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दैवी आपदा ने छीना किसानों का निवाला

Fri, 24 Apr 2015 11:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा Updated Fri, 24 Apr 2015 11:41 PM IST
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Divine disaster mouthful shorn farmers
 दैवी आपदा ने किसानों की रोजी रोटी छीन ली है। हालत यह है कि किसान एक वक्त का ही भोजन कर रहा है, वहीं दूसरे वक्त में महुआ खाकर पेट भर रहा है। दैवी आपदा से पहले ही कर्ज से दबे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। आर्थिक स्थित खराब होने से किसान कान्वेंट स्कूलों से बच्चों के नाम कटवा रहे है। वहीं  90 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद होने से किसानों का बीज तक नहीं निकला है।
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जिले में 2.36 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसल की बुवाई की जाती है। इस साल किसानों ने 2,16,869 हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसल की बुवाई की थी। 63978 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, 59763 हेक्टेयर पर चना, 6983 हेक्टेयर पर सरसों, 45122 हेक्टेयर पर मटर, 23504 हेक्टेयर भूमि पर मसूर की फसल की बुवाई की गई थी। लेकिन इस साल ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से 90 प्रतिशत फसलें बर्र्बाद हो गईं। इससे किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट बढ़ गया है। ग्राम शाहपहाड़ी निवासी गफ्फार मोहम्मद, गोविंद, चांदो निवासी आरडी राजपूत, सरमन कुमार, रिवई निवासी रामप्रसाद, सुरहा निवासी विष्णु सहित तमाम किसानों ने बताया कि इस साल फसल बर्बाद हो जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पहले से कर्ज में डूबे इन किसानों ने अब बच्चाें का कान्वेंट स्कूलाें में न पढ़ाने का मन बना लिया है। साथ ही तमाम किसान महानगरों के लिए पलायन कर गए हैं।
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कृषि कार्य से नाता तोड़ रहे किसान
कभी सूखा, कभी ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से आजिज आ चुके तमाम किसानों ने कृषि कार्य से ही नाता तोड़ने का मन बना लिया है। किसान अब खेती को घाटे का सौदा मानने लगे हैं। कारण, साल भर मेहनत करने के बाद भी अच्छा उत्पादन नहीं मिल पा रहा है। उधर प्रकृति की मार अलग से झेलनी पड़ रही है। नतीजतन किसान साल दर साल कर्जदार होता जा रहा है। हालत यह है कि 95 फीसदी किसान कर्ज में डूबा हुआ है।
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नुकसान बटाईदार का, चेक जमीन मालिक को
दैवी आपदा से राहत दिलाने के लिए भले ही शासन प्रशासन ने किसानों की मदद की हो। लेकिन गरीब किसान जो कम जमीन होने के बाद बटाई पर जमीन लेकर बच्चों की परवरिश कर रहा है, उसके द्वारा खेतों में बीज, खाद और सिंचाई में डीजल का पैसा लगाने के साथ-साथ साल भर  तक हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद तैयार की गई फसल ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई है। गरीब बटाईदार किसान की मेहनत तो दूर खर्च भी नहीं निकला और खाद, बीज और सिंचाई में न खर्च करने वाले भूस्वामी को चेक मिल रही है। जिससे गरीब किसान और गरीब होता जा रहा है। नतीजतन अब बटाईदार भी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।


तहसीलवार प्रभावित गांव, भूमि और किसानों का विवरण
तहसील        गांव         भूमि हे. में      किसान
महोबा         133         84644       74315
चरखारी       116         50894       56763
कुलपहाड़        272       81331        84488
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