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मां के पैर छूकर भावुक हुआ हरदयाल, बोला अब दोबारा नहीं जाऊंगा परदेस
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मां प्रकाशरानी के पैर छूकर आर्शीवाद लेता हरदयाल।
- फोटो : MAHOBA
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चरखारी (महोबा)। दो वक्त की रोटी की तलाश में नोएडा गए विकासखंड चरखारी के गुढ़ा गांव निवासी हरदयाल 12 साल बाद सोमवार का घर लौट आए। युवा क्रांति के संस्थापक अविनाश सिंह उन्हें अपने साथ घर छोड़ने पहुंचे। हरदयाल ने सबसे पहले 80 वर्षीय मां प्रकाशरानी के पैर छुए। इस दौरान हरदयाल भावुक हो गया और बोला कि अब वह दोबारा परदेस नहीं जाएगा।
गुढ़ा गांव निवासी हरदयाल 12 वर्ष पहले नोएडा गया था। रोजगार की तलाश में वह सालों भटकता रहा। इस दौरान जिला अस्पताल के समीप सड़क किनारे तंबू लगाकर बैठे हरदयाल की मदद के लिए कई संगठन आगे आए। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद विभिन्न संस्थाओं ने हरदयाल जी मदद की। साथ ही पुलिस प्रशासन ने महोबा जिले के पुलिस अधिकारियों से बात कर मदद की अपील की थी। हरदयाल को घर भेजने के लिए युवा क्रांति के संस्थापक अविनाश सिंह चार पहिया वाहन से गुढ़ा गांव पहुंचे।
घर पहुंचते ही हरदयाल ने वृद्ध मां के पैर छुए तो मां ने बेटे को दुलारते हुए अब उसे छोड़कर न जाने की बात कही। ग्रामीण भी हरदयाल से मिलने पहुंचे और उसका हालचाल पूछा। हरदयाल ने बताया कि वह अब अपनी मां के साथ रहेगा और यहीं पर कुछ काम करेगा। संस्था के सदस्यों ने उसे घर भेजने में पूरी मदद की। उसने अमर उजाला व युवा क्रांति संस्था के प्रयासों की सराहना की। कहा कि उसे अपनी भूमि से बेहद लगाव है। वृद्ध मां किसी तरह अपना पेट पाल रही थी लेकिन अब वह उसका सहारा बनेगा और गांव में ही रहेगा।
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गुढ़ा गांव निवासी हरदयाल 12 वर्ष पहले नोएडा गया था। रोजगार की तलाश में वह सालों भटकता रहा। इस दौरान जिला अस्पताल के समीप सड़क किनारे तंबू लगाकर बैठे हरदयाल की मदद के लिए कई संगठन आगे आए। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद विभिन्न संस्थाओं ने हरदयाल जी मदद की। साथ ही पुलिस प्रशासन ने महोबा जिले के पुलिस अधिकारियों से बात कर मदद की अपील की थी। हरदयाल को घर भेजने के लिए युवा क्रांति के संस्थापक अविनाश सिंह चार पहिया वाहन से गुढ़ा गांव पहुंचे।
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घर पहुंचते ही हरदयाल ने वृद्ध मां के पैर छुए तो मां ने बेटे को दुलारते हुए अब उसे छोड़कर न जाने की बात कही। ग्रामीण भी हरदयाल से मिलने पहुंचे और उसका हालचाल पूछा। हरदयाल ने बताया कि वह अब अपनी मां के साथ रहेगा और यहीं पर कुछ काम करेगा। संस्था के सदस्यों ने उसे घर भेजने में पूरी मदद की। उसने अमर उजाला व युवा क्रांति संस्था के प्रयासों की सराहना की। कहा कि उसे अपनी भूमि से बेहद लगाव है। वृद्ध मां किसी तरह अपना पेट पाल रही थी लेकिन अब वह उसका सहारा बनेगा और गांव में ही रहेगा।
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