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विस्फोटक सामग्री रखने पर दो को पांच साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Tue, 17 Jan 2017 10:30 PM IST
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अपर जिला सत्र न्यायाधीश (एफटीसी 2016) महेंद्र सिंह यादव ने विस्फोटक सामग्री रखने के आरोप में दो लोगों को पांच पांच साल की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया।
कस्बा श्रीनगर में छह मई 2015 को पुलिस सब इंस्पेक्टर चंद्रहास मिश्र शाम को करीब आठ बजे गश्त पर थे। तभी दो ट्रैक्टरों से विस्फोटक सामग्री आने की सूचना मिलने पर एसआई बेलाताल तिराहे पर चेकिंग करने लगे। उसी समय सामने से आ रहे ट्रैक्टर सवार दो लोग पुलिस को देखकर बोरी लेकर भागने लगे।
पुलिस ने दौड़कर दोनों को दबोच लिया। उसके पास से 27 जिलेटिन छडे़ं और 21 डेटोनेटर और पचास पचास मीटर लंबा तार बरामद किया था। आरोपी में एक ने अपना नाम मुकेश तिवारी पुत्र हरिश्चंद्र निवासी लेवा थाना श्रीनगर बताया। दूसरे ने अपना नाम उत्तम पुत्र हजारी लाल निवासी मझगवां बताया था। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था।
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मंगलवार को न्यायाधीश एडीजे ने दोनों पक्षों की गवाह और बहस सुनने के बाद दोनों को दोषी ठहराते हुए पांच पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही दस दस हजार का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर आरोपियों को तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
इस मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की। अदालत ने आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया।
कस्बा श्रीनगर में छह मई 2015 को पुलिस सब इंस्पेक्टर चंद्रहास मिश्र शाम को करीब आठ बजे गश्त पर थे। तभी दो ट्रैक्टरों से विस्फोटक सामग्री आने की सूचना मिलने पर एसआई बेलाताल तिराहे पर चेकिंग करने लगे। उसी समय सामने से आ रहे ट्रैक्टर सवार दो लोग पुलिस को देखकर बोरी लेकर भागने लगे।
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पुलिस ने दौड़कर दोनों को दबोच लिया। उसके पास से 27 जिलेटिन छडे़ं और 21 डेटोनेटर और पचास पचास मीटर लंबा तार बरामद किया था। आरोपी में एक ने अपना नाम मुकेश तिवारी पुत्र हरिश्चंद्र निवासी लेवा थाना श्रीनगर बताया। दूसरे ने अपना नाम उत्तम पुत्र हजारी लाल निवासी मझगवां बताया था। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था।
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मंगलवार को न्यायाधीश एडीजे ने दोनों पक्षों की गवाह और बहस सुनने के बाद दोनों को दोषी ठहराते हुए पांच पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही दस दस हजार का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर आरोपियों को तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
इस मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की। अदालत ने आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया।