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मानकाें पर खरे नहीं उतर रहे मैरिज हाउस
Mahoba
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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महोबा। शादी विवाह में वर और वधू पक्ष को बेहतर सुविधा मुहैया कराए जाने के उद्देश्य से शहर में बनाए गए 10 मैरिज हाउस मानकाें पर खरे नहीं उतर रहे हैं। हालत यह है कि कभी कभार अग्निकांड की घटना होने पर लोगाें की जिंदगी भगवान भरोसे है।
शहर के मुख्य मार्ग, चरखारी रोड, राठ रोड, खजुराहो रोड, छतरपुर रोड पर लाखाें रुपए की लागत से बड़े मैरिज हाउस बनाए गए हैं। अधिकतर मैरिज हाउस में चार पहिया वाहन रखने तक के इंतजाम नहीं हैं। बारात आने व शादी विवाह में आने वाली गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो जाती हैं जिससे जाम की समस्या पैदा हो जाती है। इतना ही नहीं इन विवाह घराें में न तो आग बुझाने के यंत्र हैं, न बालू की बाल्टियां और न ही दो दरवाजे हैं। एक ही दरवाजे से वर और वधू पक्ष के लोगाें का आना जाना रहता है।
इससे यदि कभी विवाह घर के अंदर कोई घटना घटी तो एक दरवाजे से निकलना मुश्किल हो जाएगा। मैरिज हाउस बारातियाें की सुविधा के लिए बनाए गए हैं लेकिन सुविधा के नाम पर अधिकतर बारात घराें में सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं लेकिन घराें के सामने मैदान न होने के कारण लोग मजबूरन बारातघराें की तरफ रुख कर रहे हैं।
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बारात घराें में सुविधाआें के नाम पर ऊपर नीचे हाल की व्यवस्था की गई हैं। गर्मी के दिनाें में ऊपर के हाल आग उगलते हैं। ऐसी स्थिति में हाल में भोजन करना मुश्किल हो जाता है। एकाध मैरिज हाउस को छोड़कर किसी भी मैरिज हाउस में कूलर की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में पंखे की गर्म हवाआें से ही काम चलाना पड़ता है।
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शहर के मुख्य मार्ग, चरखारी रोड, राठ रोड, खजुराहो रोड, छतरपुर रोड पर लाखाें रुपए की लागत से बड़े मैरिज हाउस बनाए गए हैं। अधिकतर मैरिज हाउस में चार पहिया वाहन रखने तक के इंतजाम नहीं हैं। बारात आने व शादी विवाह में आने वाली गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो जाती हैं जिससे जाम की समस्या पैदा हो जाती है। इतना ही नहीं इन विवाह घराें में न तो आग बुझाने के यंत्र हैं, न बालू की बाल्टियां और न ही दो दरवाजे हैं। एक ही दरवाजे से वर और वधू पक्ष के लोगाें का आना जाना रहता है।
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इससे यदि कभी विवाह घर के अंदर कोई घटना घटी तो एक दरवाजे से निकलना मुश्किल हो जाएगा। मैरिज हाउस बारातियाें की सुविधा के लिए बनाए गए हैं लेकिन सुविधा के नाम पर अधिकतर बारात घराें में सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं लेकिन घराें के सामने मैदान न होने के कारण लोग मजबूरन बारातघराें की तरफ रुख कर रहे हैं।
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बारात घराें में सुविधाआें के नाम पर ऊपर नीचे हाल की व्यवस्था की गई हैं। गर्मी के दिनाें में ऊपर के हाल आग उगलते हैं। ऐसी स्थिति में हाल में भोजन करना मुश्किल हो जाता है। एकाध मैरिज हाउस को छोड़कर किसी भी मैरिज हाउस में कूलर की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में पंखे की गर्म हवाआें से ही काम चलाना पड़ता है।