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पानी से लबालब रहने वाले तालाबों में उड़ रही धूल
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:20 PM IST
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कीरत सागर तालाब में सब्जी उगाते किसान
- फोटो : अमर उजाला
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पानी से लबालब रहने वाले ऐतिहासिक एवं प्राचीन तालाब खुद प्यासे हैं। इनमें धूल उड़ रही है। मदन सागर से आधे शहर को पानी की आपूर्ति होती है। इसमें पानी सूख जाने से एक माह से पानी की आपूर्ति बंद है। तालाबों के साथ ही बांधों का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है। ऐसे में पानी को लेकर हालात और भयावह होने की आशंकाएं हैं।
बुंदेलखंड दैवी आपदा की चपेट में है। इस बार बरसात न होने से जलस्तर लगातार नीचे खिसक रहा है। पानी मुहैया करने वाले ऐतिहासिक व चंदेलकालीन तालाब सूख गए हैं। शहर के मदन सागर, कल्याण सागर, कीरत सागर तालाबों में धूल उड़ रही है। बांधों का जलस्तर भी कम हो रहा है। ऐतिहासिक मदन सागर तालाब जवाब दे गया है। यहां से शहर की आधी आबादी को पानी की आपूर्ति की जाती थी। तालाब सूखने से पानी की आपूर्ति ठप है। अब उर्मिल बांध से शहरियों को पानी मुहैया कराया जा रहा है।
पिछले दस सालों में पहली बार पेयजल का संकट विकट हुआ है। तालाबों में पिछले वर्षों तक मई जून में भी पानी नजर आता था । इस बार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही यह खेल का मैदान बन गए हैं। शासन के निर्देश पर बरसात से पूर्व कीरत सागर तालाब की खुदाई कराई गई थी। इससे कि तालाब की जल भंडारण क्षमता को बढ़ाया जा सके । बारिश न होेने से तालाब नहीं भर सके। इससे पानी की समस्या विकराल हो गई है।
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तालाब में किसान उगा रहे सब्जी
कीरत सागर तालाब सूख जाने से आधा दर्जन किसानों ने इसमें सब्जी की खेती शुरू कर दी है। इन्होंने दस फीट गहरा गड्ढा खोदकर पानी निकाल लिया है। इससे फसल की सिंचाई की जा रही है। फसल के चारों ओर तारबाड़ी भी लगाई गई है। तालाब की भूमि में किसान बैंगन, टमाटर, मिर्च, ककड़ी की पैदावार कर रहे हैं।
खतरे में तालाबों का वजूद
एक दशक से बेहतर बारिश न होने से तालाबों का वजूद खतरे में है। तालाबों पर कब्जे और कूड़ा कचरा फेंके जाने से चारों ओर वीरानी नजर आ रही है। समाजसेवी दाऊ तिवारी, शिवकुमार गोस्वामी बताते हैं कि पहले चंदेलकालीन तालाबों की नैसर्गिक सुंदरता देखने के लिए लोग खिंचे चले आते थे। अब ऐसा नहीं है।
2008 की याद हो सकती है ताजा
सन 2008 में भयानक सूखा पड़ा था। तब जिले के सभी तालाबों, बांधाें और नदियाें ने जवाब दे दिया था। प्रशासन ने प्यास बुझाने के लिए पंजाब से दूध के 20-20 हजार लीटर के टैंकर मंगाकर पानी की आपूर्ति कराई थी। गांव की गलियाें और सकरे मार्गों पर किराए पर बैलगाड़ियां व जीप गाड़ियंा लगाकर पानी पहुंचाने का काम किया गया था। इस साल भी ऐसे हालात बनने की आशंकाओं से लोग सहमे हुए हैं।
जिले में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। पानी मयस्सर कराने के सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। जहां पर पानी की समस्या आएगी, वहां टैंकरों से पानी भेजा जाएगा। 80 टैंकरों की खरीद के लिए आर्डर जारी कर दिया है। जल्द ही टैंकर मंगा लिए जाएंगे। हर गली कूंचे में पानी पहुंचाया जाएगा।
वीरेश्वर सिंह, जिलाधिकारी, महोबा
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बुंदेलखंड दैवी आपदा की चपेट में है। इस बार बरसात न होने से जलस्तर लगातार नीचे खिसक रहा है। पानी मुहैया करने वाले ऐतिहासिक व चंदेलकालीन तालाब सूख गए हैं। शहर के मदन सागर, कल्याण सागर, कीरत सागर तालाबों में धूल उड़ रही है। बांधों का जलस्तर भी कम हो रहा है। ऐतिहासिक मदन सागर तालाब जवाब दे गया है। यहां से शहर की आधी आबादी को पानी की आपूर्ति की जाती थी। तालाब सूखने से पानी की आपूर्ति ठप है। अब उर्मिल बांध से शहरियों को पानी मुहैया कराया जा रहा है।
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पिछले दस सालों में पहली बार पेयजल का संकट विकट हुआ है। तालाबों में पिछले वर्षों तक मई जून में भी पानी नजर आता था । इस बार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही यह खेल का मैदान बन गए हैं। शासन के निर्देश पर बरसात से पूर्व कीरत सागर तालाब की खुदाई कराई गई थी। इससे कि तालाब की जल भंडारण क्षमता को बढ़ाया जा सके । बारिश न होेने से तालाब नहीं भर सके। इससे पानी की समस्या विकराल हो गई है।
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तालाब में किसान उगा रहे सब्जी
कीरत सागर तालाब सूख जाने से आधा दर्जन किसानों ने इसमें सब्जी की खेती शुरू कर दी है। इन्होंने दस फीट गहरा गड्ढा खोदकर पानी निकाल लिया है। इससे फसल की सिंचाई की जा रही है। फसल के चारों ओर तारबाड़ी भी लगाई गई है। तालाब की भूमि में किसान बैंगन, टमाटर, मिर्च, ककड़ी की पैदावार कर रहे हैं।
खतरे में तालाबों का वजूद
एक दशक से बेहतर बारिश न होने से तालाबों का वजूद खतरे में है। तालाबों पर कब्जे और कूड़ा कचरा फेंके जाने से चारों ओर वीरानी नजर आ रही है। समाजसेवी दाऊ तिवारी, शिवकुमार गोस्वामी बताते हैं कि पहले चंदेलकालीन तालाबों की नैसर्गिक सुंदरता देखने के लिए लोग खिंचे चले आते थे। अब ऐसा नहीं है।
2008 की याद हो सकती है ताजा
सन 2008 में भयानक सूखा पड़ा था। तब जिले के सभी तालाबों, बांधाें और नदियाें ने जवाब दे दिया था। प्रशासन ने प्यास बुझाने के लिए पंजाब से दूध के 20-20 हजार लीटर के टैंकर मंगाकर पानी की आपूर्ति कराई थी। गांव की गलियाें और सकरे मार्गों पर किराए पर बैलगाड़ियां व जीप गाड़ियंा लगाकर पानी पहुंचाने का काम किया गया था। इस साल भी ऐसे हालात बनने की आशंकाओं से लोग सहमे हुए हैं।
जिले में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। पानी मयस्सर कराने के सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। जहां पर पानी की समस्या आएगी, वहां टैंकरों से पानी भेजा जाएगा। 80 टैंकरों की खरीद के लिए आर्डर जारी कर दिया है। जल्द ही टैंकर मंगा लिए जाएंगे। हर गली कूंचे में पानी पहुंचाया जाएगा।
वीरेश्वर सिंह, जिलाधिकारी, महोबा