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धड़ल्ले से चल रहा है मिलावटी दूध का धंधा
Mahoba
Updated Fri, 19 Sep 2014 05:31 AM IST
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महोबा। मिलावटी दूध और उससे बने उत्पादाें पर अंकुश लगाने को शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। इसकी सघन जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को जांच अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं। सितंबर से लेकर मार्च 2015 तक जिले को हर माह दूध के न्यूनतम पांच सैंपल लेने का लक्ष्य दिया गया है।
जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते दूध में मिलावट का धंधा जोराें पर चल रहा है। कमोवेश यही स्थिति दूध से निर्मित मिठाइयाें व अन्य उत्पादाें की भी है। खाद्य विभाग द्वारा दूध और मिठाई के सैंपल लेने में ढिलाई बरते जाने के कारण मिलावट खोराें के हौसले बुलंद हैं। जगह-जगह डेयरी खोलकर दूध विक्रेता धड़ल्ले से पानी व अन्य वस्तुआें की मिलावट कर दूध के नाम पर जहर बेच रहे हैं। बावजूद इसके खाद्य विभाग दूध और इससे बने उत्पादाें की जांच के प्रति गंभीर नहीं है।
विभागीय आंकड़ाें के अनुसार वर्ष 2013-14 में दूध के 23 सैंपल लिए गये, जिसमें महज 15 नमूनाें में ही पानी की मिलावट पाई गई। इसके अलावा एक साल में खोया के सात सैंपल लिए गये, जिसमें दो सैंपलाें में मिलावट पाई गई। इसी तरह घी के चार सैंपल में से दो सैंपल मिलावटी पाए गये। गौरतलब है कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीवाली, होली सहित कई पर्वों के लिए मिठाई की दुकानाें में 15 दिन पहले मिठाई बनाकर तैयार कर ली जाती है। इसके बावजूद महकमे द्वारा लिए गये मिठाई के 22 सैंपलाें में महज एक नमूने में गुणवत्ताहीन मिठाई पाई गई। यही नहीं वर्ष 2013-14 में पनीर और बटर का एक भी नमूना नहीं लिया गया। वहीं मिलावट करने वाले दुकानदाराें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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2014-15 में अप्रैल से अब तक लिए गये सैंपल
जिंस लिए गए सैंपल मिलावट का ब्यौरा
दूध 15 3
खोया 0 0
पनीर 0 0
घी 0 0
बटर 0 0
मिठाई 1 0
शासन द्वारा हर माह दूध के पांच नमूने भरने का लक्ष्य दिया गया है। समय-समय पर दूध और उससे बने उत्पादाें के नमूने भरकर जांच कराई जाती है। मिलावट पाए जाने पर विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। शासन के आदेशाें के तहत अभियान चलाकर दूध और उससे बने उत्पादाें की सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।- सुरेश चौरसिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते दूध में मिलावट का धंधा जोराें पर चल रहा है। कमोवेश यही स्थिति दूध से निर्मित मिठाइयाें व अन्य उत्पादाें की भी है। खाद्य विभाग द्वारा दूध और मिठाई के सैंपल लेने में ढिलाई बरते जाने के कारण मिलावट खोराें के हौसले बुलंद हैं। जगह-जगह डेयरी खोलकर दूध विक्रेता धड़ल्ले से पानी व अन्य वस्तुआें की मिलावट कर दूध के नाम पर जहर बेच रहे हैं। बावजूद इसके खाद्य विभाग दूध और इससे बने उत्पादाें की जांच के प्रति गंभीर नहीं है।
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विभागीय आंकड़ाें के अनुसार वर्ष 2013-14 में दूध के 23 सैंपल लिए गये, जिसमें महज 15 नमूनाें में ही पानी की मिलावट पाई गई। इसके अलावा एक साल में खोया के सात सैंपल लिए गये, जिसमें दो सैंपलाें में मिलावट पाई गई। इसी तरह घी के चार सैंपल में से दो सैंपल मिलावटी पाए गये। गौरतलब है कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीवाली, होली सहित कई पर्वों के लिए मिठाई की दुकानाें में 15 दिन पहले मिठाई बनाकर तैयार कर ली जाती है। इसके बावजूद महकमे द्वारा लिए गये मिठाई के 22 सैंपलाें में महज एक नमूने में गुणवत्ताहीन मिठाई पाई गई। यही नहीं वर्ष 2013-14 में पनीर और बटर का एक भी नमूना नहीं लिया गया। वहीं मिलावट करने वाले दुकानदाराें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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2014-15 में अप्रैल से अब तक लिए गये सैंपल
जिंस लिए गए सैंपल मिलावट का ब्यौरा
दूध 15 3
खोया 0 0
पनीर 0 0
घी 0 0
बटर 0 0
मिठाई 1 0
शासन द्वारा हर माह दूध के पांच नमूने भरने का लक्ष्य दिया गया है। समय-समय पर दूध और उससे बने उत्पादाें के नमूने भरकर जांच कराई जाती है। मिलावट पाए जाने पर विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। शासन के आदेशाें के तहत अभियान चलाकर दूध और उससे बने उत्पादाें की सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।- सुरेश चौरसिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।