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दृढ़ संकल्प सेेे पाया मुकाम: जयेंद्र
mahoba
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कबरई (महोबा)। गरीबी के बीच गांव के परिषदीय विद्यालय से शिक्षा का सफर शुरू करने वाले जयेंद्र ने आईएएस बनकर जिले का नाम रोशन किया है। पिता कबरई के क्रशर प्लांट में मुनीम हैं। शुक्रवार को जारी हुए परिणाम में जयेंद्र ने 150 वीं रैंक हासिल की है। बेटे की इस कामयाबी से मां बाप खासा खुश हैं।
विकासखंड कबरई के ग्राम मवई निवासी जयेंद्र यादव ने गांव से प्राइमरी शिक्षा हासिल की। इसके बाद परिषदीय विद्यालय से ही उसका चयन नवोदय में हो गया। कक्षा छठवीं से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा जयेंद्र ने नवोदय विद्यालय महोबा से ग्रहण की। जयेंद्र ने वर्ष 2007 में 89 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल और 2009 में नवोदय विद्यालय से ही इंटर 69 प्रतिशत अंकों से पास की। इसके बाद आईआईटी बनारस में चयन हो गया और 2013 में केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। वहीं से कैंपस सिलेक्शन के साथ इंडियन आयल कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में 2014 में नौकरी मिल गई लेकिन जयेंद्र उस नौकरी से खुश नही था। उसका आईएएस बनकर देश की सेवा करने का सपना था। इंडियन ऑयल पानीपत में प्रोडक्शन मैनेजर की नौकरी करने के साथ समय निकाल कर आईएएस की सेल्फ स्टडी रात में 6 से 7 घंटे तक करता रहा। नौकरी में होने के कारण दिन में पढ़ाई का समय नही मिलता था। लोक प्रशासन विषय को मेन विषय चुनकर तैयारी शुरू की। जयेंद्र का कहना है कि आईएएस की तैयारी के दौरान प्रतिदिन राजनीतिक विश्लेषण संपादकीय अखबारों की पढ़ता था। पहले और दूसरे प्रयास में आईएएस पास न कर पाने का मलाल रहा। दृढ़ इच्छा शक्ति से तीसरे प्रयास में आईएएस परीक्षा पास कर ली। अब उनका सपना देश को एक सशक्त, आर्थिक, मजबूत राष्ट्र के रूप में विकसित देखने की है। जयेंद्र इस कामयाबी का श्रेय अपने माता पिता को देता है। खन्ना प्रतिनिधि के अनुसार जयेंद्र के आईएएस में चयन से ग्राम मवई में भी जश्न का माहौल रहा। परिजनों की खुशी का कोई ठिकाना नही रहा। आईएएस में चयन होने के बाद गांव पहुंचें जयेंद्र को ग्रामीणों ने भी मिठाई खिलाकर उसकी कामयाबी के लिए आशीर्वाद दिया।
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मुनीमी कर पिता ने बेटे को दिलाई बेहतर शिक्षा
जिले के खन्ना थाना अंतर्गत ग्राम मवईखुर्द निवासी छत्रपाल यादव दो दशक पहले खेती बाड़ी छोड़कर कबरई आकर रहने लगे और रोजी के साथ घर परिवार चलाने के लिए क्रशर मंडी में मुनीम का काम करने लगा। छत्रपाल ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नही होने दी। हाईस्कूल तक शिक्षित मां कुसमा देवी ग्रहणी है। जयेंद्र ने आईएएस में अपने चयन के बारे में बताया कि नौकरी के साथ बचे समय में आनलाइन किताबों व नोट्स से तैयारी की। तीन तीन छात्रों का ग्रुप बनाकर आईएएस के क्रास प्रश्न एक दूसरे से पूछते थे। कहीं कोई कोचिंग नहीं की।
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विदेशों की भांति शिक्षा के नए आयाम स्थापित करने पर रहेगा जोर
आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जयेंद्र ने बताया कि देश में प्रशासनिक सुधार को गति देने, शिक्षा के क्षेत्र में विदेशों की भांति शिक्षा के नए आयाम देश में स्थापित करने व ग्रामीण किसानों की दशा सुधारने के लिए सिंचाई के साधन बढ़ाने पर जोर रहेगा। देश की रक्षा नीति के बारे में कहा कि देश में हो रक्षा उत्पाद विकसित करने की सोच रखते है। हमारे देश ने अब्दुल कलाम जैसे मिसाइल मैन देकर विश्व में धूम मचाई। हमारे देश की प्रतिभाओं को मौका मिले तो वे भी बहुत कुछ कर सकते है।