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जलि में

Fri, 01 Feb 2019 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Feb 2019 11:45 PM IST
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जलि में

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महोबा। अन्ना पशुओं से निजात दिलाने को प्रशासन ने जिले में 85 गोशालाओं का निर्माण कराया है। 50 फीसदी से ज्यादा अन्ना पशुओं को गोशालाओं में भेज दिया है। इसके बावजूद अभी भी अन्ना पशु खेतों में फसलें चर रहे हैं। उनके लिए प्रशासन ने ग्राम प्रधानोें से अस्थाई गोशालाओं का इंतजाम करने को कहा है।
जिले में 2.34 लाख हेक्टेयर में रबी की फसल की बुआई की जाती है। इस साल सूखे के चलते खेेतों में धूल उड़ रही है। खेतों में पलेवा न हो पाने और अन्ना पशुुुओं को देखते हुए करीब 80 फीसदी जमीन परती पड़ी है। किसान पानी न होने के कारण बुआई नहीं कर पा रहे हैं। अन्ना पशुओं को देखते हुए किसानों ने करीब 20 फीसदी भूमि में ही रबी की फसल की बुुआई की थी। अन्ना पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए डीएम सहदेव के निर्देश पर जिले में 85 गोशालाओं का निर्माण कराया गया। इससे किसानों की कुछ परेशानी तो खत्म हुई लेकिन अभी भी अन्ना पशु घूम रहे हैं।
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गोशाला का निर्माण कराने की मांग
श्रीनगर के मूलचंद्र, रामसेवक, मुन्ना सहित तमाम ग्रामीणों ने कस्बे में गोशाला बनवाने की मांग की है। जिससे खेतों में बोई गई थोड़ी बहुत फसल को बचाया जा सके।
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कांजी हाउस बंद होने के बाद बढ़ी समस्या
किसान बालाप्रसाद, फूलसिंह और रामेश्वर का कहना है कि पहले कांजी हाउस में पशुओं को बंद करने की शासन-प्रशासन ने व्यवस्था की थी। जिससे किसान अपने पशुओं को बांधकर रखते थे लेकिन जबसे कांजी हाउस बंद हुए हैं। पशुपालकों ने पशुुओं को आवारा छोड़ दिया है। इसके चलते अब फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि कांजी हाउस बंद होने के बाद से समस्या बढ़ी है।

किसानों की फसल को बचाने के लिए गांव-गांव में आश्रय स्थल की व्यवस्था कराई गई है। जिले में 30 हजार से ज्यादा अन्ना पशुओं को अबतक गोशालाओं में बंद कराया गया है। शेष घूम रहे अन्ना पशुओं को ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी गोशाला बनाकर बंद किया। उनके खानपान की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी प्रधानों को सौंपी गई है। जिससे अब बढ़े पैमाने पर घूम रहे अन्ना पशुओं की संख्या में भारी कमी आई है।
सहदेव, डीएम, महोबा
85 गोशालाएं बनी फिर भी घूम रहे अन्ना
- अन्ना पशुओं के लिए प्रशासन ने ग्राम प्रधानों को अस्थाई गोशालाओं की व्यवस्था कराने को कहा है
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