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ओलावृष्टि से बची फसल भी चौपट
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा।
Updated Wed, 04 Mar 2015 12:47 AM IST
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बारिश की मार झेलने के बाद शेष बची फसल को भी ओलों ने तबाह कर दिया है।
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जिससे किसानों को बीज निकालना भी मुश्किल हो गया है।
वहीं बैंकों से कर्ज लेकर खेतों में बुवाई करने वाले किसानों के सामने बैंक के कर्ज की अदायगी की चिंता हो गई है। ग्राम टिकरिया की प्रधान रामकली, देवीदीन अनुरागी, ओमप्रकाश तिवारी, परमेश्वरी दयाल, घनश्याम, देवनारायण, खेमचंद्र ने बताया कि चने के पौधों से फूल झड़ जाने से फसल बर्बाद हो गई।
वहीं हवा चलने से लाही और गेहूं की फसल जमीन में बिछ गई है। यही नहीं कटी पड़ी मसूर की फसल भी काली पड़ने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि की चपेट में आकर 30 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान हुआ है।
वहीं बैंकों से कर्ज लेकर खेतों में बुवाई करने वाले किसानों के सामने बैंक के कर्ज की अदायगी की चिंता हो गई है। ग्राम टिकरिया की प्रधान रामकली, देवीदीन अनुरागी, ओमप्रकाश तिवारी, परमेश्वरी दयाल, घनश्याम, देवनारायण, खेमचंद्र ने बताया कि चने के पौधों से फूल झड़ जाने से फसल बर्बाद हो गई।
वहीं हवा चलने से लाही और गेहूं की फसल जमीन में बिछ गई है। यही नहीं कटी पड़ी मसूर की फसल भी काली पड़ने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि की चपेट में आकर 30 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान हुआ है।