{"_id":"5ff356d58ebc3e3c4c2fdc72","slug":"covid-and-malaria-mahoba-news-knp604001333","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना संक्रमण के बीच मलेरिया मरीजों में आई 90 फीसदी कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना संक्रमण के बीच मलेरिया मरीजों में आई 90 फीसदी कमी
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महोबा। कोरोना संक्रमण के दौरान विभिन्न संक्रामक रोगों में भारी कमी दर्ज की गई है। लॉकडाउन व साफ-सफाई के प्रति जागरुकता बढ़ने से पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मलेरिया व डेंगू के मरीज बेहद कम मिले। कोरोना संक्रमण के दौरान लगातार सैनिटाइजेशन व खानपान बेहतर होना इसकी मुख्य वजह है। इसीलिए मलेरिया मरीजों में 90 फीसदी की कमी आई है।
वर्ष 2019 में जिले में मलेरिया के 48 और डेंगू के 7 मरीज मिले थे, जबकि वर्ष 2020 में इन मरीजों की संख्या घट गई है। वर्ष 2020 में मलेरिया के महज 4 मरीज ही सामने आए, जबकि 5 मरीज डेंगू बीमारी के मिले। जिला मलेरिया अधिकारी आरपी निरंजन ने बताया कि लोगों की रैपिड किट से टेस्टिंग की गई। जो लोग पॉजिटिव पाए गए, उन्हें दवाइयां देकर मॉनीटरिंग कराई गई। कोरोना संक्रमण के चलते लगातार जागरुकता अभियान चले। इससे लोगों ने बेहतर साफ-सफाई के साथ खानपान का भी बेहतर ध्यान रखा। इसके चलते मलेरिया व डेंगू का संक्रमण नियंत्रित रहा।
सीएमओ डॉ. मनोज कांत सिन्हा का कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही मलेरिया की बीमारी शुरू हो जाती है। यह खतरा जून से सितंबर तक रहता है। जगह-जगह जलभराव के चलते मच्छरों की संख्या बढ़ती है। बताया कि मच्छर अपने जीवन काल में 18 दिन ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। मच्छर की लाइफ 28 से 32 दिनों की होती है। इतने समय में भी करीब 10 दिन उसके अंडे से मच्छर बनने में लग जाते हैं। यदि कोई मच्छर मलेरिया संक्रमित है तो वह जिसको भी काटेगा उसे संक्रमित कर सकता है।
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वर्ष 2019 में जिले में मलेरिया के 48 और डेंगू के 7 मरीज मिले थे, जबकि वर्ष 2020 में इन मरीजों की संख्या घट गई है। वर्ष 2020 में मलेरिया के महज 4 मरीज ही सामने आए, जबकि 5 मरीज डेंगू बीमारी के मिले। जिला मलेरिया अधिकारी आरपी निरंजन ने बताया कि लोगों की रैपिड किट से टेस्टिंग की गई। जो लोग पॉजिटिव पाए गए, उन्हें दवाइयां देकर मॉनीटरिंग कराई गई। कोरोना संक्रमण के चलते लगातार जागरुकता अभियान चले। इससे लोगों ने बेहतर साफ-सफाई के साथ खानपान का भी बेहतर ध्यान रखा। इसके चलते मलेरिया व डेंगू का संक्रमण नियंत्रित रहा।
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सीएमओ डॉ. मनोज कांत सिन्हा का कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही मलेरिया की बीमारी शुरू हो जाती है। यह खतरा जून से सितंबर तक रहता है। जगह-जगह जलभराव के चलते मच्छरों की संख्या बढ़ती है। बताया कि मच्छर अपने जीवन काल में 18 दिन ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। मच्छर की लाइफ 28 से 32 दिनों की होती है। इतने समय में भी करीब 10 दिन उसके अंडे से मच्छर बनने में लग जाते हैं। यदि कोई मच्छर मलेरिया संक्रमित है तो वह जिसको भी काटेगा उसे संक्रमित कर सकता है।
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