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नामचीन खिलाड़ियों के हुनर का गवाह है डाक बंगला मैदान
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डाक बंगला मैदान की टूटी बाउंड्री
- फोटो : MAHOBA
महोबा। हॉकी के राष्ट्रीय मुकाबले की प्रति वर्ष मेजबानी करने वाला चरखारी का डाक बंगला मैदान सुविधाओं और संसाधनों का मोहताज है। सुविधाएं न होने से नगर की खेल प्रतिभाओं को हुनर निखारने का मौका नहीं मिल रहा है।
चरखारी में हर साल गोवर्धन नाथ मेले के अवसर पर अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन डाक बंगला मैदान में होता रहा है। हालांकि कोरोना काल के कारण दो साल ये आयोजन नहीं हो रही है।
मैदान में पर्याप्त जगह होने के बाद भी यहां ट्रेनर तो दूर खेलकूद को सिखाने के लिए संसाधन तक नहीं हैं। हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे वर्तमान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया कि हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी असलम शेर खां के खेल का गवाह यही मैदान है।
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उनके साथ देश की हाकी टीम के गौरव ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार, राजकुमार, गोविंद कुमार जैसे खिलाड़ी भी इसी मैदान में खेले है। बुंदेलखंड अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट इसी मैदान में होता रहा है, जिसमें देश भर की टीमें हर साल खेलती रहीं हैं। कोरोना काल में पिछले दो साल से प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हो रहीं हैं।
ध्यानचंद ने दी थी शाबाशी
पालिका अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया की इसी मैदान से तैयारी के बल पर मेरा 1974 में प्रदेश की टीम में चयन हो गया था, लेकिन समय पर सूचना न मिलने से टीम में शामिल नहीं हो पाया। इसका अब तक मलाल है। देश की टीम के गौरव दादा ध्यानचंद ने 1970 में जालौन और 1971 में बांदा मुख्यालय में हुए मैच में मेरे खेल के तरीके पर नजदीक आकर शाबाशी दी थी।
सुविधा और संसाधन की कमी
हॉकी खिलाड़ी और अखिल भारती हॉकी टूर्नामेंट आयोजन समिति महासचिव सादिक इस्लाम ने बताया डाक बंगला मैदान युवा वर्ग के खेलकूद का बड़ा आधार बन सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा के उपकरण और कोच की व्यवस्था हो जाए तो गांव की प्रतिभाओं को भी अवसर मिलने लगेगा जो देश स्तर पर पहचान बना सकते है।
स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच तैयारी कर रहे खिलाड़ी
जिले में एकमात्र स्पोर्ट्स स्टेडियम हैं। यहां रोजाना खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बेहतर सुविधाएं न मिल पाने से वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मैदान में रोजाना फुटबाल, हाकी, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बैडमिंटन, वॉलीबाल, बास्केट बाल, लॉन टेनिस, जिमनेजियम के खिलाड़ी आते हैं। स्टेडियम में खिलाड़ी खुद से ही तैयारी कर रहे हैं। जिसमें क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स, वॉलीबाल, बॉस्केट बाल, लान टेनिस, टीटी हाल के लिए कोई भी कोच नहीं हैं, जिससे खिलाड़ियों में मायूसी है।
उप क्रीड़ाधिकारी रामचंद्र ने बताया कि स्पोर्ट्स स्टेडियम में फुटबाल, बैडमिंटन और जिमनेजियम के कोच हैं। अन्य विधा के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन के लिए कोच उपलब्ध नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
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चरखारी में हर साल गोवर्धन नाथ मेले के अवसर पर अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन डाक बंगला मैदान में होता रहा है। हालांकि कोरोना काल के कारण दो साल ये आयोजन नहीं हो रही है।
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मैदान में पर्याप्त जगह होने के बाद भी यहां ट्रेनर तो दूर खेलकूद को सिखाने के लिए संसाधन तक नहीं हैं। हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे वर्तमान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया कि हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी असलम शेर खां के खेल का गवाह यही मैदान है।
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उनके साथ देश की हाकी टीम के गौरव ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार, राजकुमार, गोविंद कुमार जैसे खिलाड़ी भी इसी मैदान में खेले है। बुंदेलखंड अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट इसी मैदान में होता रहा है, जिसमें देश भर की टीमें हर साल खेलती रहीं हैं। कोरोना काल में पिछले दो साल से प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हो रहीं हैं।
ध्यानचंद ने दी थी शाबाशी
पालिका अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया की इसी मैदान से तैयारी के बल पर मेरा 1974 में प्रदेश की टीम में चयन हो गया था, लेकिन समय पर सूचना न मिलने से टीम में शामिल नहीं हो पाया। इसका अब तक मलाल है। देश की टीम के गौरव दादा ध्यानचंद ने 1970 में जालौन और 1971 में बांदा मुख्यालय में हुए मैच में मेरे खेल के तरीके पर नजदीक आकर शाबाशी दी थी।
सुविधा और संसाधन की कमी
हॉकी खिलाड़ी और अखिल भारती हॉकी टूर्नामेंट आयोजन समिति महासचिव सादिक इस्लाम ने बताया डाक बंगला मैदान युवा वर्ग के खेलकूद का बड़ा आधार बन सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा के उपकरण और कोच की व्यवस्था हो जाए तो गांव की प्रतिभाओं को भी अवसर मिलने लगेगा जो देश स्तर पर पहचान बना सकते है।
स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच तैयारी कर रहे खिलाड़ी
जिले में एकमात्र स्पोर्ट्स स्टेडियम हैं। यहां रोजाना खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बेहतर सुविधाएं न मिल पाने से वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मैदान में रोजाना फुटबाल, हाकी, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बैडमिंटन, वॉलीबाल, बास्केट बाल, लॉन टेनिस, जिमनेजियम के खिलाड़ी आते हैं। स्टेडियम में खिलाड़ी खुद से ही तैयारी कर रहे हैं। जिसमें क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स, वॉलीबाल, बॉस्केट बाल, लान टेनिस, टीटी हाल के लिए कोई भी कोच नहीं हैं, जिससे खिलाड़ियों में मायूसी है।
उप क्रीड़ाधिकारी रामचंद्र ने बताया कि स्पोर्ट्स स्टेडियम में फुटबाल, बैडमिंटन और जिमनेजियम के कोच हैं। अन्य विधा के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन के लिए कोच उपलब्ध नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।

मूलचंद्र अनुरागी- फोटो : MAHOBA

सादिक इस्लाम- फोटो : MAHOBA

रामचंद्र- फोटो : MAHOBA