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दहेज हत्या में पति को 10 वर्ष की कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Thu, 16 Feb 2017 10:40 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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फास्ट ट्रैक कोर्ट 2016 के अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने दहेज हत्या के मामले में पति को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दो हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। इसी मामले में छह माह पहले अदालत ने सास, ससुर समेत पांच लोगों को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई है।
थाना श्रीनगर के गांव अतरारमाफ निवासी भुमानीदीन अहिरवार पुत्र राजाराम ने अपनी पुत्री गायत्री की शादी 18 मई 2003 को कोतवाली क्षेत्र के गांव नथुपुरा निवासी चरन पुत्र ठाकुरदास के साथ की थी। शादी के बाद ससुरालीजन दहेज में बाइक व अन्य वस्तुओं की मांग को लेकर गायत्री को प्रताड़ित करने लगे।
पांच नवंबर 2003 को ससुरालीजनों ने गायत्री की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद ससुरालीजनों ने पुलिस व ग्रामीणों को घर में लूटपाट के इरादे से बदमाश घुसने और महिला की हत्या किए जाने की जानकारी दी थी। सूचना पर मृतका के पिता भुमानीदीन ने थाना श्रीनगर में पति समेत छह लोगों पर पुत्री का हत्या किए जाने का मुकदमा दर्ज कराया था।
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पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चरन को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में चरन की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त किया गया धारदार हथियार बरामद किया था। गिरफ्तारी के बाद चरन मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया था। तब उसे बनारस जेल भेज दिया गया था।
अदालत ने जुलाई 2016 में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ससुर ठाकुरदास, सास किसिया, जेठ नंदकिशोर व महेश तथा चचिया ससुर स्वामीदीन को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई थी। दो माह पहले मानसिक रूप से ठीक होकर महोबा जेल आए पति चरन के मामले की सुनवाई गुरुवार को की गई।
न्यायाधीश महेंद्र सिंह यादव ने आरोप सिद्ध होने पर चरन को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो हजार रुपये का जुर्माना ठाेंका। मुकदमे की पैरवेी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की।
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थाना श्रीनगर के गांव अतरारमाफ निवासी भुमानीदीन अहिरवार पुत्र राजाराम ने अपनी पुत्री गायत्री की शादी 18 मई 2003 को कोतवाली क्षेत्र के गांव नथुपुरा निवासी चरन पुत्र ठाकुरदास के साथ की थी। शादी के बाद ससुरालीजन दहेज में बाइक व अन्य वस्तुओं की मांग को लेकर गायत्री को प्रताड़ित करने लगे।
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पांच नवंबर 2003 को ससुरालीजनों ने गायत्री की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद ससुरालीजनों ने पुलिस व ग्रामीणों को घर में लूटपाट के इरादे से बदमाश घुसने और महिला की हत्या किए जाने की जानकारी दी थी। सूचना पर मृतका के पिता भुमानीदीन ने थाना श्रीनगर में पति समेत छह लोगों पर पुत्री का हत्या किए जाने का मुकदमा दर्ज कराया था।
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पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चरन को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में चरन की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त किया गया धारदार हथियार बरामद किया था। गिरफ्तारी के बाद चरन मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया था। तब उसे बनारस जेल भेज दिया गया था।
अदालत ने जुलाई 2016 में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ससुर ठाकुरदास, सास किसिया, जेठ नंदकिशोर व महेश तथा चचिया ससुर स्वामीदीन को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई थी। दो माह पहले मानसिक रूप से ठीक होकर महोबा जेल आए पति चरन के मामले की सुनवाई गुरुवार को की गई।
न्यायाधीश महेंद्र सिंह यादव ने आरोप सिद्ध होने पर चरन को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो हजार रुपये का जुर्माना ठाेंका। मुकदमे की पैरवेी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की।