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Mahoba News: भव्य शोभायात्रा के साथ कजली मेले का आगाज, उमड़ा जनसैलाब
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-शोभायात्रा में बुंदेलखंड की गौरवशाली संस्कृति और वीरता की दिखी झलक
-जिले के प्रभारी मंत्री, विधायक, एमएलसी व डीएम-एसपी ने फीता काटकर किया शुभारंभ
-वीर आल्हा, ऊदल, इंदल के प्रतिरूपों और विभिन्न झांकियों ने मोहा मन
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। ऐतिहासिक कजली मेले का शनिवार को भव्य शोभायात्रा के साथ आगाज हो गया। शोभायात्रा में बुंदेलखंड की गौरवशाली संस्कृति व वीरता की झलक देखने को मिलीं। इसमें कई जिलों से आए हजारों मेला प्रेमियों का सैलाब उमड़ा। हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ करीब आधा सैकड़ा झांकियों ने लोगों का मन मोहा। हर सड़क, गली व सार्वजनिक स्थल पर लोगों की भीड़ नजर आई। शोभायात्रा के साथ कीरत सागर तट पर सात दिन तक मेला लगेगा। दिन और रात के समय बुंदेली लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी शुरू हो गए।
शहर के हवेली दरवाजा स्थित शहीद स्थल से दोपहर साढ़े तीन बजे कजली मेले की भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ श्रम एवं सेवायोजन विभाग राज्यमंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी, सदर विधायक राकेश गोस्वामी, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, पालिकाध्यक्ष संतोष चौरसिया, डीएम गजल भारद्वाज और एसपी शशांक सिंह ने फीता काटकर किया। शोभायात्रा में हाथी पर सवार आल्हा, घोड़े पर सवार ऊदल व ब्रह्मा के अलावा अन्य वीर योद्धाओं के प्रतिरूप चलते रहे। जगह-जगह अश्व नृत्य के साथ कलाकारों ने विभिन्न करतब दिखाकर लोगों का दिल जीता। सबसे आगे सिर पर कलश धारण कर महिलाएं चलती रहीं।
शोभायात्रा में वीर आल्हा-ऊदल के अलावा राजकुमारी चंद्रावलि का डोला, सखियों के साथ वाग में झूला झूलतीं रानी मछला, मां शारदा की पूजा करते वीर आल्हा, राधा-कृष्ण, पर्यावरण संरक्षण आदि की झांकी शामिल रहीं। शोभायात्रा हवेली दरवाजा से शुरु होकर तहसील चौराहा, मुख्य बाजार, ऊदल चौक, सुभाष चौक, खोयामंडी होते हुए कीरत सागर तट पहुंची। जहां भुजरियों का विसर्जन किया गया। मेलास्थल पर करीब एक लाख की भीड़ रही। शोभायात्रा के साथ सात दिन तक कीरत सागर तट पर बने आल्हा मंच और सांस्कृतिक मंच पर रंगारंग कार्यक्रम शुरू हो गए। कजली शोभायात्रा में यहां की गौरवशाली संस्कृति, वीरता, परंपरा व सामाजिक एकता का अदभुत संगम देखने को मिला। परंपरा का गौरव, वीरता की गूंज और जन-जन का उत्साह ही महोबा के ऐतिहासिक कजली मेले की पहचान है। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष जेपी अनुरागी, एएसपी वंदना सिंह, एडीएम इंद्रनंदन सिंह, सीडीओ बलराम कुमार, पालिका ईओ अवधेश कुमार, समाजसेवी भागीरथ नगायच, अधिवक्ता यशोवर्मन सिंह चंदेल मौजूद रहे।
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गौरवशाली अतीत को संजोए है कजली मेला
महोबा। 12वीं शताब्दी के चंदेल साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की स्मृतियों को संजोए ऐतिहासिक कजली मेला बुंदेलों की आन-बान-शान का प्रतीक है। सन् 1182 में चंदेल शासनकाल के दौरान दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर चढ़ाई कर दी थी। दिल्ली नरेश की योजना राजकुमारी चंद्रावलि का डोला लूटने की थी। राज परमाल की बेटी चंद्रावलि 1,400 सखियों के साथ भुजरियां विसर्जित करने कीरत सागर तट जा रही थीं। रास्ते में पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चामुंडा राय ने आक्रमण कर दिया और राजकुमारी चंद्रावलि का डोला ले जाने लगा था। उस समय वीर आल्हा-ऊदल कन्नोज में थे। अपने राज्य के अस्तित्व व अस्मिता पर संकट की खबर सुनकर आल्हा-ऊदल साधु वेश में महोबा आए और पृथ्वीराज की सेना से भीषण युद्ध किया। रक्षाबंधन के दूसरे दिन युद्ध में जीत मिलने पर कीरत सागर में भुजरियों का विसर्जन किया गया। तभी से विजयोत्सव के रूप में कजली मेला लगता चला आ रहा है। (संवाद)
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चप्पे-चप्पे पर रहा पुलिस का पहरा
महोबा। कजली मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस का कड़ा पहरा रहा। शोभायात्रा के अलावा हर चौराहे पर पुलिस तैनात रही। एएसपी वंदना सिंह, सीओ रविकांत और सीओ चरखारी दीपक दुबे स्वयं सुरक्षा व्यवस्था को कमान संभाले रहे। आधा किमी दूर से ही शहर में वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया। शहर के ही वाहन पार्क किए जाने से जाम की स्थिति नहीं बनीं।
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बारिश ने दिलाई राहत उमस ने किया परेशान
महोबा। कजली मेले की शोभायात्रा में भीषण उमस के बीच कुछ देर हल्की बारिश हुई। इससे मेलप्रेमियों को कुछ राहत मिली। जैसे-जैसे शाम ढलती गई मेला प्रेमियों का उत्साह बढ़ता गया। युवाओं से लेकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों में भी जोश नजर आया। शोभायात्रा मार्ग के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
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छतों और दुकानों पर चढ़कर देखी शोभायात्रा
महोबा। शोभायात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों व मकानों की छतों के अलावा दीवारों पर चढ़कर लोगों ने शोभायात्रा का आनंद लिया। घंटों पहले से ही लोग और रिश्तेदार छत पर चढ़कर शोभायात्रा निकलने का इंतजार करते रहे। छतों पर भीड़ अधिक होने से किसी हादसे की आशंका को लेकर पुलिस उन्हें पीछे की ओर रहने के निर्देश देती रही। ताकि, कोई अनहोनी न हो।
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हर पल को मोबाइल में कैद कर बनाया यादगार
महोबा। शोभायात्रा के दौरान मेलाप्रेमियों में सेल्फी खींचने व वीडियो बनाने का क्रेज दिखा। हर कोई हाथ में मोबाइल लेकर शोभायात्रा का वीडियो बनाकर अपने फेसबुक और स्टेटस पर लगाकर इस पल को यादगार बनाते रहे। मेले की हर गतिविधि को कैद करने के लिए जगह-जगह पुलिस कर्मचारी भी वीडियोग्राफी करते नजर आए।
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-जिले के प्रभारी मंत्री, विधायक, एमएलसी व डीएम-एसपी ने फीता काटकर किया शुभारंभ
-वीर आल्हा, ऊदल, इंदल के प्रतिरूपों और विभिन्न झांकियों ने मोहा मन
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। ऐतिहासिक कजली मेले का शनिवार को भव्य शोभायात्रा के साथ आगाज हो गया। शोभायात्रा में बुंदेलखंड की गौरवशाली संस्कृति व वीरता की झलक देखने को मिलीं। इसमें कई जिलों से आए हजारों मेला प्रेमियों का सैलाब उमड़ा। हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ करीब आधा सैकड़ा झांकियों ने लोगों का मन मोहा। हर सड़क, गली व सार्वजनिक स्थल पर लोगों की भीड़ नजर आई। शोभायात्रा के साथ कीरत सागर तट पर सात दिन तक मेला लगेगा। दिन और रात के समय बुंदेली लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी शुरू हो गए।
शहर के हवेली दरवाजा स्थित शहीद स्थल से दोपहर साढ़े तीन बजे कजली मेले की भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ श्रम एवं सेवायोजन विभाग राज्यमंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल उर्फ मन्नू कोरी, सदर विधायक राकेश गोस्वामी, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, पालिकाध्यक्ष संतोष चौरसिया, डीएम गजल भारद्वाज और एसपी शशांक सिंह ने फीता काटकर किया। शोभायात्रा में हाथी पर सवार आल्हा, घोड़े पर सवार ऊदल व ब्रह्मा के अलावा अन्य वीर योद्धाओं के प्रतिरूप चलते रहे। जगह-जगह अश्व नृत्य के साथ कलाकारों ने विभिन्न करतब दिखाकर लोगों का दिल जीता। सबसे आगे सिर पर कलश धारण कर महिलाएं चलती रहीं।
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शोभायात्रा में वीर आल्हा-ऊदल के अलावा राजकुमारी चंद्रावलि का डोला, सखियों के साथ वाग में झूला झूलतीं रानी मछला, मां शारदा की पूजा करते वीर आल्हा, राधा-कृष्ण, पर्यावरण संरक्षण आदि की झांकी शामिल रहीं। शोभायात्रा हवेली दरवाजा से शुरु होकर तहसील चौराहा, मुख्य बाजार, ऊदल चौक, सुभाष चौक, खोयामंडी होते हुए कीरत सागर तट पहुंची। जहां भुजरियों का विसर्जन किया गया। मेलास्थल पर करीब एक लाख की भीड़ रही। शोभायात्रा के साथ सात दिन तक कीरत सागर तट पर बने आल्हा मंच और सांस्कृतिक मंच पर रंगारंग कार्यक्रम शुरू हो गए। कजली शोभायात्रा में यहां की गौरवशाली संस्कृति, वीरता, परंपरा व सामाजिक एकता का अदभुत संगम देखने को मिला। परंपरा का गौरव, वीरता की गूंज और जन-जन का उत्साह ही महोबा के ऐतिहासिक कजली मेले की पहचान है। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष जेपी अनुरागी, एएसपी वंदना सिंह, एडीएम इंद्रनंदन सिंह, सीडीओ बलराम कुमार, पालिका ईओ अवधेश कुमार, समाजसेवी भागीरथ नगायच, अधिवक्ता यशोवर्मन सिंह चंदेल मौजूद रहे।
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गौरवशाली अतीत को संजोए है कजली मेला
महोबा। 12वीं शताब्दी के चंदेल साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की स्मृतियों को संजोए ऐतिहासिक कजली मेला बुंदेलों की आन-बान-शान का प्रतीक है। सन् 1182 में चंदेल शासनकाल के दौरान दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर चढ़ाई कर दी थी। दिल्ली नरेश की योजना राजकुमारी चंद्रावलि का डोला लूटने की थी। राज परमाल की बेटी चंद्रावलि 1,400 सखियों के साथ भुजरियां विसर्जित करने कीरत सागर तट जा रही थीं। रास्ते में पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चामुंडा राय ने आक्रमण कर दिया और राजकुमारी चंद्रावलि का डोला ले जाने लगा था। उस समय वीर आल्हा-ऊदल कन्नोज में थे। अपने राज्य के अस्तित्व व अस्मिता पर संकट की खबर सुनकर आल्हा-ऊदल साधु वेश में महोबा आए और पृथ्वीराज की सेना से भीषण युद्ध किया। रक्षाबंधन के दूसरे दिन युद्ध में जीत मिलने पर कीरत सागर में भुजरियों का विसर्जन किया गया। तभी से विजयोत्सव के रूप में कजली मेला लगता चला आ रहा है। (संवाद)
चप्पे-चप्पे पर रहा पुलिस का पहरा
महोबा। कजली मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस का कड़ा पहरा रहा। शोभायात्रा के अलावा हर चौराहे पर पुलिस तैनात रही। एएसपी वंदना सिंह, सीओ रविकांत और सीओ चरखारी दीपक दुबे स्वयं सुरक्षा व्यवस्था को कमान संभाले रहे। आधा किमी दूर से ही शहर में वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया। शहर के ही वाहन पार्क किए जाने से जाम की स्थिति नहीं बनीं।
बारिश ने दिलाई राहत उमस ने किया परेशान
महोबा। कजली मेले की शोभायात्रा में भीषण उमस के बीच कुछ देर हल्की बारिश हुई। इससे मेलप्रेमियों को कुछ राहत मिली। जैसे-जैसे शाम ढलती गई मेला प्रेमियों का उत्साह बढ़ता गया। युवाओं से लेकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों में भी जोश नजर आया। शोभायात्रा मार्ग के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
छतों और दुकानों पर चढ़कर देखी शोभायात्रा
महोबा। शोभायात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों व मकानों की छतों के अलावा दीवारों पर चढ़कर लोगों ने शोभायात्रा का आनंद लिया। घंटों पहले से ही लोग और रिश्तेदार छत पर चढ़कर शोभायात्रा निकलने का इंतजार करते रहे। छतों पर भीड़ अधिक होने से किसी हादसे की आशंका को लेकर पुलिस उन्हें पीछे की ओर रहने के निर्देश देती रही। ताकि, कोई अनहोनी न हो।
हर पल को मोबाइल में कैद कर बनाया यादगार
महोबा। शोभायात्रा के दौरान मेलाप्रेमियों में सेल्फी खींचने व वीडियो बनाने का क्रेज दिखा। हर कोई हाथ में मोबाइल लेकर शोभायात्रा का वीडियो बनाकर अपने फेसबुक और स्टेटस पर लगाकर इस पल को यादगार बनाते रहे। मेले की हर गतिविधि को कैद करने के लिए जगह-जगह पुलिस कर्मचारी भी वीडियोग्राफी करते नजर आए।