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छह करोड़ के कर्ज में दो भाइयों की संपति जब्त
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:54 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। कोल्ड स्टोरेज के नाम पर इलाहाबाद बैंक उरई से 2.40 करोड़ रुपये लोन लेने के बाद कर्जदार फरार हो गए। न तो इन लोगों ने कोल्ड स्टोरेज बनाया और न ही बैंक की एक भी किस्त अदा की। रविवार को अपर जिला मजिस्ट्रेट महोबा के आदेश पर कर्जदारों की जिला मुख्यालय में हाईवे पर बनी दो दुकानें खाली कराकर प्रशासनिक अधिकारियों ने बैंक के सुपुर्द कर दी।
ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव और उनकी पत्नी अर्चना श्रीवास्तव ने झांसी रोड उरई का पता दिखाकर कोल्ड स्टोरेज एग्रो इंड्रस्टीज के नाम पर और उसके भाई राजेंद्र श्रीवास्तव ने महोबा का पता दिखाकर मां गंगा कोल्ड इंड्रस्ट्रीज के नाम पर 2011 में 2.40 करोड़ रुपये का लोन इलाहाबाद बैंक उरई से लिया था।
किस्त न देने पर लोन की राशि बढ़कर करीब छह करोड़ हो गई है। एक भी किस्त जमा न होने पर इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक ने अपर जिला मजिस्ट्रेट महोबा की अदालत में कर्जदार की संपत्ति बैंक के पक्ष में कराने के लिए रिट दायर की थी। इस पर अपर जिला मजिस्ट्रेट ने डिफाल्टर हो चुके कर्जदारों की संपत्ति बैंक के पक्ष में कर दी। साथ ही पुलिस को कब्जा दिलाने के भी आदेश दिए थे।
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रविवार को न्यायालय के आदेश पर नायब तहसीलदार महोबा कर्मवीर सिंह, कोतवाली प्रभारी उमेश यादव पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। कर्जदारों की दो बड़ी दुकानों से किरायेदारों का दुकानों का सामान बाहर कराया और इसके पीछे पड़े प्लाट पर बैंक को कब्जा दिलाया। पुलिस फोर्स के चलते किरायेदार विरोध नहीं कर सके और दुकानें खाली कर दी।
इलाहाबाद बैंक उरई के प्रबंधक अजय शुक्ला ने बताया कि कर्जदारों द्वारा एक भी किस्त जमा न करने पर संपत्ति के बैंक के पक्ष में कराने के लिए अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमा दायर किया था।
न्यायालय में बैंक के पक्ष में आदेश जारी करते हुए दुकानें खाली कराने के निर्देश दिए थे। नायब तहसीलदार कर्मवीर का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर दुकानदार रविंद्र वर्मा से दुकानें खाली कराकर कब्जा बैंक को दिलाया गया है।
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महोबा। कोल्ड स्टोरेज के नाम पर इलाहाबाद बैंक उरई से 2.40 करोड़ रुपये लोन लेने के बाद कर्जदार फरार हो गए। न तो इन लोगों ने कोल्ड स्टोरेज बनाया और न ही बैंक की एक भी किस्त अदा की। रविवार को अपर जिला मजिस्ट्रेट महोबा के आदेश पर कर्जदारों की जिला मुख्यालय में हाईवे पर बनी दो दुकानें खाली कराकर प्रशासनिक अधिकारियों ने बैंक के सुपुर्द कर दी।
ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव और उनकी पत्नी अर्चना श्रीवास्तव ने झांसी रोड उरई का पता दिखाकर कोल्ड स्टोरेज एग्रो इंड्रस्टीज के नाम पर और उसके भाई राजेंद्र श्रीवास्तव ने महोबा का पता दिखाकर मां गंगा कोल्ड इंड्रस्ट्रीज के नाम पर 2011 में 2.40 करोड़ रुपये का लोन इलाहाबाद बैंक उरई से लिया था।
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किस्त न देने पर लोन की राशि बढ़कर करीब छह करोड़ हो गई है। एक भी किस्त जमा न होने पर इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक ने अपर जिला मजिस्ट्रेट महोबा की अदालत में कर्जदार की संपत्ति बैंक के पक्ष में कराने के लिए रिट दायर की थी। इस पर अपर जिला मजिस्ट्रेट ने डिफाल्टर हो चुके कर्जदारों की संपत्ति बैंक के पक्ष में कर दी। साथ ही पुलिस को कब्जा दिलाने के भी आदेश दिए थे।
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रविवार को न्यायालय के आदेश पर नायब तहसीलदार महोबा कर्मवीर सिंह, कोतवाली प्रभारी उमेश यादव पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। कर्जदारों की दो बड़ी दुकानों से किरायेदारों का दुकानों का सामान बाहर कराया और इसके पीछे पड़े प्लाट पर बैंक को कब्जा दिलाया। पुलिस फोर्स के चलते किरायेदार विरोध नहीं कर सके और दुकानें खाली कर दी।
इलाहाबाद बैंक उरई के प्रबंधक अजय शुक्ला ने बताया कि कर्जदारों द्वारा एक भी किस्त जमा न करने पर संपत्ति के बैंक के पक्ष में कराने के लिए अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमा दायर किया था।
न्यायालय में बैंक के पक्ष में आदेश जारी करते हुए दुकानें खाली कराने के निर्देश दिए थे। नायब तहसीलदार कर्मवीर का कहना है कि न्यायालय के आदेश पर दुकानदार रविंद्र वर्मा से दुकानें खाली कराकर कब्जा बैंक को दिलाया गया है।