैठते हैं।
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश भट्ट का कहना है कि पूर्व में कौन डॉक्टर यहां तैनात रहा और किसने ड्यूटी नहीं की इसके बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। डॉ. राजीव भदौरिया को दो दिन पहले रिलीव किया गया है। सीएमएस के अवकाश पर होने के चलते वह चार्ज पर हैं।