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अफसरों ने आंखें फेरी, ग्रामीण खोदने लगे तालाब
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Wed, 18 May 2016 11:59 PM IST
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ग्रामीणों के ट्रैक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड के कश्मीर कहे जाने वाले नगर चरखारी में जहां करोड़ोें रुपया खर्च कर तालाबों की खुदाई का अभियान चल रहा है। वहीं खरेला कस्बे के ग्रामीणों ने श्रमदान और चंदा से तालाब की खुदाई का बीड़ा उठाया है। इस अभियान में बुंदेलखंड किसान यूनियन भी कूद पड़ी है। तालाबों के अस्तित्व को बचाने की शुरू हुई मुहिम की चारों ओर सराहना हो रही है।
सूखे के संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड के अधिकांश तालाब सूख गए है। जिन तालाबों में पानी है। वह तलहटी में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल जिले के तालाबों की खुदाई में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। महोबा शहर के दो और चरखारी कस्बे के आठ तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। वहीं कस्बा खरेला के तालाबों की खुदाई की लगातार उठ रही मांग की उपेक्षा से आहत ग्रामीणों से स्वयं श्रमदान से खुदाई का संकल्प लिया।
इसके लिए सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य महेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने बैठक कर रूपरेखा तैयार की। जिसमें तय किया गया कि प्रत्येक ग्रामीण आर्थिक सहयोग के साथ तालाब खुदाई में श्रमदान करेगा। कस्बा खरेला के प्राचीन कुसियारी तालाब की खुदाई का अभियान चंदा और श्रमदान से चल रहा है। सुबह शाम जहां ग्रामीण और समाजसेवी श्रमदान कर रहे हैं। वहीं दोपहर में नगर पंचायत से सहयोग के रूप में दी गई जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से मिट्टी फेंकी जा रही है।
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मुहिम में शामिल हुए बुंदेलखंड किसान यूनियन के संयोजक अवधेश द्विवेदी, संतोष श्रीवास्तव, भीष्मदेव तिवारी, रिपुसूदन द्विवेदी, चंद्रशेखर व्यास, भूपेंद्र सिंह, जितेंद्र त्रिपाठी आदि ने बताया कि तालाब खुदाई मेें श्रमदान करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। व्यापारियों के साथ समाजसेवी और नगर पंचायत सिद्घ गोपाल अहिरवार भी श्रमदान में सहयोग कर रहे हैं।
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सूखे के संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड के अधिकांश तालाब सूख गए है। जिन तालाबों में पानी है। वह तलहटी में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल जिले के तालाबों की खुदाई में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। महोबा शहर के दो और चरखारी कस्बे के आठ तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। वहीं कस्बा खरेला के तालाबों की खुदाई की लगातार उठ रही मांग की उपेक्षा से आहत ग्रामीणों से स्वयं श्रमदान से खुदाई का संकल्प लिया।
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इसके लिए सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य महेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने बैठक कर रूपरेखा तैयार की। जिसमें तय किया गया कि प्रत्येक ग्रामीण आर्थिक सहयोग के साथ तालाब खुदाई में श्रमदान करेगा। कस्बा खरेला के प्राचीन कुसियारी तालाब की खुदाई का अभियान चंदा और श्रमदान से चल रहा है। सुबह शाम जहां ग्रामीण और समाजसेवी श्रमदान कर रहे हैं। वहीं दोपहर में नगर पंचायत से सहयोग के रूप में दी गई जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से मिट्टी फेंकी जा रही है।
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मुहिम में शामिल हुए बुंदेलखंड किसान यूनियन के संयोजक अवधेश द्विवेदी, संतोष श्रीवास्तव, भीष्मदेव तिवारी, रिपुसूदन द्विवेदी, चंद्रशेखर व्यास, भूपेंद्र सिंह, जितेंद्र त्रिपाठी आदि ने बताया कि तालाब खुदाई मेें श्रमदान करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। व्यापारियों के साथ समाजसेवी और नगर पंचायत सिद्घ गोपाल अहिरवार भी श्रमदान में सहयोग कर रहे हैं।