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बुंदेली संस्कृति का करें संरक्षण और संवर्धन
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sat, 07 May 2016 12:34 AM IST
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महोबा के सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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महोबा। नगर के सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने बुंदेली संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा युवाओं को बुंदेली लोक सस्कृति के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।
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शुक्रवार को अनुरागिनी संस्थान के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी को संबोधत करते हुए साहित्यकार विष्णुराव चतुर्वेदी ने कहा बुंदलेखंड की संस्कृति श्रेष्ठ और व्यापक है। यहां की लोक कला संस्कृति लोक जीवन के लिए अनूठी है।
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कार्यक्रम संयोजक जगप्रसाद तिवारी ने लोक गायन के माध्यम से बुंदेली संस्कृति श्रेष्ठता का वर्णन किया। साहित्यकार संतोष पटैरिया ने कहा वीर रस खंड में बुंदेली संस्कृति का ओजस्वी स्वरूप वर्णन से परे है।
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सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी ने भौतिकवादी दौर में लोक संस्कृति का विकास आवश्यक बताया। कहा संस्कृति के बगैर बुंदेली पहचान अधूरी है। इसका व्यापक प्रचार प्रसार जरूरी है। आल्हा परिषद के अध्यक्ष शरद तिवारी ने बुंदेली संस्कृति के प्रति जन जागरुकता पर बल दिया।
संस्था के अध्यक्ष डा. प्रवीण सिंह ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व मां चन्द्रिका महिला महाविद्यालय और सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष महेश पांडेय, राष्टपति पुरस्कार विजेता मालती विश्वकर्मा, प्रधान संगठन मंडल अध्यक्ष रामसेवक तिवारी, योगेश कुमार शर्मा, रामप्रकाश पुरवार, डा. रामस्वरूप वाजपेई व धर्मेन्द्र दीक्षित आदि मौजूद रहे।