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सिर छिपाने के लिए रिश्तेदारों का सहारा ले रहे लाभार्थी

Sun, 30 Jul 2017 11:00 PM IST
mahoba
mahoba Updated Sun, 30 Jul 2017 11:00 PM IST
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Beneficiaries taking relatives to hide head
प्रतीकात्मक तस्वीर (होम लोन) - फोटो : Yes Bank
आसरा आवास योजना के तहत बनाए गए आधे अधूरे आवास गरीबों के लिए मुसीबत बन गए हैं। एक साल बाद भी आवासों मेें छत न पड़ने से तमाम लाभार्थियों का सामान खराब हो रहा है। वहीं उन्हें बारिश में सिर छिपाने के लिए रिश्तेदारों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं कुछ लाभार्थी अपने पैसे से आसरा आवासों में पन्नी डालकर काम चला रहे हैं।
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गौरतलब है कि शहर में डेढ़ साल पहले करीब 900 गरीबों के आसरा आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुए थे। गरीबों को पक्का आसियाना मुहैया कराने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को सौंपी गई थी। जिसके तहत कार्यदायी संस्था ने ठेकेदार को आवासों का निर्माण कराए जाने का जिम्मा दिया था। लेकिन ठेकेदार बुरी तरह से फेल हो गया। एक साल बाद भी 900 के सापेक्ष बमुश्किल 300 आवासों का आधा अधूरा निर्माण करा सका। 
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आसरा आवास के लिए चयनित किए गए गरीबों के पक्के मकान बनाकर दिए जाने के लिए कच्चे आसियाने गिरा दिए गए। जिससे गरीब वर्ग के लोग तेज धूप सर्दी बारिश में किसी तरह गुजारा करते रहे। लेकिन अब बारिश में मकानों में पानी भरने से सामान खराब हो रहा है। इससे गरीब वर्ग के लोग खासा परेशान हैं। मकनियापरा निवासी कमरुद्दीन, हसीना, इसरार, भटीपुरा निवासी वहीद मंसूरी सहित तमाम लाभार्थियों का कहना है कि इस बावत कई बार अधिकारियों को भी अवगत कराया। लेकिन समस्या का निराकरण आजतक नहीं हुआ। बारिश के चलते सामान बर्बाद हो रहा है। 
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आसियाना गिरने से रोजी रोटी छिनी
पक्के मकान की उम्मीद में कच्चा मकान गिरवाने के बाद अब लाभार्थी पछता रहे हैं। पक्का मकान तो बना नहीं ऊपर से कच्चा मकान गिरने से वह बेघर हो गए हैं। कच्चे मकानों में परचून की दुकान, लकड़ी की दुकान व अन्य दूसरा कार्य करने वाले लोगों का आसियाना छिनने से रोजी रोटी भी छिन गई है। मकान न होने से अब वह घर में करने वाला छोटा मोटा काम भी नहीं कर पा रहे हैं।  इंसेट

 प्रोजेक्ट मैनेजर आरएन पांडेय ने कहा कि शहर में आसरा आवास योजना के तहत बनाए जा रहे गरीबों के आवासों का निर्माण कार्य पूरा न होने की शिकायतें मिलने पर कई बार ठेकेदार को जल्द  से जल्द कार्य पूरा कराने की चेतावनी भी दी गई। लेकिन ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरतने पर अब गरीबों के आधे अधूरे आवासों का कार्य दूसरे ठेकेदार से कराया जाएगा।
                 
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