फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Waiting 28 years for a bridge: Mother stepped into the drain after the boat service stopped; drowned along with her two children.

Maharajganj News: 28 साल से पुल का इंतजार, नाव बंद हुई तो नाले में उतरी मां, दो बच्चों संग डूबी

Fri, 18 Sep 2026 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 18 Sep 2026 01:20 AM IST
विज्ञापन
Waiting 28 years for a bridge: Mother stepped into the drain after the boat service stopped; drowned along with her two children.
- 1998 की बाढ़ में बह गया था लकड़ी का पुल, तीन हजार आबादी आज भी नाव के भरोसे
विज्ञापन

- प्रशासन की मौजूदगी में त्रिमुहानी घाट पर तीनों का हुआ अंतिम संस्कार



महराजगंज। सदर कोतवाली क्षेत्र के पकड़ी जंगल में बोकड़ा देवी स्थान के पास नदाव नाले पर पुल नहीं होने की कीमत मंगलवार शाम एक परिवार को जान देकर चुकानी पड़ी। वर्ष 1998 की बाढ़ में लकड़ी का पुल बहने के बाद करीब 28 साल से तीन हजार की आबादी नाव के सहारे नाला पार कर रही है। मंगलवार को शाम छह बजे नाव बंद होने के बाद घर लौट रही पूनम देवी (48) अपने आठ वर्षीय बेटे विपिन और छह वर्षीय बेटी सुहानी के साथ नाले में उतर गईं। कुछ कदम आगे गहरे कुंड में तीनों डूब गए। बुधवार को एक साथ मिले तीन शवों के बाद ग्रामीणों में पुल की मांग फिर तेज हो गई।
-------------------

शाम होने के चलते बंद थी नाव, पैदल ही नाले में उतरी

पूनम के पति मोहित के अनुसार पत्नी मंगलवार को बच्चों के साथ मायके गई थी। दोपहर करीब दो बजे ससुराल के लिए निकली। पकड़ी जंगल से उनका गांव करीब आठ किलोमीटर दूर है। ऑटो से उतरने के बाद पैदल घर की ओर बढ़ी। बोकड़ा देवी स्थान के पूरब नदाव नाले पर पहुंचते-पहुंचते शाम हो गई। उस समय नाव का संचालन बंद हो चुका था। घर पहुंचने के लिए उनके पास पानी पार करने के अलावा कोई सहज विकल्प नहीं था।
विज्ञापन


पूनम इस रास्ते से परिचित थीं। भाई धर्मेंद्र के अनुसार, उन्हें नाले के भीतर बने गहरे कुंड की जानकारी नहीं थी। ऊपर से पानी शांत नजर आ रहा था। इसी बीच तीनों गहरे हिस्से में चले गए और डूब गए। जिस स्थान से शव मिले, वहां करीब चार फुट पानी था, जबकि नाले के अन्य हिस्सों में 15 से 20 फुट तक गहराई बताई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------------

पति के फोन से खुला देर रात तक तलाश का सिलसिला

बरगदवा राजा टोला बीट नर्सरी निवासी पूनम के पति मोहित पुणे में पेंटिंग और मजदूरी करते हैं। पूनम के भाई धर्मेंद्र के मुताबिक मंगलवार को जीजा मोहित बहन के घर पहुंचने को लेकर फोन करते रहे। रात करीब आठ बजे उन्होंने पूनम की मां नर्बदा देवी से जानकारी ली। पूनम के नहीं पहुंचने पर परिजन और ग्रामीण देर रात तक उनकी तलाश करते रहे।

बुधवार को भैंस चराने गए एक व्यक्ति ने नाले में शव देखे। करीब 50 मीटर के दायरे में पूनम और दोनों बच्चों के शव मिले। देर रात करीब नौ बजे प्रशासन की मौजूदगी में त्रिमुहानी घाट पर तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
---------------------

बाढ़ में पुल बहा, 28 साल में नहीं बनी स्थायी राह

बरवा राजा गांव के प्रशासक प्रतिनिधि रामसवारे यादव के मुताबिक नदाव नाला काफी गहरा है और इसके भीतर ऐसा कुंड है जिसमें पानी पूरी तरह नहीं सूखता। वन विभाग ने वर्षों पहले यहां लकड़ी का पुल बनाया था जो वर्ष 1998 की बाढ़ में बह गया। इसके बाद ग्रामीणों के लिए नाव ही आवागमन का साधन बनी हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार शाम छह बजे के बाद नाव नहीं चलती। वनटांगिया ग्रामीण लंबे समय से संपर्क मार्ग और पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया जा चुका है। उनका कहना है कि पुल बनने से करीब तीन हजार लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। तीन मौतों के बाद वर्षों पुरानी यह मांग एक बार फिर सामने आ गई है।



पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूनम और दोनों बच्चों की मौत डूबने से होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। - शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article