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Mahoba News: औद्योगिक गलियारा के लिए किसान भूमि देने को तैयार नहीं
Tue, 07 Nov 2023 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:06 AM IST
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महोबा। औद्योगिक गलियारे के लिए किसानों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ पहुंचे किसानों ने अतिरिक्त एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और कानपुर-सागर हाईवे किनारे कस्बा खन्ना के पास 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है। इधर सोमवार को किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में सेवाचरन, रोशनलाल, जयकरन, राममूरत, छिद्दू, रामआसरे, भैरम, राजाभइया, लालू, किशना, रामजीवन समेत 24 से अधिक किसानों ने अतिरिक्त एसडीएम मृत्युंजय मिश्रा को ज्ञापन सौंपा।
इसमें बताया कि उनकी भूमि कानपुर-सागर हाईवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे हैं। जिसमें वह खेती-किसानी करके परिवार का भरण-पोषण करते चले आ रहे हैं। इस समय उक्त भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित किए जाने की पहल चल रही है। अधिकारियों ने भूमि का चयन भी किया है। ऐसे में उनकी भूमि औद्योगिक गलियारा के लिए अधिग्रहीत की जाएगी। भूमि नहर के किनारे होने के चलते परिवार के भरण-पोषण का वही एक सहारा है। यदि, उनकी भूमि चली गई तो उनके सामने दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो जाएगी। उन्होंने अपनी भूमि किसी भी कीमत पर न देने की बात कही है।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और कानपुर-सागर हाईवे किनारे कस्बा खन्ना के पास 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है। इधर सोमवार को किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में सेवाचरन, रोशनलाल, जयकरन, राममूरत, छिद्दू, रामआसरे, भैरम, राजाभइया, लालू, किशना, रामजीवन समेत 24 से अधिक किसानों ने अतिरिक्त एसडीएम मृत्युंजय मिश्रा को ज्ञापन सौंपा।
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इसमें बताया कि उनकी भूमि कानपुर-सागर हाईवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे हैं। जिसमें वह खेती-किसानी करके परिवार का भरण-पोषण करते चले आ रहे हैं। इस समय उक्त भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित किए जाने की पहल चल रही है। अधिकारियों ने भूमि का चयन भी किया है। ऐसे में उनकी भूमि औद्योगिक गलियारा के लिए अधिग्रहीत की जाएगी। भूमि नहर के किनारे होने के चलते परिवार के भरण-पोषण का वही एक सहारा है। यदि, उनकी भूमि चली गई तो उनके सामने दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो जाएगी। उन्होंने अपनी भूमि किसी भी कीमत पर न देने की बात कही है।
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