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महोबाः कोरोना के चलते अबकी बार नहीं लगा शहीद मेला
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सूना पड़ा शहीद मेला स्थल
- फोटो : MAHOBA
महोबा। सोलह क्रांतिकारियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाला ऐतिहासिक शहीद मेला इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया। इतना ही नहीं पालिका प्रशासन ने इस वर्ष शहीद मेलास्थल की साफ-सफाई तक कराना जरूरी नहीं समझा। हवेली दरवाजा शहीद मैदान स्थल गंदगी से पटा पड़ा हुआ है।
ब्रिटिश हुकूमत में वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने 16 क्रांतिकारियों को हवेली दरवाजा मैदान पर लगे इमली के पेड़ पर लटका दिया था। तब से उनकी याद में हवेली मैदान पर शहीद मेले का आयोजन किया जा रहा है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि शहीदों का मेला हवेली दरवाजा मैदान पर कजली मेले के तीसरे दिन लगता है। मैदान से कजली मेले का विजय जुलूस निकलता है, लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते सारी परंपराएं टूट गईं हैं।
इतिहासकार डॉ. एलसी अनुरागी का कहना है कि शहीदों का मेला नहीं लगना था, लेकिन हर साल की तरह शहीद मैदान की साफ-सफाई और रंग-रोगन तो होना चाहिए था। उनके सम्मान में मैदान में दो दीपक ही जला दिए जाते तो अच्छा रहता। समाजसेवी शिवकिशोर पांडेय ने बताया कि यह मेला भी कजली मेले की तरह मातृभूमि के प्रति त्याग, समर्पण व बलिदान का प्रतीक है, इसलिए शहीदों के मेले को कजली के मेले से जोड़ा गया। इस मेले को गुदड़ी का मेला भी कहा जाता है।
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ब्रिटिश हुकूमत में वर्ष 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने 16 क्रांतिकारियों को हवेली दरवाजा मैदान पर लगे इमली के पेड़ पर लटका दिया था। तब से उनकी याद में हवेली मैदान पर शहीद मेले का आयोजन किया जा रहा है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि शहीदों का मेला हवेली दरवाजा मैदान पर कजली मेले के तीसरे दिन लगता है। मैदान से कजली मेले का विजय जुलूस निकलता है, लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते सारी परंपराएं टूट गईं हैं।
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इतिहासकार डॉ. एलसी अनुरागी का कहना है कि शहीदों का मेला नहीं लगना था, लेकिन हर साल की तरह शहीद मैदान की साफ-सफाई और रंग-रोगन तो होना चाहिए था। उनके सम्मान में मैदान में दो दीपक ही जला दिए जाते तो अच्छा रहता। समाजसेवी शिवकिशोर पांडेय ने बताया कि यह मेला भी कजली मेले की तरह मातृभूमि के प्रति त्याग, समर्पण व बलिदान का प्रतीक है, इसलिए शहीदों के मेले को कजली के मेले से जोड़ा गया। इस मेले को गुदड़ी का मेला भी कहा जाता है।
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