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बारिश शुरू होते ही छात्राओं की छुट्टी
अमर उजाला महोबा
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:53 PM IST
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जर्जर इमारत
- फोटो : अमर उजाला
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राजकीय बालिका इंटर कालेज, कुलपहाड़ की इमारत जर्जर होने से छात्राओं पर हर पल खतरा मंडराता रहता है। गर्मी और सर्दी के मौसम में खुले आसमान के नीचे शिक्षा दी जाती है। जबकि बारिश में बरामदे में कक्षाएं लगाई जाती है। तेज बारिश होने पर बरामदा भी टपकने लगता है। जिससे छात्राओं की छुट्टी कर दी जाती है।
राजकीय बालिका इंटर कालेज में 272 छात्राएं कक्षा नौ से इंटर तक की कक्षाओं में पढ़ती है, लेकिन कालेज में न तो बैठने के लिए कक्षाएं है और न मेज, कुर्सी। जिससे मजबूरन छात्राएं जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बारिश के मौसम में होती है। तेज बारिश होने पर स्कूल की इमारत गिरने के डर से छात्राओं की छुट्टी कर दी जाती है।
कुलपहाड़ कस्बे में 1998 में राजकीय बालिका इंटर कालेज की मान्यता मिलने पर 100 साल पुरानी इमारत में राजकीय बालिका इंटर कालेज खोल दिया गया था। यह इमारत अब जर्जर हो गई है। कालेज का कुछ हिस्सा गिर भी गया है। शेष बची इमारत में बारिश में पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में इमारत गिरने का डर बना रहता है। ऐसे में छात्राओं को एक साथ बड़े बरामदे में बैठा दिया जाता है। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रधानाचार्य ने बताया कि जर्जर विद्यालय की इमारत के बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक को कई बार पत्र लिख कर अवगत कराया गया है।
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बालिकाओें के कालेज में शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। जिससे छात्राओं को घर भागना पड़ता है। केंद्र सरकार स्वच्छता के लिए जहां देश भर में स्वच्छता अभियान चला रही है। वहीं बालिका इंटर कालेज में शौचालय के लिए सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं कराई है। प्रधानाचार्य ने विद्यालय परिसर में आड़ बनाकर छात्राओं के लिए बाथरूम की अस्थाई व्यवस्था की है।
राजकीय बालिका इंटर कालेज में न तो लैब है और न ही पुस्तकालय। यहां अध्ययनरत छात्राओं को लैब न होने के कारण प्रेक्टिकल की सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। साथ ही पुस्तकालय न होने से छात्राओं को बाहर से पुस्तकें खरीदनी पड़ती हैं।
कालेज में टीचरों की भारी कमी है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। 23 टीचरों के सापेक्ष मात्र तीन टीचर है। तमाम विषयों के टीचर उपलब्ध ही नही हैं। विद्यालय की नई इमारत के लिए मिशन रोड पर जगह का चयन कर लिया गया है। मगर बजट न होने के कारण नई इमारत नहीं बन पा रही है। संतोष सिंह, प्रधानाचार्य
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राजकीय बालिका इंटर कालेज में 272 छात्राएं कक्षा नौ से इंटर तक की कक्षाओं में पढ़ती है, लेकिन कालेज में न तो बैठने के लिए कक्षाएं है और न मेज, कुर्सी। जिससे मजबूरन छात्राएं जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बारिश के मौसम में होती है। तेज बारिश होने पर स्कूल की इमारत गिरने के डर से छात्राओं की छुट्टी कर दी जाती है।
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कुलपहाड़ कस्बे में 1998 में राजकीय बालिका इंटर कालेज की मान्यता मिलने पर 100 साल पुरानी इमारत में राजकीय बालिका इंटर कालेज खोल दिया गया था। यह इमारत अब जर्जर हो गई है। कालेज का कुछ हिस्सा गिर भी गया है। शेष बची इमारत में बारिश में पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में इमारत गिरने का डर बना रहता है। ऐसे में छात्राओं को एक साथ बड़े बरामदे में बैठा दिया जाता है। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रधानाचार्य ने बताया कि जर्जर विद्यालय की इमारत के बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक को कई बार पत्र लिख कर अवगत कराया गया है।
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बालिकाओें के कालेज में शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। जिससे छात्राओं को घर भागना पड़ता है। केंद्र सरकार स्वच्छता के लिए जहां देश भर में स्वच्छता अभियान चला रही है। वहीं बालिका इंटर कालेज में शौचालय के लिए सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं कराई है। प्रधानाचार्य ने विद्यालय परिसर में आड़ बनाकर छात्राओं के लिए बाथरूम की अस्थाई व्यवस्था की है।
राजकीय बालिका इंटर कालेज में न तो लैब है और न ही पुस्तकालय। यहां अध्ययनरत छात्राओं को लैब न होने के कारण प्रेक्टिकल की सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। साथ ही पुस्तकालय न होने से छात्राओं को बाहर से पुस्तकें खरीदनी पड़ती हैं।
कालेज में टीचरों की भारी कमी है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। 23 टीचरों के सापेक्ष मात्र तीन टीचर है। तमाम विषयों के टीचर उपलब्ध ही नही हैं। विद्यालय की नई इमारत के लिए मिशन रोड पर जगह का चयन कर लिया गया है। मगर बजट न होने के कारण नई इमारत नहीं बन पा रही है। संतोष सिंह, प्रधानाचार्य