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Mahoba News: विश्व पटल पर महोबा के पान को पहुंचा रहीं मयंकिता
Wed, 11 Feb 2026 11:39 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:39 PM IST
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फोटो 11 एमएएचपी 15 परिचय-राजभवन लखनऊ में मयंकिता को सम्मानित करतीं राज्यपाल व उद्यान मंत्री। स्
महोबिया पान की पुरानी ख्याति एक बार फिर से मिलने की उम्मीदें जगने लगी हैं। अब तक सुपारी और चूना के साथ खाए जाने वाले पान को अब बहुउपयोगी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शहर की बेटी मयंकिता महोबा के पान से अनेक प्रकार के प्रोडक्ट बनाकर विश्वस्तरीय प्रदर्शनियों में इनका प्रदर्शन कर रही हैं। राजभवन लखनऊ में आयोजित फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में मयंकिता ने बरेजे में उगाए गए पान की प्रदर्शनी लगाई। उन्हें पहला स्थान मिला। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उद्यानमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने राज्यपाल चल बैजंती पुरस्कार से मयंकिता को सम्मानित किया।
युवा पान व्यवसायी के रूप में उभर रहीं मयंकिता बताती हैं कि उन्होंने अपने दादा हरदयाल चौरसिया को पान की खेती करते देखा। वे बरेजे में पान का उत्पादन करते और मंडी व फुटकर दुकानों में बेचते थे। इसके बाद चाचा नर्वदा प्रसाद, ज्ञानदास, कुंवर बहादुर चौरसिया आदि ने पान की खेती करते हुए मंडी में पान बेचा लेकिन पिता राजकुमार चौरसिया ने पान का थोक व्यापार शुरू किया। उन्होंने वर्ष 2013 में चौरसिया समाज सेवा समिति के माध्यम से महोबा के देशावरी पान की जीआई टैगिंग के लिए आवेदन भेजा। आठ वर्ष के प्रयास के बाद वर्ष 2021 में पान को जीआई टैग मिला। मयंकिता बताती हैं कि पहले पाकिस्तान समेत कई देशों को महोबा के पान का निर्यात किया जाता था लेकिन समय के साथ यह निर्यात बंद हो गया। जीआई टैग मिलते ही इस पान को उसकी खोई हुई पुरानी पहचान मिलने की यात्रा शुरू हो गई। जब वह वर्ष 2022 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित जीआई एग्जीविशन में शामिल होने के लिए पहुंची तो देखा कि वहां पर किसान कोट-पेंट पहनकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे थे। यहां पर किसान हल्दी, मोरिंगा, जड़ी -बूटियाें से बने विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट को प्रमोट करते हुए ब्रांडिंग में लगे थे। उनसे प्रेरणा लेकर किचिन में उपलब्ध सामान का उपयोग करके पान से अन्य प्रोडक्ट बनाने की टेस्टिंग शुरू की। अच्छे नतीजे आने पर इन प्रोडक्ट की एनईबीएल लैब से टेस्टिंग कराई। सफलता मिलने पर पान चोकलेट, पान गुलगंद, पान मुखवास, पान के लड्डू, पान का शर्बत, पान का शैंपू और पान का ऑयल बनाकर तैयार किया। पान का औषधीय पाउडर भी बनाकर तैयार किया। पान से बने खाद्य पदार्थों में बिना शक्कर के ही मिठास लाने के लिए धागा मिश्री, खजूर और शहद का प्रयोग किया गया। अब ये प्रोडक्ट खूब पसंद किए जा रहे हैं।
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फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार करने पर है फोकस
मयंकिता बताती हैं कि अभी घर से वे ये प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेच रही हैं। भाई चित्रांश चौरसिया ने इस कार्य को तकनीक से जोड़ते हुए वेबसाइट बनाई। इसके अलावा उन्होंने इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल भी तैयार किया। वर्तमान में देश के अहमदाबाद, दिल्ली, हैदराबाद में खुले रिटेल काउंटर से पान के बने ये प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं। जल्द ही गुवाहाटी, लखनऊ के साथ बुंदेलखंड में फ्रेंचाइजी देकर प्रोडक्ट की बिक्री शुरू की जाएगी। इसके लिए उत्पादन यूनिट भी स्थापित करने के प्रयास हो रहे हैं।
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युवा पान व्यवसायी के रूप में उभर रहीं मयंकिता बताती हैं कि उन्होंने अपने दादा हरदयाल चौरसिया को पान की खेती करते देखा। वे बरेजे में पान का उत्पादन करते और मंडी व फुटकर दुकानों में बेचते थे। इसके बाद चाचा नर्वदा प्रसाद, ज्ञानदास, कुंवर बहादुर चौरसिया आदि ने पान की खेती करते हुए मंडी में पान बेचा लेकिन पिता राजकुमार चौरसिया ने पान का थोक व्यापार शुरू किया। उन्होंने वर्ष 2013 में चौरसिया समाज सेवा समिति के माध्यम से महोबा के देशावरी पान की जीआई टैगिंग के लिए आवेदन भेजा। आठ वर्ष के प्रयास के बाद वर्ष 2021 में पान को जीआई टैग मिला। मयंकिता बताती हैं कि पहले पाकिस्तान समेत कई देशों को महोबा के पान का निर्यात किया जाता था लेकिन समय के साथ यह निर्यात बंद हो गया। जीआई टैग मिलते ही इस पान को उसकी खोई हुई पुरानी पहचान मिलने की यात्रा शुरू हो गई। जब वह वर्ष 2022 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित जीआई एग्जीविशन में शामिल होने के लिए पहुंची तो देखा कि वहां पर किसान कोट-पेंट पहनकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे थे। यहां पर किसान हल्दी, मोरिंगा, जड़ी -बूटियाें से बने विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट को प्रमोट करते हुए ब्रांडिंग में लगे थे। उनसे प्रेरणा लेकर किचिन में उपलब्ध सामान का उपयोग करके पान से अन्य प्रोडक्ट बनाने की टेस्टिंग शुरू की। अच्छे नतीजे आने पर इन प्रोडक्ट की एनईबीएल लैब से टेस्टिंग कराई। सफलता मिलने पर पान चोकलेट, पान गुलगंद, पान मुखवास, पान के लड्डू, पान का शर्बत, पान का शैंपू और पान का ऑयल बनाकर तैयार किया। पान का औषधीय पाउडर भी बनाकर तैयार किया। पान से बने खाद्य पदार्थों में बिना शक्कर के ही मिठास लाने के लिए धागा मिश्री, खजूर और शहद का प्रयोग किया गया। अब ये प्रोडक्ट खूब पसंद किए जा रहे हैं।
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फ्रेंचाइजी मॉडल तैयार करने पर है फोकस
मयंकिता बताती हैं कि अभी घर से वे ये प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेच रही हैं। भाई चित्रांश चौरसिया ने इस कार्य को तकनीक से जोड़ते हुए वेबसाइट बनाई। इसके अलावा उन्होंने इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल भी तैयार किया। वर्तमान में देश के अहमदाबाद, दिल्ली, हैदराबाद में खुले रिटेल काउंटर से पान के बने ये प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं। जल्द ही गुवाहाटी, लखनऊ के साथ बुंदेलखंड में फ्रेंचाइजी देकर प्रोडक्ट की बिक्री शुरू की जाएगी। इसके लिए उत्पादन यूनिट भी स्थापित करने के प्रयास हो रहे हैं।
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