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चंदेल कालीन वर्मा तालाब की भी हो खुदाई
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sun, 22 May 2016 11:23 PM IST
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अस्तित्व खोता जा रहा है बर्मा तालाब
- फोटो : अमर उजाला
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नौवीं शताब्दी में चंदेल शासक राजा चंद्रवर्मन ने बर्मा तालाब का निर्माण कराया। अब बढ़ते अतिक्रमण और क्रेशरों का मलवा डाले जाने के कारण तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। कस्बे के लोगों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस प्राचीन तालाब की खुदाई कराने की मांग की है।
कस्बे काप्राचीन ऐतिहासिक चंदेल कालीन तालाब का निर्माण एक हजार वर्ष पूर्व चंदेल शासकों ने कराया था। इस तालाब का जल संग्रहण क्षेत्र 60 एकड़ से अधिक है। इस तालाब के एक तरफ प्राचीन पत्थरों के शिलालेखों में देवी देवताओं की मूर्तियां उभारकर तट बंधों को खूबसूरती के साथ विद्यमान किया गया है, ताकि लोग पूजा-अर्चना कर सकें। साथ ही ये शिलालेख चंदेल कालीन राज्य के गौरवशाली इतिहास को भी दर्शाते हैं।
तालाबों की खुदाई के बारे में कस्बे के समाजसेवी राजेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि प्राचीन तालाब का अधिकांश एरिया दबंगों ने कब्जा कर रखा है। जोगिन तालाब में भी लोगों का कब्जा है। पूरे तालाब को पहाड़ के मलवा से पाटकर क्रिकेट का मैदान बना दिया गया है। इसके बाद भी किसी भी जनप्रतिनिधि ने तालाबों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया। गहोई धर्मशाला में आयोजित व्यापारियों की बैठक में राजेंद्र पांडेय ने कहा कि यदि हम जल्द तालाबों के संरक्षण पर ध्यान नहीं देंगे तो ये प्राचीन धरोहर समाप्त हो जाएंगी।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि सूबे के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तालाबों की खुदाई कराने की मांग की जाएगी। बैठक में महेश तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, राजकुमार तिवारी, शिवशंकर त्रिपाठी, राजेंद्र बाबू, दुर्गेश, कल्लू विश्वकर्मा आदि रहे।
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कस्बे काप्राचीन ऐतिहासिक चंदेल कालीन तालाब का निर्माण एक हजार वर्ष पूर्व चंदेल शासकों ने कराया था। इस तालाब का जल संग्रहण क्षेत्र 60 एकड़ से अधिक है। इस तालाब के एक तरफ प्राचीन पत्थरों के शिलालेखों में देवी देवताओं की मूर्तियां उभारकर तट बंधों को खूबसूरती के साथ विद्यमान किया गया है, ताकि लोग पूजा-अर्चना कर सकें। साथ ही ये शिलालेख चंदेल कालीन राज्य के गौरवशाली इतिहास को भी दर्शाते हैं।
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तालाबों की खुदाई के बारे में कस्बे के समाजसेवी राजेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि प्राचीन तालाब का अधिकांश एरिया दबंगों ने कब्जा कर रखा है। जोगिन तालाब में भी लोगों का कब्जा है। पूरे तालाब को पहाड़ के मलवा से पाटकर क्रिकेट का मैदान बना दिया गया है। इसके बाद भी किसी भी जनप्रतिनिधि ने तालाबों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया। गहोई धर्मशाला में आयोजित व्यापारियों की बैठक में राजेंद्र पांडेय ने कहा कि यदि हम जल्द तालाबों के संरक्षण पर ध्यान नहीं देंगे तो ये प्राचीन धरोहर समाप्त हो जाएंगी।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि सूबे के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तालाबों की खुदाई कराने की मांग की जाएगी। बैठक में महेश तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, राजकुमार तिवारी, शिवशंकर त्रिपाठी, राजेंद्र बाबू, दुर्गेश, कल्लू विश्वकर्मा आदि रहे।