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नहराें पर कहीं चबूतरे तो कहीं बनीं इमारतें
Mahoba
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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महोबा। जिले में किसानाें के लिए लाइफ लाइन रहीं नहरें जमींदोज हो गई हैं। हालत यह है कि इन नहराें पर कहीं पर इमारतें खड़ी हो गई हैं तो कहीं पर इन्हें मिटाकर नालियाें में तब्दील कर दिया गया है। इसके चलते फसलाें को हराभरा करने वाली नहरें अब खत्म होती जा रहीं हैं।
प्रशासनिक अधिकारियाें की उदासीनता के चलते दबंगाें द्वारा नहराें पर अवैध कब्जा किए जाने से नहरें सिकुड़ गई हैं। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियाें द्वारा नहराें की सफाई न कराए जाने से नहराें का अस्तित्व खत्म होता गया। नतीजतन आसपास के लोगाें ने नहराें पर कब्जा कर इमारतें बना लीं तो किसी ने चबूतरा बनाकर नहराें को जमींदोज कर दिया। इससे अब न तो खेताें में इनका पानी पहुंच पाता है और न ही किसानाें को इन नहराें का लाभ मिल रहा है। पठारी क्षेत्र में बसे जनपद महोबा में किसानाें को सिंचाई मयस्सर कराए जाने की गरज से 105 नहराें का 451.622 किलोमीटर की लंबाई में जाल बिछाया गया है। जिले में 2.36 लाख हेक्टेयर में फसल की पैदावार की जाती है। इसमें से 2.15 लाख हेक्टेयर में रबी की फसल और 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसल की पैदावार होती है। 24954 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई नहराें के जरिए की जाती है। अर्जुन बांध, कबरई बांध, चंद्रावल बांध, उर्मिल बांध, मदन सागर, विजय सागर, कल्याण सागर, कीरत सागर, बेलासागर सरोवराें और 19 बड़ी बंधियाें में क्षमता के अनुरूप जल भंडारण न होने से लंबे समय से नहरें ठीक तरीके से नहीं चल पा रही हैं। बांधाें में पर्याप्त जल भंडारण न होने से सालाें से नहराें से पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। नहराें में पानी न चलने से नहरें अनुपयोगी साबित हो रही हैं।
मदन सागर से वाया सुभाष चौकी होते हुए निकली नहर पर इमारतें और सड़कें बन जाने से नहर खत्म हो गई है। इसी तरह नरसिंह कुटी के सामने से निकली नहर सड़क में तब्दील हो गई। मदन सागर से भटीपुरा होते हुए कल्याण सागर को निकली नहर की दो दशक से सफाई न होने के कारण नहर नाले में बदल गई है। इसी तरह कीरत सागर, बेला सागर, कल्याण सागर से निकली गई नहरें प्रशासनिक उदासीनता के चलते खत्म होती जा रहीं हैं। सिंचाई विभाग द्वारा मनरेगा के तहत थोड़ी बहुत नहराें की सफाई कराई गई है जिसका किसानाें को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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प्रशासनिक अधिकारियाें की उदासीनता के चलते दबंगाें द्वारा नहराें पर अवैध कब्जा किए जाने से नहरें सिकुड़ गई हैं। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियाें द्वारा नहराें की सफाई न कराए जाने से नहराें का अस्तित्व खत्म होता गया। नतीजतन आसपास के लोगाें ने नहराें पर कब्जा कर इमारतें बना लीं तो किसी ने चबूतरा बनाकर नहराें को जमींदोज कर दिया। इससे अब न तो खेताें में इनका पानी पहुंच पाता है और न ही किसानाें को इन नहराें का लाभ मिल रहा है। पठारी क्षेत्र में बसे जनपद महोबा में किसानाें को सिंचाई मयस्सर कराए जाने की गरज से 105 नहराें का 451.622 किलोमीटर की लंबाई में जाल बिछाया गया है। जिले में 2.36 लाख हेक्टेयर में फसल की पैदावार की जाती है। इसमें से 2.15 लाख हेक्टेयर में रबी की फसल और 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसल की पैदावार होती है। 24954 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई नहराें के जरिए की जाती है। अर्जुन बांध, कबरई बांध, चंद्रावल बांध, उर्मिल बांध, मदन सागर, विजय सागर, कल्याण सागर, कीरत सागर, बेलासागर सरोवराें और 19 बड़ी बंधियाें में क्षमता के अनुरूप जल भंडारण न होने से लंबे समय से नहरें ठीक तरीके से नहीं चल पा रही हैं। बांधाें में पर्याप्त जल भंडारण न होने से सालाें से नहराें से पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। नहराें में पानी न चलने से नहरें अनुपयोगी साबित हो रही हैं।
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मदन सागर से वाया सुभाष चौकी होते हुए निकली नहर पर इमारतें और सड़कें बन जाने से नहर खत्म हो गई है। इसी तरह नरसिंह कुटी के सामने से निकली नहर सड़क में तब्दील हो गई। मदन सागर से भटीपुरा होते हुए कल्याण सागर को निकली नहर की दो दशक से सफाई न होने के कारण नहर नाले में बदल गई है। इसी तरह कीरत सागर, बेला सागर, कल्याण सागर से निकली गई नहरें प्रशासनिक उदासीनता के चलते खत्म होती जा रहीं हैं। सिंचाई विभाग द्वारा मनरेगा के तहत थोड़ी बहुत नहराें की सफाई कराई गई है जिसका किसानाें को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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