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आफत की बारिश में उजड़ गई फसल, अब कैसे पीले होंगे बेटियों के हाथ
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दीन दयाल।
- फोटो : MAHOBA
श्रीनगर (महोबा)। बुंदेलखंड में पिछले पांच दिनों से बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को तहस नहस कर दिया है। इस बार खेतों में लहलहा रही रबी की फसल से अच्छी पैदावार होने की उम्मीद पर किसान खुश थे। अच्छी फसल देख कई किसानों ने बेटियों के ब्याह धूमधाम से करने की तैयारियां शुरू कर दी थीं। तारीख तय होने पर रिश्तेदारों को बुलावा भी भेज दिया था, लेकिन कुदरत के कहर ने पलभर में उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है।
रबी की फसलों की तबाही के बाद किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि वह बेटियों के हाथ पीले कैसे करेंगे। पैदावार न होने से उसके हाथ कुछ नहीं लगेगा। फसलों के नुकसान और उसके लिए मुआवजा दूर की कौड़ी है।
केस- 1
ग्राम पिपरा माफ के किसान दीनदयाल रैकवार बताया कि 20 बीघा जमीन बटाई पर ली थी और दो बीघा जमीन स्वयं की थी। जिसमें मटर एवं चना की बुवाई की थी। इसमें करीब एक लाख की लागत आई थी। इस वर्ष फसल अच्छी देख कर के पुत्री केसर की शादी चरखारी तहसील के बफरेथा में 18 फरवरी की तय कर दी थी लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी की शादी कर्ज लेकर करनी पड़ेगी, जो गहने हैं उन्हें गिरवी रख देंगे।
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केस- 2
ग्राम इमलिया के किसान रंजोर सिंह बताते हैं कि उन्होंने 19 बीघा जमीन में चना मटर एवं गेहूं की फसल की बुवाई की थी। इंडियन बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड एवं साधन सहकारी समिति से फसली ऋण लिया था। इसमें करीब डेढ़ लाख की लागत आई थी। इस बार उम्मीद थी कि फसल अच्छी हो जाएगी। इसके चलते पुत्री दीपा की शादी 18 फरवरी को तय कर दी थी लेकिन फसल बर्बाद होने से उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अगर बेटी के हाथ पीले करना है तो उन्हें साहूकारों के आगे हाथ फैलाना पड़ेगा, इसके अलावा कोई उपाय समझ नहीं आ रहा है।
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रबी की फसलों की तबाही के बाद किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि वह बेटियों के हाथ पीले कैसे करेंगे। पैदावार न होने से उसके हाथ कुछ नहीं लगेगा। फसलों के नुकसान और उसके लिए मुआवजा दूर की कौड़ी है।
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केस- 1
ग्राम पिपरा माफ के किसान दीनदयाल रैकवार बताया कि 20 बीघा जमीन बटाई पर ली थी और दो बीघा जमीन स्वयं की थी। जिसमें मटर एवं चना की बुवाई की थी। इसमें करीब एक लाख की लागत आई थी। इस वर्ष फसल अच्छी देख कर के पुत्री केसर की शादी चरखारी तहसील के बफरेथा में 18 फरवरी की तय कर दी थी लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी की शादी कर्ज लेकर करनी पड़ेगी, जो गहने हैं उन्हें गिरवी रख देंगे।
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केस- 2
ग्राम इमलिया के किसान रंजोर सिंह बताते हैं कि उन्होंने 19 बीघा जमीन में चना मटर एवं गेहूं की फसल की बुवाई की थी। इंडियन बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड एवं साधन सहकारी समिति से फसली ऋण लिया था। इसमें करीब डेढ़ लाख की लागत आई थी। इस बार उम्मीद थी कि फसल अच्छी हो जाएगी। इसके चलते पुत्री दीपा की शादी 18 फरवरी को तय कर दी थी लेकिन फसल बर्बाद होने से उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अगर बेटी के हाथ पीले करना है तो उन्हें साहूकारों के आगे हाथ फैलाना पड़ेगा, इसके अलावा कोई उपाय समझ नहीं आ रहा है।

रंजोर सिंह।- फोटो : MAHOBA