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सुनते ही दौड़े चले आए मोहन, लगाया गले से सुदामा...
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Thu, 16 Feb 2017 10:53 PM IST
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-कथा का रसपान कराते आचार्य
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कस्बा कुलपहाड़ के मोहल्ला सोनीगंज में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा का गुरुवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक पं. श्यामसुंदर पाठक ने कृष्ण सुदामा चरित्र का रोचक वर्णन सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान भजन सुनते ही दौड़े चले आए मोहन, लगाया गले से सुदामा को मोहन सुनकर भक्त झूमने लगे।
कथावाचक ने कहा कि अन्याय व अत्याचार बढ़ने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने अवतार लेकर साधारण मनुष्यों की तरह सभी कार्य किए, पर प्रत्येक कार्य को सद्मार्ग से जोड़ा। उन्होंने कृष्ण और सुदामा की अदभुत मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि जब सुदामा गरीबी के हालात में भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचते है तो द्वारपाल उसे रोक लेते है। जैसे ही कृष्ण को पता चला कि उनका मित्र सुदामा मिलने आया है तो वह दौड़कर पहुंचे और सुदामा को गले से लगा लिया।
भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को तीनों लोको की संपदा दान कर दी। मित्रता ऐसी होनी चाहिए जो सुख और दुख में काम आए। कथा सुनने के लिए महिलाओं की भारी भीड़ जुटी रही। संगीतमय भजनों के दौरान आर्गन पर अखिलेश सोनकिया, बैजो पर गोल्डी शर्मा व ढोलक पर प्रदीप यादव ने संगत दी। वैदिक मंत्रोचार के साथ हवन पूजन के बाद कथा का समापन हुआ।
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कथावाचक ने कहा कि अन्याय व अत्याचार बढ़ने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने अवतार लेकर साधारण मनुष्यों की तरह सभी कार्य किए, पर प्रत्येक कार्य को सद्मार्ग से जोड़ा। उन्होंने कृष्ण और सुदामा की अदभुत मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि जब सुदामा गरीबी के हालात में भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचते है तो द्वारपाल उसे रोक लेते है। जैसे ही कृष्ण को पता चला कि उनका मित्र सुदामा मिलने आया है तो वह दौड़कर पहुंचे और सुदामा को गले से लगा लिया।
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भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को तीनों लोको की संपदा दान कर दी। मित्रता ऐसी होनी चाहिए जो सुख और दुख में काम आए। कथा सुनने के लिए महिलाओं की भारी भीड़ जुटी रही। संगीतमय भजनों के दौरान आर्गन पर अखिलेश सोनकिया, बैजो पर गोल्डी शर्मा व ढोलक पर प्रदीप यादव ने संगत दी। वैदिक मंत्रोचार के साथ हवन पूजन के बाद कथा का समापन हुआ।
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