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Mahoba News: प्याज के मुनाफे से खुशी के आंसू
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खेत में लगी प्याज की फसल दिखाता किसान कामता प्रसाद।
- फोटो : MAHOBA
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बेलाताल (महोबा)। जैतपुर के लमौरा गांव के किसान कामता प्रसाद कुशवाहा ने बंजर भूमि में सब्जी की पैदावार कर मिसाल कायम की है। चार बीघा भूमि में पारंपरिक खेती से सालभर के लिए खाद्यान्न का इंतजाम मुश्किल से हो पाता था। वहीं अब टमाटर व प्याज की खेती से कामता के जीवन में खुशहाली आई है। प्रति माह वह 20 से 25 हजार रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। नई तकनीक से कामता की खेती देख अन्य किसान भी जागरूक हो रहे हैं।
कामता प्रसाद के पास चार बीघा भूमि में खेती के अलावा आय का कोई साधन नहीं था। वह साल में एक बार ही भूमि से गेहूं और चना की उपज ले पाते थे। इससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। दो साल पहले कामता ने कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिकों से संपर्क कर नई तकनीक से फसल की पैदावार की जानकारी ली। इसके बाद खेतों मे टमाटर व प्याज लगाई। नई तकनीक से खेती करने पर कामता प्रसाद को बेहतर मुनाफा हुआ।
किसान ने बताया कि एक बीघा में प्याज लगाने में 10 हजार रुपये की लागत आई और 35 हजार रुपये का लाभ हुआ। डीजल से सिंचाई करने में लागत बढ़ जाती थी। उसने इस वर्ष अनुदान के तहत सौर ऊर्जा प्लांट लगवाया। प्याज की फसल का बेहतर उत्पादन करने पर उसे कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है। उसके तीन बेटे हैं। बड़ा पुत्र राहुल बीए और दो छोटे पुत्र हाईस्कूल में पढ़ रहे हैं।
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कामता प्रसाद के पास चार बीघा भूमि में खेती के अलावा आय का कोई साधन नहीं था। वह साल में एक बार ही भूमि से गेहूं और चना की उपज ले पाते थे। इससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। दो साल पहले कामता ने कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिकों से संपर्क कर नई तकनीक से फसल की पैदावार की जानकारी ली। इसके बाद खेतों मे टमाटर व प्याज लगाई। नई तकनीक से खेती करने पर कामता प्रसाद को बेहतर मुनाफा हुआ।
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किसान ने बताया कि एक बीघा में प्याज लगाने में 10 हजार रुपये की लागत आई और 35 हजार रुपये का लाभ हुआ। डीजल से सिंचाई करने में लागत बढ़ जाती थी। उसने इस वर्ष अनुदान के तहत सौर ऊर्जा प्लांट लगवाया। प्याज की फसल का बेहतर उत्पादन करने पर उसे कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है। उसके तीन बेटे हैं। बड़ा पुत्र राहुल बीए और दो छोटे पुत्र हाईस्कूल में पढ़ रहे हैं।
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