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धूम-धाम से मना नागपंचमी का त्योहार
ब्यूरो/अमर उजाला,महोबा
Updated Wed, 19 Aug 2015 11:53 PM IST
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जिले में नागपंचमी का पर्व हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर में विभिन्न देवताओं की सुंदर झांकियां नगर के विभिन्न मार्गोें से निकाली गई। डीजे की धुन पर थिरकते हुए चल रहे युवकों का जोश देखते ही बन रहा था। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल शोभा यात्रा दौरान मौजूद रहा।
चौरसिया समाज सेवा समिति के तत्वावधान में नागपंचमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। समिति के संरक्षक लालता प्रसाद चौरसिया अध्यक्ष विनोद चौरसिया, रामेश्वर चौरसिया, शिव कुमार गोस्वामी और राजकुमार के नेतृत्व में पान मंडी परिसर से शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया। शोभायात्रा सुभाष चौकी, ऊदल चौक, आल्हा चौक, मेन मार्केट से होते हुए नागौरिया मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। शोभायात्रा के दौरान बैंड बाजों और रब्बी बाजों की धुन पर नवयुवक थिरकते हुए चल रहे थे। वहीं कुछ लोग करतब दिखा रहे थे। इस मौके पर स्कूली बच्चों द्वारा सजाई गईं भगवान राम सीता, भगवान शिव, नाग कन्या सहित अन्य देवी देवताओं की झांकियां आर्कषण का केंद्र रहीं। जिन्हें देखने के लिए लोग सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर इंतजार करते रहे। शोभायात्रा के बाद परंपरागत रूप में त्योहार मनाया गया।
नागपंचमी पर नाग पूजा का विशेष महत्व
नागपंचमी पर्व पर नागों का पूजन किया जाता है। नाग पंचमी में नाग दर्शन का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखकर सांपों को दूध व खीर खिलाई जाती है। नाग पंचमी को दीवार पर गेरू पोतकर पूजा का स्थान बनाया जाता है। फिर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवार पर घर जैसी आकृति बनाते है और उसमें अनेक नाग देवता बनाए जाते है। कुछ जगहों पर सोने, चांदी, कांठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पांच फन वाले नागदेव बनाकर पूजा की जाती है। सर्वप्रथम नागों की बामी में दूध चढ़ाया जाता है। फिर दीवार पर बनाए गए नाग देवता की दही, दूर्वा, कुश, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर मिष्ठान से उनका भोग लगाया जाता है।
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चौरसिया समाज सेवा समिति के तत्वावधान में नागपंचमी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। समिति के संरक्षक लालता प्रसाद चौरसिया अध्यक्ष विनोद चौरसिया, रामेश्वर चौरसिया, शिव कुमार गोस्वामी और राजकुमार के नेतृत्व में पान मंडी परिसर से शोभायात्रा का शुभारंभ किया गया। शोभायात्रा सुभाष चौकी, ऊदल चौक, आल्हा चौक, मेन मार्केट से होते हुए नागौरिया मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। शोभायात्रा के दौरान बैंड बाजों और रब्बी बाजों की धुन पर नवयुवक थिरकते हुए चल रहे थे। वहीं कुछ लोग करतब दिखा रहे थे। इस मौके पर स्कूली बच्चों द्वारा सजाई गईं भगवान राम सीता, भगवान शिव, नाग कन्या सहित अन्य देवी देवताओं की झांकियां आर्कषण का केंद्र रहीं। जिन्हें देखने के लिए लोग सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर इंतजार करते रहे। शोभायात्रा के बाद परंपरागत रूप में त्योहार मनाया गया।
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नागपंचमी पर नाग पूजा का विशेष महत्व
नागपंचमी पर्व पर नागों का पूजन किया जाता है। नाग पंचमी में नाग दर्शन का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखकर सांपों को दूध व खीर खिलाई जाती है। नाग पंचमी को दीवार पर गेरू पोतकर पूजा का स्थान बनाया जाता है। फिर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवार पर घर जैसी आकृति बनाते है और उसमें अनेक नाग देवता बनाए जाते है। कुछ जगहों पर सोने, चांदी, कांठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पांच फन वाले नागदेव बनाकर पूजा की जाती है। सर्वप्रथम नागों की बामी में दूध चढ़ाया जाता है। फिर दीवार पर बनाए गए नाग देवता की दही, दूर्वा, कुश, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर मिष्ठान से उनका भोग लगाया जाता है।
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