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महोबा : उम्र के मामले में दोषी पूर्व अध्यक्ष को एक वर्ष की सजा
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महोबा। कुलपहाड़ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष को गलत उम्र के आधार पर चुनाव लड़ने के मामले में साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया है। 27 साल बाद चले मुकदमे में सिविल जज जूनियर डिवीजन पुष्पेंद्र चौधरी ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
वर्ष 1995 में कुलपहाड़ नगर पंचायत का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। इसमें गोपी प्रसाद ने चुनाव जीता था। प्रतिद्वंद्वी देशराज ने प्रशासन को प्रार्थनापत्र देकर गोपीप्रसाद की उम्र कम बताई थी।
सुनवाई न होने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन महोबा में परिवाद दायर कर दिया। गोपीप्रसाद ने हलफनामा दिया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गोपी हाईकोर्ट इलाहाबाद में मुकदमा हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कम होने पर वर्ष 1999 में गोपी को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था।
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सजा न होने पर देशराज ने दोबारा सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट में परिवाद दायर किया। इसमें सिविल जज जूनियर डिवीजन ने गोपी को झूठा हलफनामा प्रस्तुत करने और प्रतिरूपण द्वारा छल करने का दोषी पाया।
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वर्ष 1995 में कुलपहाड़ नगर पंचायत का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। इसमें गोपी प्रसाद ने चुनाव जीता था। प्रतिद्वंद्वी देशराज ने प्रशासन को प्रार्थनापत्र देकर गोपीप्रसाद की उम्र कम बताई थी।
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सुनवाई न होने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन महोबा में परिवाद दायर कर दिया। गोपीप्रसाद ने हलफनामा दिया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गोपी हाईकोर्ट इलाहाबाद में मुकदमा हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कम होने पर वर्ष 1999 में गोपी को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था।
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सजा न होने पर देशराज ने दोबारा सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट में परिवाद दायर किया। इसमें सिविल जज जूनियर डिवीजन ने गोपी को झूठा हलफनामा प्रस्तुत करने और प्रतिरूपण द्वारा छल करने का दोषी पाया।