भक्तों ने मां कात्यायनी को पूजा
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महोबा। चैत्र नवरात्र पर्व के छठवें दिन श्रद्धालुओं ने माता कात्यायनी की आराधना कर मंदिरों में माथा टेका। नवरात्र पर चाराें ओर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। भक्ताें में पूजा अर्चना को लेकर गजब का उत्साह दिखाई दे रहा है। शक्तिपीठ बड़ी चंद्रिका और मां छोटी चंद्रिका मंदिरों में सुबह शाम होने वाली आरती में भक्त हिस्सा लेकर खुशहाली की कामना कर रहे है।नवरात्र पर्व पर शहर के 51 शक्तिपीठों में शामिल मां बड़ी चंद्रिका मंदिर, ऐतिहासिक छोटी चंद्रिका मंदिर, काली माता मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ, सिंहभवानी मंदिर, शारदा माता मंदिर, चंदेलकालीन चकौटा देवी मंदिर, महेश्वरीमाता मंदिर, शीतला माता मंदिर सहित तमाम मंदिरों में भोर से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो रात तक चलता रहता है। नवरात्र के छठवें दिन सुबह से ही अटूट आस्था लिए महिलाएं हाथों में पूजा की थाली और जुबान पर देवी गीतों को गुनगुनाती मंदिर पहुंची और विधि विधान से माता कात्यायनी की पूजा अर्चना, वंदना कर मनौती मानी और मां से सुख समृद्धि की कामना की।
नवरात्र पर जगह-जगह महिलाओं द्वारा ढोलक और मजीरा के साथ देवी गीत गीत गाए जा रहे है। मंदिरों में आरती के पहले महिलाएं देवी को भक्ति गीत से प्रसन्न कर रहीं है। इसके बाद मंदिरों में आरती होती है। आरती में सैकड़ों श्रद्धालु दोनों हाथ जोड़कर माता से मन्नतें मान रहे हैं। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। देवी मंदिरों में सुबह से भक्तों द्वारा कन्याभोज का आयोजन किया जा रहा है जिसमें हजारों की संख्या में कन्याएं प्रसाद चख रहीं हैं।
देवी मंदिरों और घरों में हो रहे अनुष्ठान
चैत्र नवरात्र पर मंदिरों से लेकर घरों तक मां की कृपा पाने के लिए भक्तों द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी चंद्रिका माता मंदिर में भक्तों और ब्राम्हणों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्रों का जाप, हवन आदि का आयोजक हो रहा है। गायत्री शक्तिपीठ में सुबह सात से प्रतिदिन पांच कुंडीय यज्ञ कराया जा रहा है। यज्ञ में आहुतियां देकर भक्त सुख समृद्धि की कामना कर रहे है। यहां पर सुबह शाम गायत्री मंत्र का मंत्रोच्चारण भी किया जा रहा है।
ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री हैं कात्यायनी देवी
बड़ी चंद्रिका के पुजारी चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि मां दुर्गा के छठवें रूप को माता कात्यायनी कहते हैं। ग्रंथों के अनुसार कत ऋषि के पुत्र कात्य थे। इनके गोत्र में महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए। कात्यायन ने माता दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए कठिन तप किया। उनकी पुत्री होने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां का दिव्य स्वरूप स्वर्ण के समान है। इनका वाहन शेर है। ये देवी ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी है।