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Maharajganj News: कोहरे की आड़ में कीमती लकड़ियों सरहद पार पहुंचा रहे तस्कर

Wed, 07 Jan 2026 01:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 01:41 AM IST
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Under the cover of fog, smugglers are transporting precious wood across the border.
लकड़ी माफियाओं की जंगलों में बढ़ती सक्रियता से बहुमूल्य वन संपदा के साथ ही वन्य जीवों के जीवन पर भी संकट
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तीन जनवरी को सरहद पार भेजी जा रही साखू की लकड़ी को वन विभाग की टीम ने किया था बरामद
महराजगंज। नेपाल सरहद पर इन दिनों घने कोहरे में धंधेबाज खाद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नशीले पदार्थों के साथ ही जंगल की कीमती लकड़ियों की कटान कर सरहद पार कर रहे हैं। कीमती लकड़ियों की तस्करी से धंधेबाज मोटी रकम कमा रहे हैं। तीन जनवरी को सरहद पार भेजी जा रही साखू की लकड़ी को टीम बरामद किया था। गर्मी के मौसम की तुलना में इन दिनों कीमती लकड़ियों के तस्करी के मामले बढ़ गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कड़ाके की ठंड के बीच सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर, निचलौल, मधवलिया, पकड़ी सहित सभी वन रेंज के जंगलों में लकड़ी की तस्करी शुरू हो गई है। इन वन क्षेत्रों में घने कोहरे के बीच धंधेबाज वृक्षों की कटाई कर मोटी रकम की कमाई कर रहे हैं। जंगल से सटे गांव के लोगों ने बातचीत में नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि घने कोहरे के बीच जंगलों में कीमती पेड़ों की कटान के मामले बढ़ते जा रहे हैं। धंधेबाजों की ओर से साखू और सागौन की कीमती पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है। पेड़ों की अंधाधुंध कटान से एक तरफ वन संपदा को क्षति पहुंच रही है। वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है। हरे पेड़ों की अवैध कटान से पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ रहा है। यहां के जंगल से काटी गई लकड़ी को दरवाजा, खिड़की और फर्नीचर बनाकर नेपाल के कई शहरों में भी भेजी जा रही है।
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डीएफओ निरंजन सुर्वे ने बताया कि वन क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है। वन सुरक्षा टीम सक्रिय है। कटान की सूचना मिलने पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
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दातून भी तोड़ लें तो चोर साबित हो जाएंगे
पकड़ी वन रेंज से सटे गांव के लोगों ने कहा कि अगर हम जंगल से दातून भी तोड़ लें तो विभाग के जिम्मेदार हमें चोर साबित कर देते हैं। कुछ दिन पहले गांव के कुछ युवक जंगल की सड़कों पर घूमने निकले थे। युवकों को जंगल में देखकर कुछ जिम्मेदार अफसरशाही दिखाने लगे। घटना का क वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना के बाद से वह लोग कभी जंगल की ओर घूमने नहीं गए। वहीं तस्कर जंगल से कीमती लकड़ी की चोरी कर लेते हैं। कई बार जिम्मेदारों पर हमला भी कर देते हैं। लेकिन विभाग के जिम्मेदार ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं।
जिन पेड़ों रक्षा होनी चाहिए उन्हें काट रहे तस्कर
निचलौल राष्ट्रीय इंटरमीडिएट कॉलेज बाली के भूगोल प्रवक्ता संजय राय ने कहा कि जैव विविधता, वन स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन शमन सुनिश्चित करने के लिए जिन पेड़ों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्हें अब शिकारी रात के समय में काट रहे हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह केवल लालच से प्रेरित अपराध हो। आर्थिक दबाव हैं, जो समस्या को और बढ़ाते हैं। ग्रामीण समुदायों में गरीबी व्याप्त है। कई शिकारियों के लिए लकड़ी की कटाई आत्मनिर्भरता, परंपरा और आवश्यकता का कार्य है।


लाठी से हो रही जंगल की रखवाली
नेपाल सीमा से सटे व नारायणी नदी के किनारे बसे जंगलों से कीमती लकड़ियों की कटान कोई नई बात नहीं है। पहले भी जंगलों में कटान करने के मामले सामने आ चुका हैं। इसके बाद भी इस पर रोक लगा पाना विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो गया है। वन विभाग के कई कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वन कर्मियों के पास सीमित संसाधन ही मौजूद हैं। आज के समय में भी एक लाठी के सहारे जंगल की रखवाली कैसे की जा सकती है। विभाग से कभी लाठी टार्च भी नहीं मिलता है।
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