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कोरोना से जंग जीत चुके चैंपियंस से न करें भेदभाव
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महोबा। जिले में कोरोना संक्रमितों के मामलों में तेजी आई है।कोरोना संक्रमितों की जांच व सैंपल जुटाने में डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात जुटे हुए हैं। इस दौरान वह भी संक्रमित हुए। लेकिन चिकित्सकों के इसी जज्बे के चलते जिले में 80 फीसदी मरीज कोरोना से जंग जीतकर अपने घर वापस लौट पाए हैं। ऐसे में सभी की जिम्मेदारी है कि वह कोरोना से जंग जीत चुके और उसमें जुटे सभी योद्धाओं का सम्मान करें और उनका मनोबल बढाएं। उनसे व उनके परिवार वालों से किसी तरह का भेदभाव न करें।जैतपुर के लमौरा स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद पर तैनात अंकित यादव बताते हैं कि वह घर-घर कोरोना जांच के दौरान उन्हें हल्का बुखार आया। उन्होंने 14 जुलाई को अपना सैंपलिंग कराया था। 19 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसी दिन बांदा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। 24 जुलाई को डिस्चार्ज होने के बाद 14 दिन होम आइसोलेशन के लिए खुद को कमरे में रखा और सावधानियां बरतीं। अंकित बताते हैं कि जिस घर में वह किराए से रह रहे हैं वहां अन्य कई किराएदार रहते हैं। उनके बांदा आइसोलेशन में जाने के बाद अन्य किराएदारों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दुकानदारों ने दूध, पानी, किराना आदि देने से मना कर दिया। बाद में जागरूक पड़ोसियों के समझाने पर स्थिति सामान्य हुई।
चरखारी में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रितु राजपूत का कहना है कि कोविड-19 में उनकी ड्यूटी कोविड कक्ष के बाहर रजिस्ट्रेशन में लगी थी। उसी दौरान वह संक्रमित हो गईं। कुछ समय आइसोलेशन में रहने के बाद वह अपने घर उरई चली गईं। वहां भी खुद को आइसोलेशन में रखा। तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन अभी भी पड़ोसियों में डर बना हुआ है। उनसे व उनके परिवार से दूरी बनाए हुए हैं। रितु ने बताया कि कोरोना संक्रमण को मात दे चुके मरीजों से किसी तरह का संक्रमण नहीं फैलता इसलिए उनसे किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। इस मुश्किल समय में हमें संक्रमित व्यक्ति का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
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चरखारी में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रितु राजपूत का कहना है कि कोविड-19 में उनकी ड्यूटी कोविड कक्ष के बाहर रजिस्ट्रेशन में लगी थी। उसी दौरान वह संक्रमित हो गईं। कुछ समय आइसोलेशन में रहने के बाद वह अपने घर उरई चली गईं। वहां भी खुद को आइसोलेशन में रखा। तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन अभी भी पड़ोसियों में डर बना हुआ है। उनसे व उनके परिवार से दूरी बनाए हुए हैं। रितु ने बताया कि कोरोना संक्रमण को मात दे चुके मरीजों से किसी तरह का संक्रमण नहीं फैलता इसलिए उनसे किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। इस मुश्किल समय में हमें संक्रमित व्यक्ति का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
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