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Mahoba News: वट सावित्री की पूजा कर सुहागिनों ने मांगा अखंड सौभाग्य
Fri, 07 Jun 2024 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Fri, 07 Jun 2024 12:18 AM IST
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महोबा। सुहागिन महिलाओं ने गुरुवार को वट सावित्री का व्रत रखकर अखंड सौभाग्य की कामना की। वट वृक्ष के नीचे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिक्रमा लगाई। पूरे दिन मंदिरों और वट वृक्ष के नीचे महिलाओं के आने-जाने का सिलसिला चलता है।
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर सौभाग्यवती महिलाएं वट सावित्री व्रत पति की दीर्घायु व अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। वट सावित्री व्रत को लेकर भोर से महिलाओं ने स्नान-ध्यान कर नए वस्त्र पहनें। समूह में महिलाएं मंदिर और वट वृक्ष के पास पहुंचीं। कच्चे सूत से 108 बार वट वृक्ष की परिक्रमा लगाई। इसके बाद धूप, दीप, अक्षत, हल्दी, पान, सुपारी, फल समेत अन्य पूजा सामग्री अर्पित की।
सुहागिनों ने पूजास्थल पर बैठकर सावित्री व सत्यवान की कथा सुनी। बाद में पति की दीर्घायु और परिवार की कुशलता की प्रार्थना की। पूरे दिन वट वृक्ष के पास चहल-पहल बनी रही। ज्योतिषाचार्य पंडित भरत त्रिपाठी ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री ने पतिव्रत धर्म से अपने मृत पति सत्यवान को पुन: जीवित कर अखंड सौभाग्यवती का वरदान पाया था। तभी से सुहागिनें वट सावित्री का व्रत रखते चली आ रहीं हैं।
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ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर सौभाग्यवती महिलाएं वट सावित्री व्रत पति की दीर्घायु व अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। वट सावित्री व्रत को लेकर भोर से महिलाओं ने स्नान-ध्यान कर नए वस्त्र पहनें। समूह में महिलाएं मंदिर और वट वृक्ष के पास पहुंचीं। कच्चे सूत से 108 बार वट वृक्ष की परिक्रमा लगाई। इसके बाद धूप, दीप, अक्षत, हल्दी, पान, सुपारी, फल समेत अन्य पूजा सामग्री अर्पित की।
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सुहागिनों ने पूजास्थल पर बैठकर सावित्री व सत्यवान की कथा सुनी। बाद में पति की दीर्घायु और परिवार की कुशलता की प्रार्थना की। पूरे दिन वट वृक्ष के पास चहल-पहल बनी रही। ज्योतिषाचार्य पंडित भरत त्रिपाठी ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री ने पतिव्रत धर्म से अपने मृत पति सत्यवान को पुन: जीवित कर अखंड सौभाग्यवती का वरदान पाया था। तभी से सुहागिनें वट सावित्री का व्रत रखते चली आ रहीं हैं।
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