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Maharajganj News: नारायणी-गंडक का जलस्तर घटा, सोहगीबरवा में सामान्य होने लगा जनजीवन
Thu, 17 Sep 2026 02:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:07 AM IST
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- बाढ़ का पानी उतरने से ग्रामीणों को राहत, संपर्क मार्ग अब भी बदहाल
निचलौल। नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवा समेत नदी किनारे बसे कई गांवों में जनजीवन प्रभावित हो गया था। अब नदी का जलस्तर लगातार घटने से गांवों में जमा पानी निकल गया है और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है।
पिछले दिनों नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवा और आसपास के गांवों में पानी भर गया था। खेतों और संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी हुई। जरूरी सामान की खरीदारी के लिए भी ग्रामीणों को पानी से होकर मुख्य बाजारों तक जाना पड़ता था। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी हुई थी।
इधर, बुधवार को गंडक बैराज से 77 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। नदी का जलस्तर कम होने के साथ गांवों और संपर्क मार्गों से पानी तेजी से निकल गया है। कई रास्ते अब सूखने लगे हैं। आवागमन सामान्य होने से ग्रामीणों को राहत मिली है और रोजमर्रा की गतिविधियां भी पटरी पर लौटने लगी हैं। हालांकि, बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर कीचड़ और जलभराव के अवशेष अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीणों ने संपर्क मार्गों की सफाई और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है।
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सोहगीबरवा के नौका टोला निवासी रमाकांत यादव ने बताया कि अब बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। रोजमर्रा का सामान लाने के लिए पानी से होकर नहीं जाना पड़ रहा है। हालांकि, क्षेत्र के संपर्क मार्ग खराब होने के कारण अभी भी आवागमन में परेशानी हो रही है। सोहगीबरवा निवासी हीरामन ने बताया कि कुछ दिन पहले क्षेत्र की स्थिति काफी भयावह थी। अब नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है और बारिश भी थमने लगी है। बाढ़ का खतरा फिलहाल नहीं है, लेकिन क्षेत्र की अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए प्रशासन को प्रयास करना चाहिए।
क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नदियों का जलस्तर अब काफी कम हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में अब घबराने की कोई बात नहीं है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसडीआरएफ की टीम अभी सोहगीबरवा में मौजूद है।
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निचलौल। नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवा समेत नदी किनारे बसे कई गांवों में जनजीवन प्रभावित हो गया था। अब नदी का जलस्तर लगातार घटने से गांवों में जमा पानी निकल गया है और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है।
पिछले दिनों नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवा और आसपास के गांवों में पानी भर गया था। खेतों और संपर्क मार्गों पर पानी जमा होने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी हुई। जरूरी सामान की खरीदारी के लिए भी ग्रामीणों को पानी से होकर मुख्य बाजारों तक जाना पड़ता था। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी हुई थी।
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इधर, बुधवार को गंडक बैराज से 77 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। नदी का जलस्तर कम होने के साथ गांवों और संपर्क मार्गों से पानी तेजी से निकल गया है। कई रास्ते अब सूखने लगे हैं। आवागमन सामान्य होने से ग्रामीणों को राहत मिली है और रोजमर्रा की गतिविधियां भी पटरी पर लौटने लगी हैं। हालांकि, बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर कीचड़ और जलभराव के अवशेष अभी भी मौजूद हैं। ग्रामीणों ने संपर्क मार्गों की सफाई और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है।
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सोहगीबरवा के नौका टोला निवासी रमाकांत यादव ने बताया कि अब बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। रोजमर्रा का सामान लाने के लिए पानी से होकर नहीं जाना पड़ रहा है। हालांकि, क्षेत्र के संपर्क मार्ग खराब होने के कारण अभी भी आवागमन में परेशानी हो रही है। सोहगीबरवा निवासी हीरामन ने बताया कि कुछ दिन पहले क्षेत्र की स्थिति काफी भयावह थी। अब नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है और बारिश भी थमने लगी है। बाढ़ का खतरा फिलहाल नहीं है, लेकिन क्षेत्र की अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए प्रशासन को प्रयास करना चाहिए।
क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नदियों का जलस्तर अब काफी कम हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में अब घबराने की कोई बात नहीं है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसडीआरएफ की टीम अभी सोहगीबरवा में मौजूद है।