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मन लागो मेरो यार फकीरी मा...
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Sun, 07 Jun 2015 10:36 PM IST
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संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में
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कबीर आश्रम में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इंद्रजीत सिंह ने ‘मन लागो मेरो
यार फकीरी मा, जो सुख पाया नाम भजन में, वो सुख नाहि अमीरी मा।’ सुनाकर
भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कंछेदीलाल पुरवार ने बने तो कछू धरम कर ले भजन सुनाया। रामअवतार सेन, बाबा गंगादास, छविलाल ने भी भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं का मनमोह लिया। पूनम सिंह ने अंखियां हरि दर्शन को तरसी भजन गाया तो श्रोता तालियां बजाने लगे।
चंद्रिका महाविद्यालय के प्रबंधक अरविंद कछवाह ने दोहा प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. एलसी अनुरागी ने भी कबीरदास जी का दोहा सुनाकर लोगों को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।
इस मौके पर हरदयाल हरि ने कहा कि छोटे बनकर समाज और गरीबों की सेवा की जाती है। उन्होंने कहा कि इंसान को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। बड़ों का सम्मान करने से सम्मान मिलता है।
पं. आशाराम तिवारी ने कहा कि कबीरदास जी ने लिखा है कि वे ही मनुष्य बचेंगे, जो गुरु का स्मरण भगवत भजन करते रहेंगे। इसलिए मनुष्य को सत्संग अवश्य करना चाहिए। इस मौके पर किशोरदाला, कमलापत, किशोरीलाल अनुरागी, विदेश विद्यासन, श्यामानंद सहित तमाम वक्ता मौजूद रहे।
कंछेदीलाल पुरवार ने बने तो कछू धरम कर ले भजन सुनाया। रामअवतार सेन, बाबा गंगादास, छविलाल ने भी भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं का मनमोह लिया। पूनम सिंह ने अंखियां हरि दर्शन को तरसी भजन गाया तो श्रोता तालियां बजाने लगे।
चंद्रिका महाविद्यालय के प्रबंधक अरविंद कछवाह ने दोहा प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. एलसी अनुरागी ने भी कबीरदास जी का दोहा सुनाकर लोगों को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।
इस मौके पर हरदयाल हरि ने कहा कि छोटे बनकर समाज और गरीबों की सेवा की जाती है। उन्होंने कहा कि इंसान को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। बड़ों का सम्मान करने से सम्मान मिलता है।
पं. आशाराम तिवारी ने कहा कि कबीरदास जी ने लिखा है कि वे ही मनुष्य बचेंगे, जो गुरु का स्मरण भगवत भजन करते रहेंगे। इसलिए मनुष्य को सत्संग अवश्य करना चाहिए। इस मौके पर किशोरदाला, कमलापत, किशोरीलाल अनुरागी, विदेश विद्यासन, श्यामानंद सहित तमाम वक्ता मौजूद रहे।