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Mahoba News: रामलीला में धनुष टूटते ही गूंजे श्रीराम के जयकारे
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फोटो 16 एमएएचपी 03 परिचय-रामलीला में धनुष भंग की लीला का मंचन करते कलाकार। स्रोत: आयोजक
-धनुष यज्ञ की लीला के साथ सीता स्वयंवर का हुआ मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। 151वें रामलीला महोत्सव में बृहस्पतिवार की रात धनुष यज्ञ व सीता स्वयंवर की लीला का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के शिव धनुष तोड़ते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। कलाकारों ने सजीव अभिनय से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत कर दिया।
शहर के पुराने रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में दिखाया गया कि राजा जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर में देश-देशांतर से आए राजा-महाराजाओं ने भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। राजाओं को असफल देख राजा जनक निराश होकर विलाप करने लगे।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष भंग होते ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया। धनुष भंग के बाद भगवान परशुराम के आगमन और लक्ष्मण के साथ संवाद का मंचन हुआ। राम की भूमिका में शिवपूजन तिवारी, सीता की भूमिका में पवन कुमार, लक्ष्मण के रूप में आदित्य द्विवेदी और परशुराम की भूमिका में स्कंध पांडेय ने अभिनय किया। मनीष तिवारी ने प्रसंग का सजीव वर्णन किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। 151वें रामलीला महोत्सव में बृहस्पतिवार की रात धनुष यज्ञ व सीता स्वयंवर की लीला का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के शिव धनुष तोड़ते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। कलाकारों ने सजीव अभिनय से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत कर दिया।
शहर के पुराने रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में दिखाया गया कि राजा जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर में देश-देशांतर से आए राजा-महाराजाओं ने भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। राजाओं को असफल देख राजा जनक निराश होकर विलाप करने लगे।
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इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष भंग होते ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया। धनुष भंग के बाद भगवान परशुराम के आगमन और लक्ष्मण के साथ संवाद का मंचन हुआ। राम की भूमिका में शिवपूजन तिवारी, सीता की भूमिका में पवन कुमार, लक्ष्मण के रूप में आदित्य द्विवेदी और परशुराम की भूमिका में स्कंध पांडेय ने अभिनय किया। मनीष तिवारी ने प्रसंग का सजीव वर्णन किया।
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