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मेरी गली छोड़ सारे जहां में बरसात हुई
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Sat, 04 Feb 2017 10:18 PM IST
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- फोटो : amarujala
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कबरई कस्बे ने तीन बार विधायक दिए। इसके बाद भी यहां का विकास अधूरा है। पूरे विधान सभा क्षेत्र में विकास का दावा करने वाले जनप्रतिनिधियों ने अपनी गलियों को जस का तस छोड़ दिया है। यही वजह है कि स्थानीय लोग चुनावी महासमर में रुचि नहीं ले रहे हैं।
वर्ष 1993 और 1996 में कबरई निवासी अरिमर्दन सिंह जनता दल और फिर सपा से विधायक बने। 2002 में सपा से सिद्धगोपाल साहू को कबरई क्षेत्र के लोगों ने विधानसभा पहुंचाया। चुनाव के दौरान कबरई में आईटीआई, पालीटेक्निक कालेज, जीजीआईसी आदि का मुद्दा उठा। लेकिन चुनाव बीतने के बाद कस्बे को भुला दिया गया।
तीन चुनावों से पहले कबरई को तहसील बनाने का जोर शोर से चुनावी मुद्दा स्थानीय स्तर पर उठाया गया। लेकिन यह मुद्दा भी परवान नहीं चढ़ पाया। व्यापारी नेता प्रीतम प्रसाद निगम बताते हैं कि कस्बे के आधा दर्जन वार्ड पानी के संकट से जूझ रहे हैं। कलशहा बाबा पहाडी राजेंद्र नगर में 2005-06 में पानी की टंकी बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन ने शासन को भेजा, जो स्वीकृत नहीं हुआ।
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वर्ष 1993 और 1996 में कबरई निवासी अरिमर्दन सिंह जनता दल और फिर सपा से विधायक बने। 2002 में सपा से सिद्धगोपाल साहू को कबरई क्षेत्र के लोगों ने विधानसभा पहुंचाया। चुनाव के दौरान कबरई में आईटीआई, पालीटेक्निक कालेज, जीजीआईसी आदि का मुद्दा उठा। लेकिन चुनाव बीतने के बाद कस्बे को भुला दिया गया।
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तीन चुनावों से पहले कबरई को तहसील बनाने का जोर शोर से चुनावी मुद्दा स्थानीय स्तर पर उठाया गया। लेकिन यह मुद्दा भी परवान नहीं चढ़ पाया। व्यापारी नेता प्रीतम प्रसाद निगम बताते हैं कि कस्बे के आधा दर्जन वार्ड पानी के संकट से जूझ रहे हैं। कलशहा बाबा पहाडी राजेंद्र नगर में 2005-06 में पानी की टंकी बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन ने शासन को भेजा, जो स्वीकृत नहीं हुआ।
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