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बच्चे के संकेत को समझें, जिम्मेदारी पूर्वक आहार खिलाएं
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बच्चे के संकेत को समझें, जिम्मेदारी पूर्वक आहार खिलाएं
महराजगंज। माताएं बच्चे के संकेत को समझें और जिम्मेदारी पूर्वक आहार खिलाएं। गुणवत्तापरक अन्नप्राशन से बच्चे सुपोषित होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि धात्री छह माह बाद बच्चों को अनुपूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखें।
ये बातें बाल विकास परियोजना सदर की मुख्य सेविका सीमा दुबे ने कहीं। वह आंगनबाड़ी केंद्र धनेवा-धनेई पर अन्नप्राशन के दौरान धात्री महिलाओं को बृहस्पतिवार को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में सात माह के बच्चे मोहम्मद हमजा को खीर खिलाया गया।
उन्होंने बताया कि छह माह बाद मां के दूध के साथ दिया जाने वाला आहार अनुपूरक आहार कहलाता है। छह माह बाद शिशु को पोषण की आवश्यकता बढ़ जाती है। इस बढ़ती आवश्यकता के लिए मां का दूध पर्याप्त नहीं होता। छह माह बाद अनुपूरक आहार के साथ स्तनपान दो साल तक जारी रखें। बच्चे की मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक विकास में ऊपरी आहार आवश्यक होता है। बच्चे तंदुरुस्त होते हैं। बच्चे पढ़ाई में नहीं पिछड़ते। बीमार कम पड़ते हैं। बच्चों के स्वस्थ रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक रहती है।
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अन्नप्राशन कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंचन सिंह, प्रियंका, सुनीता, उर्मिला, रंभा तथा अन्य महिलाओं में ममता, शोभा, रामराजी, देवंता, हसीना, राधिका और शोभावती मौजूद रहीं।
कब कितना दें अनुपूरक आहार
छह माह पूरे होने पर दो से तीन चम्मच गाढ़ा मसला हुआ मुलायम आहार जो आसानी से निगला जा सके। जैसे खिचड़ी, खीर, हलवा, मसली दाल।
7 से 8 माह में तीन बार 250 ग्राम की कटोरी से हर बार आधी कटोरी, मसला हुआ मुलायम आहार । जैसे खिचड़ी, दलिया, खीर, हलवा।
9 से 11 माह तीन से चार बार 250 ग्राम की कटोरी से हर बार पौन कटोरी। पतला बारीक कटा एवं मसला हुआ खाना जो बच्चा स्वयं हाथ से उठा कर खा सके। जैसे खिचड़ी , दलिया,मसला हुआ फल, केला, आम, पपीता, दाल, सब्जी में रोटी।
12-24 माह चार से पांच बार। 250 ग्राम की कटोरी से हर बार पूरी कटोरी। घर में बनने वाला खाना। खिचड़ी, दलिया, खीर, हलवा, दूध, दाल, केला, आम, पपीता, अंडा, सब्जी में सोकी रोटी।
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महराजगंज। माताएं बच्चे के संकेत को समझें और जिम्मेदारी पूर्वक आहार खिलाएं। गुणवत्तापरक अन्नप्राशन से बच्चे सुपोषित होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि धात्री छह माह बाद बच्चों को अनुपूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखें।
ये बातें बाल विकास परियोजना सदर की मुख्य सेविका सीमा दुबे ने कहीं। वह आंगनबाड़ी केंद्र धनेवा-धनेई पर अन्नप्राशन के दौरान धात्री महिलाओं को बृहस्पतिवार को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में सात माह के बच्चे मोहम्मद हमजा को खीर खिलाया गया।
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उन्होंने बताया कि छह माह बाद मां के दूध के साथ दिया जाने वाला आहार अनुपूरक आहार कहलाता है। छह माह बाद शिशु को पोषण की आवश्यकता बढ़ जाती है। इस बढ़ती आवश्यकता के लिए मां का दूध पर्याप्त नहीं होता। छह माह बाद अनुपूरक आहार के साथ स्तनपान दो साल तक जारी रखें। बच्चे की मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक विकास में ऊपरी आहार आवश्यक होता है। बच्चे तंदुरुस्त होते हैं। बच्चे पढ़ाई में नहीं पिछड़ते। बीमार कम पड़ते हैं। बच्चों के स्वस्थ रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक रहती है।
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अन्नप्राशन कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कंचन सिंह, प्रियंका, सुनीता, उर्मिला, रंभा तथा अन्य महिलाओं में ममता, शोभा, रामराजी, देवंता, हसीना, राधिका और शोभावती मौजूद रहीं।
कब कितना दें अनुपूरक आहार
छह माह पूरे होने पर दो से तीन चम्मच गाढ़ा मसला हुआ मुलायम आहार जो आसानी से निगला जा सके। जैसे खिचड़ी, खीर, हलवा, मसली दाल।
7 से 8 माह में तीन बार 250 ग्राम की कटोरी से हर बार आधी कटोरी, मसला हुआ मुलायम आहार । जैसे खिचड़ी, दलिया, खीर, हलवा।
9 से 11 माह तीन से चार बार 250 ग्राम की कटोरी से हर बार पौन कटोरी। पतला बारीक कटा एवं मसला हुआ खाना जो बच्चा स्वयं हाथ से उठा कर खा सके। जैसे खिचड़ी , दलिया,मसला हुआ फल, केला, आम, पपीता, दाल, सब्जी में रोटी।
12-24 माह चार से पांच बार। 250 ग्राम की कटोरी से हर बार पूरी कटोरी। घर में बनने वाला खाना। खिचड़ी, दलिया, खीर, हलवा, दूध, दाल, केला, आम, पपीता, अंडा, सब्जी में सोकी रोटी।