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आर्थिक तंगी ने ली अधेड़ की जान
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Fri, 14 Oct 2016 10:27 PM IST
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आर्थिक तंगी ने एक और अधेड़ की जान ले ली। उसकी बेटी ने उसके इलाज में मंगलसूत्र सहित सभी गहने बेच दिए लेकिन, पिता की जान नहीं बचा सकी। एक हफ्ते से जिला अस्पताल में भर्ती अधेड़ जिंदगी और मौत से जूझता रहा। शुक्रवार की शाम उसकी मौत हो गई। कस्बा कबरई के मोहल्ला सुभाष नगर
निवासी शंकर (55) पुत्र कल्लू नामदेव घर पर सिलाई मशीन रख कर कपड़े सिलने का काम करता था। सिलाई में होने वाली आमदनी से वह परिवार का भरण पोषण करता था। शंकर के दो पुत्र रवि व राजा भी सिलाई के काम में सहयोग करते थे। शंकर ने अपनी बेटी रूबी की शादी जनपद झांसी के ग्राम
करहरा में की थी। एक माह पहले शंकर बीमार हो गया। परिजनों ने उसका कई इलाज प्राइवेट क्लीनिकों में कराया लेकिन आराम नहीं मिला। पिता के बीमार होने पर ससुराल से मायके आई रूबी ने बेहतर इलाज कराने के लिए अपना मंगलसूत्र, पायल, बिछिया व नाक की कील बेच दी। बेचे गए जेवर से
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मिले पैसों से परिजन शंकर को इलाज के लिए छतरपुर ले गए। लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला और पैसे खर्च हो गए। तब परिजन शंकर को जिला अस्पताल ले गए। एक सप्ताह पहले शंकर को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। डाक्टरों ने शंकर को झांसी ले जाने की सलाह दी।
लेकिन पैसे का इंतजाम न होने से परिजन उसका इलाज जिला अस्पताल में ही कराते रहे। शुक्रवार की शाम शंकर की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल रहा। मृतक शंकर की पत्नी मीना ने बताया कि घर में जो कुछ था। वह पति के इलाज में खर्च हो गया लेकिन जान नहीं बच सकी।
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निवासी शंकर (55) पुत्र कल्लू नामदेव घर पर सिलाई मशीन रख कर कपड़े सिलने का काम करता था। सिलाई में होने वाली आमदनी से वह परिवार का भरण पोषण करता था। शंकर के दो पुत्र रवि व राजा भी सिलाई के काम में सहयोग करते थे। शंकर ने अपनी बेटी रूबी की शादी जनपद झांसी के ग्राम
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करहरा में की थी। एक माह पहले शंकर बीमार हो गया। परिजनों ने उसका कई इलाज प्राइवेट क्लीनिकों में कराया लेकिन आराम नहीं मिला। पिता के बीमार होने पर ससुराल से मायके आई रूबी ने बेहतर इलाज कराने के लिए अपना मंगलसूत्र, पायल, बिछिया व नाक की कील बेच दी। बेचे गए जेवर से
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मिले पैसों से परिजन शंकर को इलाज के लिए छतरपुर ले गए। लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला और पैसे खर्च हो गए। तब परिजन शंकर को जिला अस्पताल ले गए। एक सप्ताह पहले शंकर को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। डाक्टरों ने शंकर को झांसी ले जाने की सलाह दी।
लेकिन पैसे का इंतजाम न होने से परिजन उसका इलाज जिला अस्पताल में ही कराते रहे। शुक्रवार की शाम शंकर की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल रहा। मृतक शंकर की पत्नी मीना ने बताया कि घर में जो कुछ था। वह पति के इलाज में खर्च हो गया लेकिन जान नहीं बच सकी।